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मजबूत लोकतंत्र और उसमे मतदाता की महत्वपूर्ण भूमिका-2022 फ़िर चुनावी वर्ष की तैयारियां शुरू

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अनोखे लाल द्विवेदी

लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ “लोगों का शासन में होना है।” वैसे संस्कृत में लोक को “जनता” और तंत्र को “शासन” कहते हैं या हम प्रजातंत्र भी कह सकते हैं। हालांकि वर्तमान परिदृश्य में लोकतंत्र व शासन का प्रयोग अधिकतर राजनैतिक संदर्भ में ही किया जाता हैं परन्तु  हमे यह नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र का सिद्धांत दूसरे समूहों और संगठनों के लिए भी जरूरी है। लोकतंत्र एक ऐसी मजबूत शक्ति है जिसमें सर्वोच्च सत्ता जनता के पास होती है।

यही कि जनता की सरकार से अभिप्राय सत्ता लोगों के हाथ में रहती है और लोगों द्वारा ही निर्वाचित और निर्देशित होती है। सरकार आम जनता में से बनती है तथा सरकार आम जनता के प्रति जिम्मेदार तथा जनता के हितों की रक्षा के लिए है क्योंकि लोकतंत्र द्वारा ही उस सरकार को बनाया जाता है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति जो मतदान करता है वह प्रत्यक्ष रूप से अपने निर्वाचित व्यक्ति को चुनते हैं जो कि शासन करते हैं, जिसे संविधान की दृष्टि से बहुमत का शासन या आम जनता का शासन भी कहा जाता है। अगर हम इस चर्चा को राजनैतिक परिपेक्ष में देखें तो लोकतंत्र, शासन, सरकार,मंत्री इन सब को हम याने जनता बनाती है और वो हमारी ताकत जिसके द्वारा हम इसे बनाते है वो ताकत है “मतदान”। याने एक मतदाता ही पूर्ण रूप से इतना शक्तिशाली व सशक्त होता है कि वह ज़ीरो व्यक्तित्व को हीरो बना सकता है। अतः लोकतंत्र में एक मतदाता बहुत ही महत्वपूर्ण रोल अदा करता है।प्रजातंत्र में जागरूक मतदाता आत्मा के समान होता है। प्रजातंत्र का मस्तिष्क निर्वाचन आयोग होता हैं वहीं दिल प्रशासन होता है। मतदाता जागरूक हो तभी प्रजातंत्र मजबूत होगा। उन्होंने कहा संविधान का अनुच्छेद 19 हमें मतदान का अधिकार देता है।

मतदाता की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा मतदाता होकर व्यक्ति प्रजातंत्र की बैंक का शेयर होल्डर बन जाता हैं उसे सहभागिता का अधिकार मिलता है। इसलिए मताधिकार का विवेक एवं बुद्धि से प्रयोग करें भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। विश्व में भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदान को लेकर कम होते रुझान को देखते हुए राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाने लगा था। 25 जनवरी 1950 को, हम गणतंत्र राष्ट्र बनने के एक दिन पहले; चुनाव आयोग की स्थापना हुई थी। हम 2011 से यह दिन मना रहें है| राष्ट्रीय मतदाता दिवस का विचार एक आम वोटर कैप्टन चाँद ने साल 2010 में दिया था। चुनाव आयोग ने सुझाव स्वीकार किया और इसमें सुधार करके 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस शुरू किया| 2011 में यह पहिली बार मनाया गया, इस साल हम 8 वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनायेंगे| पहले मतदाता की पात्रता आयु 21  वर्ष थी, लेकिन 1988  में इसे 18 साल तक घटा दिया गया था। इस बदलाव को शामिल किया गया क्योंकि दुनिया भर के कई देशों ने आधिकारिक मतदान उम्र के रूप में 18वर्ष की सीमा को अपनाया था। उसी समय भारतीय युवा साक्षर और राजनैतिक रूप से जागरूक हो रहा था। 61वे विधेयक संशोधन, 1998  ने भारत में मतदाता की पात्रता उम्र कम कर दिया। भारत की 50 % से अधिक आबादी 35 साल के उम्र के निचे की है और इसका एक बड़ा हिस्सा 18 साल का पड़ाव पार कर रहा है। उन्हें जागरूक करना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें अपने अधिकारों और दायित्वों का एहसास कराना बहुत जरूरी है| इस तरह से हम लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ा सकतें है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह पूरे भारत में 7 लाख से अधिक स्थानों पर मनाया जाता है। हर साल पात्र मतदाता प्रतिज्ञा लेते हैं, फोटो मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करते हैं और उन्हें एक पुस्तिका दी जाती है जो उन्हें अपने अधिकार और दायित्वों पर जानकारी देती है| ऐसे दिनों का जश्न मनाना बहुत महत्वपूर्ण है, इससे देश में लोकतंत्र की ताकद और लोगों का राष्ट्र निर्माण में योगदान बढ़ेगा।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस का विशेष– एक वोट ने फ्रांस में लोकतांत्रिक सरकार का रास्ता प्रशस्त किया; एक वोट के कारण ही जर्मनी.. नाजी हिटलर के हवाले हो गया। यह एक वोट ही था, जिसने 13 दिन में ही अटल सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। एक वोट ने ही कभी अमेरिका की राजभाषा तय की दी थी। यदि एक वोट सरकार बदल सकती है, तो हमारी तकदीर क्यों नहीं ? स्पष्ट है कि हमारे एक-एक वोट की कीमत है। अतः हम अपने मत का दान करते वक्त संजीदा हों। हम सोचें कि पांच साल में कोई आकर चुपके से हमारा मत चुरा ले जाता है; कभी जाति-धर्म-वर्ण-वर्ग, तो कभी किसी लोभ, भय या बेईमानी की खिङकी खोलकर और हम जान भी नहीं पाते। यह अक्सर होता है। इन खिङकियों को कब और कैसे सीलबंद करेंगे हम मतदाता ? इस राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मतदाता से जवाब मांगता, प्रथम प्रश्न यही है। यह सच है कि बीते एक दशक में चुनाव को कम खर्चीला बनाने में निर्वाचन आयोग ने निश्चित ही शानदार भूमिका निभाई है; किंतु लोभमुक्त और भयमुक्त मतदान कराने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। ये हम मतदाता ही हैं, जो कि उम्मीदवार को इस सच्चाई से वाकिफ करा सकते हैं कि चुनाव न हार-जीत का मौका होता है और न ही यह कोई युद्ध है। चुनाव मौका होता है, पिछले पांच साल हमारे जनप्रतिनिधि द्वारा किए गये कार्य व व्यवहार के आकलन का। चुनाव मौका होता है, अगले पांच साल के लिए अपने विकास व विधान की दिशा तय करने का। यह तभी हो सकता है, जबकि मतदाता मतदान के बाद सो न जाये। प्रजातंत्र में मतदान कर गांव से संसद तक प्रतिनिधि चुनकर भेजने का अधिकार जनता के पास होता है। हमारे वोट से ही देश की दिशा तय होती है, इसलिए निष्पक्ष, बिना प्रलोभन के मतदान करना चाहिए। अतः उपरोक्त विश्लेषण में हमने देखा कि लोकतंत्र में मतदाता की एक महत्वपूर्ण भूमिका है जिसका निर्वहन मतदाता को अपने विवेक व बुद्धि का उपयोग कर सामाजिक व जनहित में अपने मत का उपयोग जरूर करना चाहिए

अनोखे लाल द्विवेदी
लेखक,संकलनकर्ता ,स्वत्रंत पत्रकार, अनंत टी वी लाइव के सलाहकार संपादक है 
मोबाइल 9425166300 व्हाट्स एप
Address :- 4,Simran Appartment  Bhopal 462023 M.P.

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