अग्नि आलोक

छात्र- इंडियन एक्सप्रेस- पगवाश कॉन्फ्रेंस

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लक्ष्मण बोलिया
फरवरी महीने का आज का दिन। उदयपुर के लेक पैलेस होटल में विज्ञान एवं विश्व मामलों पर विभिन्न देशों के 130 वैज्ञानिकों तथा विशेषज्ञों की सात दिवसीय “पगवाश कांफ्रेंस”का समापन का दिन था।
●तब मै उदयपुर के एम.बी. कोलेज में एम.ए.(राजनीति शास्त्र )का छात्र होने के साथ -साथ पत्रकारिता भी करता था। एक जनवरी 1964 से इंडियन एक्सप्रेस ,दिल्ली के संवाददाता का नियुक्ति पत्र मिलने के दो सप्ताह बाद पगवाश कांफ्रेंस कवर करने की चिट्ठी तथा रोजाना 500 शब्दों में समाचार भेजने लिए टेलीग्राफिक ओथेरिटी भी भेजी गई ।
●मेरे लिए इस कठिन विषय पर वैज्ञानिकों की कॉन्फ्रेंस कवर करना बडी चुनौती के साथ थोडी घबराहट भी थी। लेकिन मैने उदयपुर में इसी कान्फ्रेंस में भाग लेने आए हुए विख्यात वैज्ञानिक डा.दौलत सिंह कोठारी से घर पर मिल कर समाधान निकाल लिया । उन्होने हर दिन मेरी मदद की फलस्वरूप रोज अखबार में खबर छपती और मै खुशी के मारे फूला नहीं समाता। तब उदयपुर में कुछ ही स्थानो पर यह अखबार मनाया जाताथा।


मै सूरज पोल के वहां बंसल मेडिकल स्टोर पर जाकर अपनी छपी खबर पढ कर खुशी मनाता था।
मेरे यहां डाक से दो दिन बाद पहुंच पाता।
●अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस कवर करने के लिए विदेशी पत्रकारों के अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया,जयपुर के टी एन कॉल ,यू एन आई जयपुर के एन प्रभु तथा इंडियन एक्सप्रेस से मैं था। कुल 18 से 20 पत्रकार अलग-अलग देशों से आए थे। रोजाना निर्धारित समय पर ब्रीफिंग होती थी। प्रति वर्ष आयोजित होने वाली इस कॉन्फ्रेंस मे पढ़े जाने वाले पेपर तथा अन्य विचार विमर्श पूरी तरह से गोपनीय रखे जाते थे। इसी दृष्टि से उन्होंने उदयपुर के लेक पैलेस होटल को चुना ताकि बिना पहचान पत्र के कोई भी व्यक्ति बोट में सवार होकर होटल में नहीं आ सके।
वैसे सम्मेलन का उद्घाटन पंडित
जवाहरलाल नेहरू को करना था लेकिन अस्वस्थ होने से उन्होंने श्रीमती इंदिरा गांधी को स्वागत एवं व्यवस्था में सहयोग करने के लिए उदयपुर भेजा था। कॉन्फ्रेंस में 7 सदस्यों के भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉक्टर एच.जे.भाभा कर रहे थे। उन्होंने कांफ्रेंस की अध्यक्षता की। डॉ. विक्रम साराभाई की पत्नी मृणालिनी साराभाई ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया था।
●मैंने कॉन्फ्रेंस में रशियन परमाणु वैज्ञानिक एकेडेमीशियन मिलंशिकोव, ब्रिटिश तथा पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिकों से डा. कोठारी की मदद से विशेष बात की थी।
●दिनांक 9 जुलाई 1955 को विश्व में बढ़ते जा रहे परमाणु हथियारों के खतरों का आक्कलन करने के लिए बर्ट्रेंड रसेल -आईंस्टाईन घोषणापत्र जारी किया गया। कुल 10 वैज्ञानिकों व थिंकर्स के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
●इसी घोषणा पत्र के तहत कनाड़ा के नोवा स्कोटिया के पगवाश शहर में रहने वाले परोपकारी उद्योगपति साइरस ईटन ने अपने यहाँ 22 वैज्ञानिकों का सम्मेलन दिनांक 13 जुलाई 1957 आयोजित किया जिसको पगवाश सम्मेलन कहा जाता है। इसका सारा खर्च ईटन ही वहन करते हैं। जिस मकान में यह सम्मेलन हुआ उसको थिंकर्स लोज कहा जाता है।
●वैसे प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू पहला सम्मेलन भारत में आयोजित करना चाहते थे लेकिन स्वेज नहर विवाद के कारण व्यवधान होने से नहीं हो पाया।

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