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खुदखुशी और खतना

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~दिव्या गुप्ता, दिल्ली

किसी ने पूछा कि खुदखुशी (आत्महत्या) और खतना का क्या संबंध है. मैं कम्प्लीटली इसका जवाब तो नहीं, हाँ संकेत देती हूँ. जवाब आपके भीतर से ही आये तो मजा आएगाl
मेरा निवेदन यह है कि खतना एक पहला कदम है कथित सुधार ,विस्तार, शक्ति और आत्म विश्वास की दिशा में l
सच कहूँ तो मौलिक ,प्राथमिक सबसे जरूरी बात जो समझने की है वह खतना भी नहीं, लिंग हैं l
जैसे ही हम लिंगोन्मुखी होते हैं वैसे ही हम जीवन ,इहलोक ,संसार ,स्त्री और आनन्द की तरफ उन्मुख होते हैं.
मुसलमानों ने इस कला को खतना से साधा है तो हिन्दू धारणा भी कुछ यही कहती थीl
कुण्डलिनी ऊर्जा का स्त्रोत कहाँ है ? मूलाधार किसे कहते है ?यह शब्द अपने आप में सारी कहानी कहता है अगर हम समझना चाहें.
आधार ही नहीं कहा गया बल्कि मूलाधार कहा गया, क्यों ? जब हम इस मूलाधार से जुड़ते हैं तो हम ऊर्जा ,क्रियाशीलता ,प्रेरणा और उत्साह से जुड़ते हैं यही प्रवृति मार्ग हैं.
जैसे ही हम इस आधार से हटते हैं हमारी दशा सूखे पत्ते ,संदर्भ से कटे हुए एक अलग थलग से व्यक्ति जैसी हो जाती हैं।
ये वे ही लोग हैं जो निवृतिमार्गी हैं. जो संसार का कल्याण नहीं आत्मकल्याण की बातें करते हैं. जिनके लिए जीवन एक चुनौती नहीं, एक भार होता है।
जगत मिथ्या ,संसार असार कहने वाले इन लोगों में ही आत्महत्या प्रवृति होती है l
सारी चीजें एक साथ चलती हैं जो जीवन को धर्मशाला कहता है, वही ब्रह्मचर्य की भी बातें करता है।
ध्यान की जो हमारी पुरानी पद्धतियां थी उसमें मूल केन्द्र क्या था ?सबसे पहला चक्र कौन सा है ? मूलाधार को जागृत किये बिना हम स्व में ही स्थित नहीं हो सकते तो फिर स्वस्थ कैसे हैं?
आज हम सब इसी दशा में हैं -बीमार। कोई भी अपराध हो सकता है कि वे करते हैं, मगर आपने कभी मुसलमानों को आत्महत्या करते नहीं देखा होगा।
यह बात बहुत रहस्यमयी है।आत्महत्या ईसाइयों में भी होती है। हिन्दुओं और बोध्दों में तो जबरदस्त है यह मगर मुसलमानों में सालों में एकाध किस्सा कभी होता है।
क्या वहां ग़रीबी, कर्ज, घाटा,प्रेम टूटना, परीक्षा में फ़ेल होना आदि नहीं होते? वास्तव में ये सब तो बहाने होते हैं मरने के, आत्महत्या के।
इस रहस्य को समझना कि मुसलमानों में आत्महत्या कम से कम (न के बराबर )क्यों होती हैं : यही इस्लाम के रहस्य को समझना है. यही इस्लाम का मुख्य आकर्षण, उर्जा, प्रेरणा और ताकत है।(चेतना विकास मिशन)

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