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भूपेश बघेल की तानाशाही के शिकार बनें सुनील नामदेव

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त्रकारों पर हुई इस कार्यवाही के बाद दहशत में है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ

विजया पाठक

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार इन दिनों प्रदेश की जनता की सुरक्षा को छोड़ पत्रकारों के पीछे हाथ धोकर पीछे पड़ी हुई है। मुख्यमंत्री बघेल इन दिनों पूरी तरह हिटलर के स्वरूप में आ खड़े हुए है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया को भी अब यह सरकार अपने इशारों पर चलाना चाहती है। लेकिन बघेल यह भूल गए है कि यह कलम के सिपाही है जो न किसी के आगे झुकेंगे और न किसी से डरेंगे। बघेल के इशारों पर ही पिछले दिनों छत्तीसगढ़ पुलिस ने आजतक के पूर्व संवाददाता व वरीष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव व उनके साथियों को एक्सटॉर्शन के मामले में गिरफ्तार किया है। छत्तीसगढ़ पुलिस का यह रवैया बिल्कुल ठीक नहीं कि पत्रकारों के ऊपर इस तरह से गलत आरोप लगाकर उन्हें हिरासत में ले लिया जाए। जरा सोचिए जब यह निर्दयी सरकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ इस तरह से पेश आ रही है तो जनता की क्या मजाल कि वो इस सरकार के खिलाफ कोई आवाज उठाए। लोकतंत्र में राज व्यवस्था, न्याय व्यवस्था के बाद मीडिया ही बचा है जिसको कोई भी व्यक्ति अपने हिसाब से नहीं चला सकता। लेकिन भूपेश बघेल मीडिया को भी अपने हिसाब से चलाना चाहते है। वो चाहते है कि पत्रकार उनके काले करतूतों को बिल्कुल न दिखाए और न ही छापे। बल्कि उनकी साफ और स्वच्छ छवि रोज अखबारों और चैनलों में प्रसारित करें। लेकिन यह कौन सा तरीका है जनाब? आप पत्रकारों को अपने हिसाब से चलाकर क्या साबित करना चाहते है? आज यदि आप एक सुनील नामदेव को गलत आरोप में अंदर करेंगे तो कल को न जाने कितने सुनील नामदेव पत्रकार बनकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे किस-किस को रोक सकेंगे आप? कितनों को जेल में रखेंगे आप? यह पहला वाक्या नहीं है जब बघेल सरकार ने पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार किया हो। इससे पहले भी कमल शुक्ला सहित न जाने कितने पत्रकार बघेल की इस निर्दयिता का शिकार हुए है। यहां तक की भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के अंदर किए गए भ्रष्टाचार को जनता तक पहुंचाने पर मेरे खिलाफ भी कार्यवाही करने की कोशिश की। बघेल की इस भ्रष्टाचारी और तानाशाही सरकार में पत्रकारों की आवाज को दबाया जाता है, कुचला जाता है। मीडिया की आजादी को दबाकर तानाशाही रवैया अपनाया जाता है। जिस सराकर को भू-माफियाओं से प्रदेश को बचाना चाहिए वो सरकार इन्हीं माफियाओं की हितैषी बनी हुई हैं और मीडिया की आवाज को दबाना चाहती है। लगातार पत्रकारों पर होते एक के बाद एक हमलों के बाद पत्रकारों में दहशत का माहौल है। सुनील नामदेव और उनके साथियों के साथ हुई घटना को लेकर इंडियन मीडिया वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन खफा है और उन्होंने भी बघेल सरकार के इस रवैये पर कहा है कि छत्तीसगढ़ में  पत्रकारों के खिलाफ पुलिस द्वारा प्रार्थी बनकर अपराध दर्ज कराया जाना राजनीति से प्रेरित षडयंत्र  प्रतीत हो रहा हैं। वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव और उनके साथियों के विरुद्ध दर्ज  हुए  अपराध ऐसे ही प्रतीत हो रहे हैं। इनकी उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होना जरूरी है। अगर छत्तीसगढ़ में पत्रकारों के विरुद्ध इसी तरह षडयंत्र पूर्वक अपराध दर्ज होते रहे तो पत्रकारिता तो कोई पत्रकार कर ही नहीं पायेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लिख नहीं पायेगा।नियम और कानून के विरुद्ध  जो काम हो रहे हैं उनके बारे में लिखना कठिन हो जाएगा। इस तरह दर्ज किए जा रहे अपराधों की राष्ट्रीय  मिडिया घोर निंदा करती है।

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