शिवानंद तिवारी,Ex MP:
: सुशील मोदी बेचैन आत्मा हैं. अगर रोज़ कुछ नहीं बोलें तो इनको अपच की बीमारी हो जाती है. नीतीश कुमार तेजस्वी को सत्ता सौंपेंगे या नहीं इसकी चिंता में उनको दुबले होने की ज़रूरत नहीं है.
लगभग पचास वर्ष पूर्व बिहार आंदोलन से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले सुशील मोदी जी अपनी राजनीति की ढलान पर हैं. नई उम्र के तेजस्वी की राजनीति तो अभी अपने उठान पर है. पद प्रतिष्ठा के लिहाज़ से अपने पचास वर्षों की राजनीतिक यात्रा में सुशील मोदी जी ने जो कुछ अब तक हासिल किया है वह सब तो तेजस्वी ने तैंतीस-चौंतीस वर्ष की उम्र में ही हासिल कर लिया है. इसलिए उनके सामने तो उड़ान के लिए सारा आकाश सामने है. सुशील जी भूल जा रहे हैं कि वे अब अतीत हैं तो तेजस्वी भविष्य. अब यह तेजस्वी पर निर्भर है कि वे अपने परिश्रम और लगन के द्वारा अपनी क्षमता का कितना विस्तार करते हैं

