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एसएसपी गाज़ियाबाद पवन कुमार का निलंबन…!

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विजयशंकरसिंह 
विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान जनपद पुलिस और बीजेपी नेताओं के बीच शुरू हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेताओं द्वारा गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों भाजपा की जीत न पचा पाने आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत करने की धमकी देने के बाद अब जनपद के कप्तान ने, मेरे कहने पर हुआ है, के तेवर दिखाकर अपने अधिनस्थों का बचाव करते हुए स्वयं मोर्चा सम्भाल लिया है। 
आम तौर पर बेहद शांत माने जाने वाले एसएसपी पवन कुमार की भाजपा नेताओं को लेकर दिखाई गई इस सख्ती से सभी स्तब्ध हैं। इसके साथ ही कप्तान के इस रूप से साथ आने पर अधिनस्थों के हौसले भी बुलन्द हुए हैं। एसएसपी पवन कुमार ने दिखा दिया है कि उनके लिए कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोपरि है। इसके लिए वह किसी के दबाव में नहीं आएंगे। इससे पहले हिन्दू युवा वाहिनी के नेताओं के विरुद्ध भी जनपद पुलिस ने सख्त रवैया अपनाते हुए उन्हें कानून व्यवस्था भंग नहीं करने दी। 
दरअसल 10 मार्च को विधानसभा चुनाव 2022 की मतगणना के दौरान पुलिस ने मतगणना स्थल के 200 मीटर के दायरे में बिना पास वालों को रोकने के लिए बैरियर लगाए थे। दोपहर 2 बजे करीब गाजियाबाद के भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा, महापौर आशा शर्मा और राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल भाजपा कार्यकताओं ने मतगणना स्थल तक जाने के लिए कहा। 
पुलिस द्वारा रोकने पर भाजपा नेताओं ने हंगामा कर दिया और धरने पर बैठ गए। इसके बाद पुलिस भाजपा नेताओं को गोविंदपुरम चौकी ले गई थी और करीब चार घंटे चौकी में बैठाने के बाद उन्हें रिहा किया गया। पुलिस द्वारा की गई इस कार्यवाही से तमतमाए भाजपा महानगर अध्यक्ष, महापौर और राज्यसभा सांसद ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पुलिस अधिकारियों पर भाजपा की जीत न पचा पाने का आरोप लगाया था। 
उन्होंने एएसपी आकाश पटेल और एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री को पत्र लिखने की बात कही थी। शांत स्वभाव के जनपद कप्तान पवन कुमार भाजपा नेताओं द्वारा पुलिस अधिकारियों की इस प्रकार सरेआम बेइज्जती किये जाने पर एकदम फ्रंट फुट पर आ गये। 
उन्होंने बीजेपी नेताओं को उन्ही के अंदाज में जवाब देते रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि बिना पास धारक लोगों को बैरियर से आगे न जाने के आदेश उन्होंने ही दिए थे। एएसपी आकाश पटेल और एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा ने अपनी ड्यूटी को अंजाम दिया है। मतगणना के दिन हुए घटनाक्रम की पूरी जिम्मेदारी उनकी है। कप्तान द्वारा इस तरह बचाव में आने के बाद जहाँ भाजपा नेताओं के हौसले पस्त हुए हैं तो वहीं पुलिस विभाग अपने कप्तान के इस फैसले पर गर्वित हो रहा है। 
अब देखने वाली बात यह होगी कि योगी आदित्यनाथ कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिस कप्तान की हौसला अफजाई करते हुए उन्हें गाजियाबाद का कप्तान बनाए रखते हैं या फिर अपने नेताओं की सिफारिश पर पुलिस का मनोबल गिराते हुए कप्तान का तबादला करके भाजपा नेताओं को कानून व्यवस्था तार-तार करने की छूट देते हैं। 

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