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दवाईयों की दासता से मुक्ति की युक्ति

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आरती शर्मा

    _पूर्व कथन : हमारे इस लघु-लेख को विज्ञापनी प्रचार-प्रसार से पृथक समझना ज़रूरी है. एडवरटाइजिंग का ऐम व्यापारवृद्धि होता है और हम सर्वथा निःशुल्क सुलभ हैं._

      आज हर घर मिनी मेडिकल स्टोर है. मेडिसिन पर चल रही है लाइफ. इंसान दवाईयों का गुलाम बन चुका है.

      _एक लोक-कहावत है : या ठगाये रोगी या ठगाये भोगी. आज इंसान रोगी और भोगी दोनो है. तन मन धन सभी के ठगाये जाने का यही कारण है._

      मूलतः नियमरहित, असंयमित/अनैतिक भोग ही तमाम रोगों का कारण है. महामारी और एक्सिडेंटल केस को अलग कर दें तो सारी बीमारियों के मूल में गलत विचार-आचार, गलत आहार- विहार ही काम कर रहा है.

    _इनको सही करके नैसर्गिक आरोग्य का अर्जन सहज संभव है._

     आप दवाएँ खा कर थक चुके या अब ऑपरेशन की सोच रहे तो हमारा एक शिविर लें, बिना कुछ दिए.  दवाईयों की दासता से आप मुक्त हो जाएंगे.

    _ऐंज़ाइयटी, आर्थ्राइटिस, अस्थमा, मेंटल प्रॉब्लम, ऑटिज्म, ब्लड प्रेशर, मसल्ज़ पैन, खाना न पचना, फ़िट्स, फ़्रोज़ेन शोल्डर, नींद न आना, स्पोंडायलिटिस, पाइल्स, साइनस, स्ट्रेस, टेनिस एल्बो, थाइरॉड, पेशाब की जलन, सिफलिस, नामर्दी, महिलाओं का सेक्सुअल ठंडापन, योनि विकार, हाथों पैरो मे दर्द, छाती मे दर्द, पैर के तलवों मे दर्द, हाथों पैर या उँगलिया सून्न होना, बैरीकोज वैन्स, हाथों पैरो मे जलन, जोड़ो का दर्द, क़ब्ज़, गैस, अपच, थकान, फेटी लीवर, नसों मे दर्द, पीठ दर्द, कूल्हे मे दर्द, गर्दन दर्द, कंधे का  दर्द, टांग दर्द , घुटनों का दर्द ,एड़ी दर्द , कोहनी दर्द , कमर दर्द ,पेट दर्द ,पैर दर्द तथा पैर का लकवा, सायटिका, या फिर माइग्रेन, सर्वाइकल, डिप्रेशन, शुगर, मोटापा, पतलापन, पार्किंसन, मंद बुद्धि बच्चे, आरम्भिक पैरालिसिस, स्लिप डिस्क से मुक्ति मात्र 15 दिन में._

   

  (चेतना विकास मिशन)

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