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*खान-पान का विज्ञान : रखें खाद्य-संयोजन का ध्यान*

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        डॉ. नीलम ज्योति

“जैसा अन्न, वैसा मन. वही होते हो, जो खाते हो।” यह वाक्य केवल एक कहावत नहीं, बल्कि विज्ञान की दृष्टि से भी पूरी तरह सच है। हमारा शरीर हमारे द्वारा खाए गए भोजन से ही बनता, बढ़ता और चलता है। लेकिन क्या केवल अच्छा भोजन करना ही काफी है? नहीं! 

  जितना जरूरी संतुलित भोजन है, उतना ही ज़रूरी यह ध्यान रखना है कि हम कौन-कौन सी चीजें एक साथ खाते हैं. इसलिए कि,  कुछ खाद्य पदार्थ एक-दूसरे के साथ मिलकर चमत्कारी लाभ देते हैं, तो कुछ साथ खाकर शरीर को धीमा ज़हर देते हैं।

    अत: जरूरी है कि हम खानपान के इस विज्ञान को समझें — ताकि न सिर्फ स्वाद मिले, बल्कि सेहत भी सहेजी जा सके।

*खाद्य संयोजन :*

    हमारा भारत एक ऐसा देश है जहाँ दादी-नानी की रसोई में ही पोषण का गूढ़ विज्ञान छुपा होता है।

  जैसे :

* “दूध-दही-छाछ के साथ मछली मत खाओ.”

*  “खाली दूध के साथ नमक नहीं खाओ.”

*  “फल हमेशा भोजन से पहले खाओ.”

*  “शहद को कभी गर्म मत करो.” 

    ये बातें कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर आधारित हैं। इन्हें हम ‘खाद्य संयोजन विज्ञान’ कहते हैं।

 *वे चीजें जो साथ खाने पर वरदान बनती हैं :*

1. दाल और चावल

दाल में प्रोटीन होता है लेकिन कुछ अमीनो अम्ल कम होते हैं। चावल में वही अमीनो अम्ल होते हैं। दोनों मिलकर पूरा प्रोटीन बनाते हैं।

भारत में ‘खिचड़ी’ या ‘राजमा चावल’ इस संयोजन का आदर्श उदाहरण है।

*2. हरी सब्ज़ियाँ + घी/तेल :*

पालक, मैथी, सहजन जैसी हरी सब्जियाँ विटामिन A, D, E, K से भरपूर होती हैं, जो वसा में घुलनशील होते हैं। यदि इन्हें बिना घी/तेल के खाएं, तो ये विटामिन शरीर में अवशोषित ही नहीं होंगे।

*3. नींबू + आयरन-स्रोत (पालक, चना, अनार) :*

  विटामिन C आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है। इसलिए पालक के साथ नींबू या चने के साथ आंवला खाना लाभकारी होता है।

*4. हल्दी + काली मिर्च :*

    हल्दी में ‘कुर्कुमिन’ नामक तत्व होता है, जो कई बीमारियों से लड़ता है। लेकिन यह शरीर में कम अवशोषित होता है। काली मिर्च में मौजूद ‘पाइपरीन’ इसके अवशोषण को 2000% तक बढ़ा देती है!

*वे चीजें जो साथ खाने पर ज़हर बनती हैं :*

*1. दूध + नमक :*

दूध और नमक दोनों अलग-अलग अच्छे होते हैं, पर साथ लेने से त्वचा रोग, पाचन समस्या और यहां तक कि विषाक्तता तक हो सकती है।

    वैज्ञानिक कारण यह है कि दूध प्रोटीन आधारित है और नमक क्षारीय, दोनों मिलकर शरीर में प्रतिक्रिया करते हैं।

*2. मछली + दही :*

आयुर्वेद में यह संयोजन निषिद्ध माना गया है। मछली गर्म प्रकृति की और दही ठंडी प्रकृति की होती है। यह शरीर में त्वचा रोग या एलर्जी उत्पन्न कर सकता है।

*3. फल + भोजन :*

फल पचने में 30 मिनट लेते हैं, पर यदि उन्हें भारी भोजन के बाद खाएं, तो वे पेट में सड़ने लगते हैं। गैस, अपच, पेट फूलना जैसी समस्याएँ होती हैं।

   इसलिए फल हमेशा खाली पेट या भोजन से कम से कम 1 घंटे पहले खाएं।

*4. दूध + खट्टी चीज़ें (नींबू, टमाटर, अचार) :*

  दूध में मौजूद प्रोटीन खट्टी चीज़ों से मिलते ही फट जाता है, जिससे एसिडिटी और अपच हो सकता है।

*5. शहद को गरम करना :*

  आयुर्वेद में कहा गया है: “शुद्ध मधु को कभी गर्म मत करो।” 

गरम करने पर शहद में हाइड्रॉक्सीमेथिलफुरफुरल (HMF) नामक विष बनता है जो शरीर के लिए हानिकारक है।

*कैसे जानें सही मेल?*

कुछ सरल सिद्धांत अपनाकर हम भोजन को स्वस्थ बना सकते हैं :

* समान प्रकृति के खाद्य पदार्थ एक साथ खाएं जैसे ठंडे + ठंडे, गर्म + गर्म. भोजन गरम खाते हैं, उसके साथ ठंडा पानी नहीं पियें. आयुर्वेद कहता है, पानी भोजन के आधे घंटे पहले या बाद में पीना चाहिए.

* चाय में नमक डालना गलत है. दही में नमक नहीं, मिश्री सही है.

* पाचन समय का ध्यान रखें जल्दी पचने वाले पदार्थ पहले खाएं.

* मौसमी और स्थानीय खाद्य पदार्थ खाएं ये शरीर के अनुकूल होते हैं.

* संयमित मात्रा में खाएं अच्छा भोजन भी ज़्यादा मात्रा में हानिकारक हो सकता है.

 *क्या कहता है विज्ञान?*

   आधुनिक विज्ञान भी अब यह मानता है कि ‘गट हेल्थ’ (आंतों का स्वास्थ्य) हमारे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का आधार है। यदि गलत संयोजन से पेट में गैस, अपच, सूजन होती है, तो उसका असर हमारे मस्तिष्क पर भी पड़ता है — जैसे चिड़चिड़ापन, सुस्ती या एकाग्रता में कमी।

  (अ). यह अवश्य करें :

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी या फल लें. चाय, काफी नहीं लें.

दूध और अनाज/रोटी को साथ लें.

स्कूल के टिफिन में फल व सलाद को अलग रखें.

(ब). यह कभी न करें :

कोल्ड ड्रिंक के साथ समोसा या पिज़्ज़ा न खाएं.

टिफिन में फल + दही एकसाथ न रखें.

गर्म दूध के साथ नमकीन या अचार न लें.

        स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है : सही समय पर, सही मात्रा में, और सही संयोजन से खाना। भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, विचार और व्यवहार का भी आधार है।

    इसलिए अगली बार जब आप थाली में खाना परोसें, तो केवल स्वाद नहीं, संयोजन का विज्ञान भी याद रखें। यही विज्ञान आपको स्वस्थ रखेगा, प्रसन्न रखेगा और सशक्त बनाएगा।

 सूक्ति :

> “खानपान का सही ज्ञान, रखे जीवन सदा महान।”

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