डॉ. विकास मानव
_सब-कांसियस माइंड की सक्रियता के बिना ध्यान में प्रवेश करना असंभव है. सब-कांसियस माइंड का उपयोग कैसे किया जा सकता है? हमारे इस लेख का विषय यही है._
हमारा सारा तनाव, सारा टेंशन मन के तीसरे तल सब-कांसियस यानि अवचेतन मन के सक्रिय नहीं हो पाने के कारण ही है!
*मन के चार तल :*
पहला चेतन मन (conscious mind),
दूसरा अचेतन मन (unconscious mind),
तीसरा अवचेतन मन (subconscious mind) और
चौथा है अति-चेतन मन (super conscious mind).
चेतन मन, मन का पहला तल है जो सोच-विचार करता है। कल्पना करता है, जो सारे दिन या तो भविष्य की किसी योजना पर विचार करता रहता है या अतीत की किसी स्मृति में डूबा रहता है और अपना काम करता रहता है। यानि चेतन मन दिन भर सक्रिय रहता है।
दूसरा तल अचेतन मन है, जो हमारे शरीर के नींद में प्रवेश करने के बाद सक्रिय होता है। अतीत की यादें और भविष्य के सपने अचेतन मन में दर्ज होते हैं। इसलिए नींद में प्रवेश करने के बाद यह हमें सपने दिखाता है और हमारी इच्छाओं, आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करता रहता है। यानि चेतन मन दिन में सक्रिय रहता है और अचेतन मन रात को नींद में प्रवेश करने के बाद सक्रिय होता है जब हम सपने देखने लगते हैं!
तीसरा तल है अवचेतन यानि सब-कांसियस माइंड! सब-कांसियस सक्रिय होता है चेतन और अचेतन दोनों के सो जाने के बाद!
आधी रात के बाद , जब हमारा शरीर गहरी नींद में प्रवेश करता है। तब हम अवचेतन मन में प्रवेश कर जाते हैं। जहां विचार और स्वप्न दोनों नहीं होते हैं! क्योंकि विचार चेतन मन में चलते हैं और सपने अचेतन मन में चलते हैं!
अवचेतन निर्विचार का केंद्र है जहां पर सिर्फ उर्जा का भंडार है। हम दिनभर काम करके थक जाते हैं और रात को गहरी नींद में जाकर अवचेतन मन से फिर से उर्जा ले लेते हैं। यानि अवचेतन मन हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है।
चेतन, अचेतन और अवचेतन, हमारा सारा जीवन इन तीनों तलों पर ही डोलता रहता है। जिसमें हम चेतन मन और अचेतन मन का तो बहुत उपयोग करते हैं लेकिन अवचेतन मन का उपयोग नहीं कर पाते हैं। सारे तनाव सारी परेशानियां अवचेतन मन से दूरी बनाने के कारण से ही हैं। जब तक हम मन के तीनों तलों का उपयोग नहीं करेंगे हम तनाव में रहेंगे और ध्यान में प्रवेश करना मुश्किल होता रहेगा।
हम दिन में सोच-विचार और काम करते हुए चेतन मन का पूरा उपयोग करते हैं और हमारा अचेतन मन भी हमें सपने दिखाता है और सक्रिय रहता है। लेकिन हमारा मन का तीसरा तल अवचेतन सक्रिय नहीं हो पाता है क्योंकि हम गहरी नींद में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। गहरी नींद में ही हमारा अवचेतन मन सक्रिय होता है। और हमें उससे उर्जा मिल पाती है।
हम दिनभर काम करते हैं तो रात को गहरी नींद में हमें अवचेतन से पुनः फिर उर्जा मिल जाती है और हम सुबह ताजा अनुभव करते हैं। यदि हम सारी रात सपने ही देखते रहते हैं और गहरी नींद में हमारा अवचेतन मन सक्रिय नहीं होता है तो हम सुबह थकान और तनाव महसूस करते हुए उठते हैं जैसे नींद पूरी नहीं हुई हो!
भोजन के द्वारा जो ऊर्जा, जो शक्ति हम अपने शरीर में डालते हैं उस ऊर्जा को हम पूरी तरह से खर्च नहीं कर पाते हैं क्योंकि हम श्रम नहीं करते हैं। हम काम नहीं करते हैं, सारा काम मशिनें करती है। तो हमारी बची हुई अतिरिक्त उर्जा हमें तनाव और परेशानियों और सपनों में ले जाती है।
हम अपने शरीर को थकाते नहीं हैं इसलिए हम गहरी नींद में प्रवेश नहीं कर पाते हैं तो हमें अवचेतन से उर्जा नहीं मिल पाती है और हम थकान, तनाव और कमजोरी महसूस करते हैं।
कई मौकों पर हमने अवचेतन मन का अनजाने ही पूरा उपयोग किया है और उस मौके को हम कभी भी भूला नहीं पाये हैं। हमने महसूस किया है कि जब बेटी या बहन का विवाह था और हम रात-रात भर जागकर काम करते रहे थे। दुल्हन की विदाई के बाद तो एक गिलास या लोटा ईधर से उधार रखने की भी ताकत नहीं बची थी। उस रात जो गहरी नींद आई थी वह गहरी नींद हम दौबारा नहीं पा सके हैं।
उस नींद में हमें एक सफेद रोशनी ने घेर लिया था। अवचेतन मन ने हमें घेर लिया था और हम आनंद और ऊर्जा से भर गये थे।
अक्सर दुर्घटनाएं आधी रात के बाद ही ज्यादा होती है! क्योंकि वह गहरी नींद का समय है। वह समय अवचेतन मन के जागने का समय होता है। चालक का शरीर दिनभर काम करने के कारण थका हुआ होता है अतः चेतन और अचेतन दोनों मन विलिन होने लगते हैं। और अवचेतन मन जागने लगता है।
आंखें बाहर की चिजों को सिर्फ चेतन मन के जागने के समय ही देखती है। चेतन मन के सोने और अचेतन मन के जागने के बाद आंखों की ऊर्जा स्वप्न देखने के लिए भीतर मुड़ जाती है। चालक का शरीर विश्राम में होता है इसलिए आसानी से नींद की भावदशा में चला जाता है और शरीर जैसे ही नींद की भावदशा में जाता है आंखों की बाहर देखने वाली ऊर्जा भीतर मुड़ जाती है और बाहर की चिजें दिखाई देनी बंद हो जाती है।
अतः आंखें खुली हुई होने के बाद भी बाहर दिखाई देना बंद हो जाता है और दुर्घटना हो जाती है।
अवचेतन मन का उपयोग करने के लिए हमें अपनी ऊर्जा को अतिरिक्त श्रम करके खर्च करना होगा। सुबह दौड़कर पसीना बहाकर और दिन में श्रम करके जब हम रात को नींद में प्रवेश करते हैं तो नींद में प्रवेश करते ही अचेतन मन हमें सपने दिखाने लगता है।
अचेतन में सपने देखने के बाद आधी रात को हमारा शरीर गहरी नींद में प्रवेश करता है तो अवचेतन सक्रिय हो जाता है, हमें अवचेतन से उर्जा मिलने लगती है और हम सुबह उर्जावान होकर नींद से बाहर आते हैं।
गहरी नींद में अवचेतन मन से मिली ऊर्जा से दिन में हम ताजा और तनावमुक्त अनुभव करते हैं। यदि दिन में विचार और तनाव कम रहेंगे तो रात को स्वप्न भी कम आएंगे और हम सतत गहरी नींद में प्रवेश कर अवचेतन मन में होंगे।
जैसे-जैसे हम रोजाना अपने शरीर को थकाकर गहरी नींद में प्रवेश करते रहेंगे वैसे-वैसे ही हमारा अवचेतन मन सक्रिय होने लगेगा और जैसे-जैसे हमारा अवचेतन मन सक्रिय होने लगेगा वैसे-वैसे ही धीरे-धीरे विचार और स्वप्न विलिन होते जाएंगे और हमें गहरी नींद में भी अपना बोध होने लगेगा।
धीरे-धीरे यह बोध बढ़ता जाएगा और जिस दिन जागते हुए अवचेतन मन में प्रवेश होगा उस दिन हमारा ध्यान में प्रवेश हो जाएगा।

