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चाय : एक संस्कृति

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संजय मूंदड़ा

सम्पूर्ण भारत में लगभग प्रत्येक परिवार में चाय का नियमित सेवन होता है . हमारे दिन की शुरुआत चाय से ही होती है . घर , दुकान , ऑफिस में मेहमान नवाजी भी चाय के बिना पूरी नहीं होती . यही कारण है कि भारत में पानी के बाद सर्वाधिक खपत वाला पेय चाय ही है . चाय के व्यापक इस्तेमाल को देखते हुए डीएक्सएन ने एक अनोखी , स्वास्थ्यवर्धक , विश्व स्तरीय क्वालिटी की प्रीमियम चाय प्रस्तुत की है . आसाम और नीलगिरी के चुनिंदा बागानों से चुनी गई डीएक्सएन चाय में जड़ी बूटियों के राजा ‘ गैनोडर्मा ‘ का समावेश किया गया है इस कारण इसे विश्व की सर्वोत्तम चाय कहा जा सकता है . डीएक्सएन चाय को विश्व भर के लोगों ने अपनाकर न केवल अनोखे स्वाद का अनुभव किया बल्कि स्वास्थ लाभ भी प्राप्त किया है . गैनोडर्मा क्या है ? 5000 वर्ष पूर्व से गैनोडर्मा को एक चमत्कारी हर्ब के रुप में चीन व जापान के लोग अमरत्व प्राप्त करने के लिये प्रयोग करते रहे हैं . ‘ गैनोडर्मा ‘ का उल्लेख ‘ चरक संहिता ‘ , ‘ सुश्रुत चिकित्सा विज्ञान ‘ सहित कई प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है . विश्व विख्यात अमेरिकी वैज्ञानिक डा . रिचर्ड गार्डन की पुस्तक ‘ सोम : द डिवाइन मशरुम ऑफ इमॉरटैलिटी ‘ में यह सिद्ध किया गया है कि प्राचीन काल में ऋषि मुनि दीर्घ जीवन के लिये जिस सोम का सेवन करते थे वास्तव में वह गैनोडर्मा ही है . गैनोडर्मा सेलुलर लेवल ( कोशिकीय स्तर ) पर काम करता है , यह हमारे शरीर की कोशिकाओं में से टॉक्सिंस ( विषाणु ) को बाहर निकालकर टोटल बॉडी फंक्शन्स को सामान्य बनाता है और शरीर पर इसका कोई साइड इफेक्ट ( दुष्प्रभाव ) भी नहीं होता है .

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