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 वह धर्म मेरा नहीं हो सकता

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 मुनेश त्यागी

जो धर्म,,,

,, इंसान को इंसान से लड़ाये,

,,, इंसानों में छुआछूत पैदा करें, 

,,, अज्ञानता के बाहर खड़े करे,

,,, ऊंच-नीच की सोच कायम रखें,

,,, मनुष्य का शोषण और अन्याय करें,

,,,उन्हें बौद्धिक रूप से कमजोर बनाए, 

,,, दिलो-दिमाग का दिवाला निकाल दे,

,,,,दिलों दिमाग पर कर्मकांड के पहरे बिठाए,

,,, जो तर्क वितर्क व लॉजिक पर खरा न उतरे,

,,, इंसानों में छोटे बड़े की मानसिकता पैदा करे,

,,, जो शिक्षा को उच्च जातियों तक सीमित रखें,

,,,जो बहुसंख्यक समाज को शिक्षा से वंचित करें,

,,, धर्म को शोषण और अन्याय का औजार बनाएं,

,,, जो sc-st ओबीसी और औरतों को धन-धान्य से वंचित करें,

,,, जो एससी एसटी ओबीसी और औरतों से गुलामी कराये,

,,, जो ज्ञान विज्ञान और वैज्ञानिक संस्कृति का तिरस्कार करे,

,,, जो अंधविश्वास धर्मांधता और अज्ञानता का साम्राज्य खड़ा करें

 वह मेरा धर्म नहीं हो सकता

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