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‘कमल का फूल, सबसे बड़ी भूल’

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कहा जाता है कि दिवाल के भी कान होते हैं, परन्तु भाजपा की रामराज्य वाली सरकार में इस कहावत ने भी विकास कर लिया है. अब उसमें कान के अलावे मूंह भी निकल आये हैं. विश्वास न हो तो पटना के दिनकर गोलम्बर के बिजली के खम्भे से चिपके इस एक पन्ने के इस्तेहार पर भी ध्यान दे डालना चाहिए.

इस्तेहार तो दिवालों और बिजली के खम्भों पर चिपकाये ही जाते हैं, पर हर इस्तेहार बोलता नहीं है. यह इस्तेहार बोलता है, चीखता है और लोगों को पुकार-पुकार कर कहता है – ‘कमल का फूल, सबसे बड़ी भूल.’ हस्तलिखित यह पर्चा किसी गुमनाम लोग ने चिपकाया है, जिसकी शाब्दिक अशुद्वियों को किनारे कर दे तो उसकी पुकार देश की समस्त आम जनता के सामने बहुत बड़े सवाल खड़े करती है, जो सीधे भाजपा के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के गृहमंत्री अमित शाह और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को सम्बोधित है.

विदित हो कि 2014 से पहले प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, वित्तमंत्री देश के हुआ करते थे, लेकिन 2014 के बाद यह बड़ा बदलाव आया है कि यह सभी पद अब देश के नहीं भाजपा के खरीदे हुए हो गये हैं, जो देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घरानों अंबादानी का नौकर मात्र है. बहरहाल, इस पर्चे में उल्लेखित सवालों को हम यहां रख रहे हैं –

लाल किला से प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को तिरंगा झण्डा फहराते हैं. इंडिया गेट, कुतुबमीनार, ताजमहल, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, पटना का सचिवालय, राज्यपाल भवन जो ढ़ाई एकड़ जमीन में बना है. मंत्री, विधायक को ट्रेन यात्रा, विमान यात्रा, बिजली, टेलीफोन ये सब मुफ्त है. मंत्री-विधायक, संसद बनने के बाद आजीवन पेंशन. विधायक जीतकर संसद बन जाता है तो उसे दोनों लाभ मिलता है. भारत की आम जनता दस धूर के मकान में पूरा परिवार सिमट कर रहता है.

भारत सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं जिसमें भारत के 80 करोड़ गरीब जनता को 5 किलो राशन, एलपीजी गैस सिलेण्डर, शौचालय के बारे में प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री, संसद, विधायक हर चुनाव के समय कहते हैं कि हमने ये सारा समान गरीब जनता को फ्री में दिया है, कहकर उनका उपहास करते हैं लेकिन मंत्री, संसद, विधायक अपने फ्री में मिले ये सारा समान उपयोग करते हैं तब भी किसी चुनाव में अपने बारे में नहीं कहते हैं.

पेट्रोल, डीजल से केन्द्र सरकार को 3 लाख 79 हजार करोड़ की कमाई हो रही है. राज्य सरकार एक लाख 25 हजार करोड़ की कमाई कर रही है. सीएनजी, पीएनजी (पाईप नेचुरल गैस), एलपीजी, खाद्य पदार्थों का दाम भी चरम पर है.

गरीब जनता को सरकार कुछ भी फ्री में नहीं देती है. नल-जल योजना में आम जनता को तो ढ़ंग से पानी भी नहीं मिल रहा है. क्या नल का जल मंत्री, संसद, विधायक, नौकरशाह उस जल को पीते हैं ? डबल इंजन की रेल स्टेशन नहीं मिली तो एक गली से होते हुए मथुरा, अयोध्या होते हुए गोरखपुर यार्ड में चली गई.

पर्चे का मजमून यहां खत्म हो जाता है, परन्तु, ‘डबल इंजन की रेल स्टेशन नहीं मिली तो एक गली से होते हुए मथुरा, अयोध्या होते हुए गोरखपुर यार्ड में चली गई’, का तंज आने वाले वक्त में इस बिजली के खम्भे से निकल समूचे देश में गूंज उठेगी और संभव है कि इस रामराज्य वाली आततायी सरकार को ही उखाड़ फेंक दे. आखिर बिहार के प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु के आवासीय  गोलम्बर ‘दिनकर गोलम्बर’ से निकली यह गूंज यहीं तो नहीं रूक सकेगी.

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