-सुसंस्कृति परिहार
जी हां 2025 में इस बार दो अक्टूबर को महात्मा गांधी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का जन्मदिवस है। हालांकि संघ का जन्मदिवस हिंदी कैलेंडर के मुताबिक विजयादशमी को पड़ता है।यह अद्भुत संयोग है कि संघ का सौवां साल दो अक्टूबर यानि गांधी जयंती और लालबहादुर शास्त्री का जन्मदिन है और संघ का शताब्दी वर्ष भी।
खास बात ये है कि महात्मा गांधी के हत्यारे का सम्बंध राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से था इसलिए संगठन से देश में नफ़रत आज भी मौजूद है।इस घटना से नाखुश तत्कालीन गृह मंत्री बल्लभभाई पटेल ने संघ पर बैन लगाया था। लेकिन लंबे अंतराल के बाद प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ये कहकर कि वे देश के नागरिक हैं और वे सांस्कृतिक संगठन के लिए अनुमति चाहते हैं तो केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने सहमति दे दी, बेन हटा दिया गया। किंतु इससे सरकारी कर्मचारी को दूर रखने की बात रखी गयी थी फलस्वरूप सरकारी कर्मचारी कभी भी संघ की शाखाओं या कार्यक्रम में नहीं गए। भाजपा सरकार बनते ही ये बेन अपने आप ख़त्म हो गया।आज सरकारी कर्मचारी अधिकारी इनसे खौफ़ खाता है उन्हें सलामी ठोकता है बल्कि यूं कहें उनका जोर खरीद गुलाम है।2014 से भाजपा सरकार बनने के बाद संघ का राजनैतिक हस्तक्षेप सरकार के कामों में बना हुआ है।

बहरहाल गांधी विचारधारा और संघ की विचारधारा में जमीन आसमान का फ़र्क है। गांधी की हत्या की वजह देश से समस्त मुसलमानों की पाकिस्तान वापसी ना होने से हुई। भारत और जिन्ना दोनों ने यह घोषणा की थी जो हिंदू पाकिस्तान से जाना चाहते हैं वे जाएं जिन्हें रहना है वे रह सकते हैं इसलिए बहुत से हिन्दू परिवार वहां रह गए इसी तरह का ऐलान भारत में हुआ लेकिन गांधी नहीं चाहते थे कि यहां के मुसलमान पाकिस्तान जाएं। क्योंकि भारत में तो सभी धर्मों को पवित्र नज़रों से देखा जाता है। हज़ारों वर्षों से वे साथ रहे हैं उन्हें यहीं रहने दिया जाए। लेकिन बहुत से भयभीत परिवार पाकिस्तान चले जा रहे हैं ये देखकर गांधी जी बहुत दुखित हुए वे नोआखोली में जाकर अनशन पर बैठ गए। जिसका असर हुआ मुसलमान रुक गये। हिंदू मुसलमानों ने भाईचारे से रहने की शपथ ली तब जाकर गांधी जी ने अनशन तोड़ा।
यही बात संघ और दक्षिण पंथी लोगों को चुभ गई। तब संघ ने गांधी को मारने के कई प्रयास किए।अंत में, दिल्ली में प्रार्थना सभा में जाते हुए गांधी के सामने झुककर तीन गोलियां नाथूराम गोडसे ने मार दीं ।गांधी जी शहीद तो हो गए लेकिन उनकी मृत्यु के बाद गांधी की विचारधारा संघ के सामने सन् 1948 से 2013 तक मज़बूती से खड़ी रही। देश प्रजातांत्रिक कसौटी पर खरा उतरा और विदेशों में गांधी विचारधारा फलीभूत हुई।ये बात इससे प्रमाणित होती है कि दुनिया के बहुसंख्यक देशों में गांधी की मूर्तियां ससम्मान खड़ी हुई है।ऐसा लोकप्रिय और कोई व्यक्ति आज तक नहीं हुआ।गांधीजी के 70वें जन्मदिन पर आइंस्टीन ने एक प्रसिद्ध लेख मे लिखा था, ” आने वाली पीढ़ियाँ शायद ही इस बात पर विश्वास करेंगी कि ऐसा कोई व्यक्ति कभी इस धरती पर चला था। “
जब महात्मा गांधी की हत्या की ख़बर ब्रिटेन पहुंची तो प्रधानमंत्री चर्चिल ने कहा था कि इस कलंक से वे बच गए। एक तरफ गांधी है जो सबको साथ लेकर चलने गाते रहे ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान।उसी देश में संघ अपने एजेंडे में सर्वोपरि स्थान पर हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार लगातार संघ के एजेंडे पर काम कर रही है। वे गांधी को उखाड़ कर उनकी विचारधारा को ख़त्म करने लगातार प्रयास कर रहे हैं। किंतु गांधी हर जगह उनके राह में खड़े नज़र आते हैं।
मनुवाद की पुनर्स्थापना का ख़्वाब देखने वाली संघनीत सरकार ने देश में दो बार झूठ और अल्पसंख्यकों को परेशान कर हिंदू वोट का ध्रुवीकरण कर तथा ईवीएम से हैकिंग कर सरकार बनाई। लेकिन तीसरी बार राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने इन्हें बहुमत से दूर कर दिया जबकि वोट चोरी के असंख्य मामले भी सामने आए हैं। चुनाव आयोग और सरकार की मिलीभगत की पोल पट्टी खुल गई और अब धीरे-धीरे जनता इनसे छिटकने लगी है।
आखिरकार गांधी के अहिंसा और सत्य के शांति प्रिय देश में झूठ कब तक टिकता। गांधीवादी विचारधारा से जुड़ी इंडिया गठबंधन में मौजूद विभिन्न दल इस बार लोकतंत्र और संविधान की रीढ़ तोड़ने वाली सरकार का जनाजा निकालने की तैयारी में है।सबसे अहम् बात यह है कि गांधी और कांग्रेस को मिटाने पर आमादा भाजपा और संघ एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी सोच के हाथों परास्त होने की स्थिति में है। गांधी को मार कर उन्होंने हिंदू राष्ट्र बनाने की 1948 में जो पहल की थी उसे गांधी के चाहने वालों ने धूल चटा दी थी।आज फिर जब हिंदू राष्ट्र की नई परिभाषाएं गढ़ कर संघ हिंदुओं को बरगलाने की कोशिश कर रहा है। हिंदू मुस्लिम का डीएनए एक बता रहा है यह चुनाव के लिए गहरी साज़िश है।इसके अंदर छुपी भावनाएं इंडिया गठबंधन प्रमुख कांग्रेस और अन्य दल बराबर जनता को समझा रहे हैं। मुसलमानों से नफ़रत करने वाले उन्हें ठगने अपना जाल फैला रहे हैं। वहीं राहुल गांधी नफ़रत हटाने मोहब्बत की दूकान खोले हुए हैं।
यह गांधी और संघ के जन्मदिन का मिलन देश को शायद दो विचारधाराओं का गूढ़ार्थ समझाने ही आया है।
देशवासियों के सामने इन दो विचारधाराओं में से रावणत्व वाली विचारधारा का इस पुनीत मौके पर दहन करना ही, इस दिन का उद्देश्य है। देखना यह है कि किसे शांतिपूर्ण सत्य , अहिंसा और सत्याग्रह का मार्ग पसंद है और कौन झूठ और मक्कारी से लबरेज विचार धारा वाला है।
गांधी विचारधारा तो ऐसी शांति पूर्ण क्रांति को जन्म देती है जिससे अंग्रेजों को भागना पड़ा । दुनियां में गांधी के सत्य और सत्याग्रह के अनेक प्रयोग सफल रहे हैं। हमारे देश से दुनियां में गए गांधी के विचारों को आज देश में एक बार फिर कामयाबी मिलेगी इसमें कोई शक नहीं तथा संघ अंतिम ऊंचाई पर पहुंचकर अब अंदरूनी विवादों और अपने झूठ की वजह से फिसलन की कगार पर है।
ज़रा सोचिए गांधी को मारने वाले ,गांधी की सोच से आज भी घबराते हैं।ये भी सच है वे जितना गांधी को मिटाने की कोशिश करते हैं वे उतने ही वृहत रुप में सामने खड़े हो जाते हैं।आज संयोग से दूसरे राहुल गांधी को मारने की बात हो रही है जो उनकी विचारधारा को लेकर आगे बढ़ रहे हैं सच्चे जननायक हैं ।अव्वल तो यह संभव नहीं फिर भी यदि राहुल गांधी को कुछ हो जाता है तो अब जेन जेड उनका नामोनिशान मिटा देगी। आईए आज दुष्ट दमन की प्रतिज्ञा लें और सत्य और संविधान के रास्ते चलते हुए इन्हें परास्त करें।यही हमारी संस्कृति हमें सिखाती है।