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राबिया सैफ़ी की बेरहमी से हत्या, कहीं बड़ी साज़िश तो नहीं?

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सुसंस्कृति परिहार
दिल्ली एक बार फिर शर्मिंदा हुई हैं अपनी एक पुलिस कर्मी के सामूहिक बलात्कार और दर्दनाक हत्या से।जी हां राबिया सिविल डिफेंस में नियुक्त थीं माता-पिता के मुताबिक उसका विवाह नहीं हुआ था जबकि इस जघन्य कांड का आरोपी स्वत:थाने पहुंचकर यह कुबूल करता है कि उसने अपनी बीबी राबिया का गला रेत कर मौत के घाट उतार दिया है क्योंकि वह उसके  चरित्र पर संदेह करता था।यह बात भी सामने आई है कि वह भी डिफेंस में काम करता है और उसके ज़रिए ही यह नौकरी राबिया को प्राप्त हुई थी।परिवार का ये भी आरोप है कि घटना वाले दिन जब बेटी देर शाम तक घर नहीं पहुंची थी तभी उसके साथ काम करने वाली एक लड़की ज्योति ने फोन किया था। उसने बताया था कि एक मामले में उनकी बेटी से पूछताछ करने के लिए कुछ लोग अपने साथ ले गए हैं।इसलिए उसका फोन भी बंद आ रहा है।ऐसे में सवाल ये उठता है कि अगर कुछ लोग पूछताछ के लिए ले गए थे तो फिर अचानक पति होने का दावा करने वाले शख्स उसके पास कैसे पहुंच गया. और फिर हत्या करने के बाद अचानक सरेंडर क्यों कर दिया?

हां ,फोन करने से पहले वह यह क्यों पूछती है ,आपने मोबाइल को रिकार्डिंग मोड पर तो नहीं रखा है ।वह किसी साज़िश के साफ़ साफ़ संकेत देता है।वह डरी और सहमी लगती है दोबारा फोन करने पर नहीं उठाती।लगता है उसे इस मामले की पूरी जानकारी है  वह एकमात्र गवाह है उसकी सुरक्षा बहुत जरूरी है।
यह फोन काल अपने आप में बहुत कुछ विस्तार से महत्वपूर्ण बात उजागर कर सकता है। तथाकथित पति निज़ामुद्दीन भी इसी दफ्तर का कर्मचारी है ,हो सकता कि अपने अधिकारियों के साथ वह इस वीभत्स कृत्य में शामिल हो और अधिकारियों ने उसे इस तरह कुबूल करने बाध्य किया हो।अब सवाल ये उठता है कि राबिया के साथ ये सब क्यों हुआ ?
इसका जवाब उनके परिवार के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के डीएम दफ्तर में कोरोना चालान के नाम पर बहुत बड़ा घोटाला चल रहा था जिसका खुलासा राबिया ने किया था। उसके पिता का कहना है कि कोरोना चालान की नकली शीट छपवाकर लोगों के चालान किए जा रहे थे और उससे आने वाले पैसों का बंदरबांट दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के डीएम ऑफिस में किया जाता था।परिवार की मानें तो 26 अगस्त को जिस दिन राबिया गायब हुई उसी दिन डीएम दफ्तर में सीबीआई की छापेमारी हुई थी। इस छापेमारी की टिप सीबीआई को राबिया ने ही दी थी। परिवार का आरोप है कि राबिया के इसी खुलासे से नाराज होकर पहले उसे गायब किया गया और इसके बाद उसका गैंगरेप करने के बाद मौत के घाट उतार दिया गया।
बात सच ही लगती है क्योंकि राबिया अपने आफिस से ही भेजी गई और जब परिवार जन आफिस से सम्पर्क किए तो जवाब नहीं दिया गया अरे भई यही बता देते कि वह  निज़ामुद्दीन के साथ गई है।कल बताएंगे अभी जाइए और कल सुबह  पुलिस शव के साथ राबिया के घर पहुंचती है। कार्यस्थल की भी कोई जिम्मेदारी होती है अपने कर्मचारी के प्रति। उन्होंने ना तो इस परिवार को संवेदनाएं व्यक्त की और ना ही पहुंचे।दाल में जब काला हो तो किस मुंह से वहां पहुंच सकते हैं। हालांकि सैफी समाज के लोग, राबिया के पड़ौसी और के सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले की सीबीआई से जांच की मांग पर अडिग हैं यह दिल्ली पुलिस का मामला है इसे सरकार किस नज़रिए से देख रही है, वह हम देख रहे हैं सबके मुंह पर पार्टी बंधी हुई है। इससे पहले दिल्ली में दो दलित बच्चियों के बलात्कार और उनकी हत्या के आरोपी नहीं पकड़े गए।सबसे बड़ी बात ये है कि इस घटना में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के क्षेत्र षड्यंत्र में शामिल हैं और तीनों जगह पुलिस भाजपा की हैं। हरियाणा पुलिस की किसानों पर लठबाजी और उत्तर प्रदेश पुलिस के बलात्कारियों से पावन रिश्ते  तो हम देख रहे हैं।और दिल्ली पुलिस के कहने क्या —- काटे जाएंगे की हेट स्पीच में नामजद पिंकी चौधरी को गिरफ्तार नहीं कर पाती, राजनैतिक दबाव में वह सरेंडर करने आता है, फूलमाला, नारेबाजी, कन्धों पर उठा कर जूलूस, और बजाय ऐसा करने वालों पर सख्ती बरतने के पुलिस सुरक्षा और संरक्षण प्रदान कर रही है ।कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बाबत कहा है कि देश की राजधानी में एक सिविल डिफेन्स ऑफिसर के साथ बेरहमी से बलात्कार किया जाता है और उसकी हत्या कर दी जाती है और भाजपा नियंत्रित दिल्ली पुलिस द्वारा पूरी तरह से चुप्पी साध लेती है! आशा है कि दोनों सरकारें शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में नहीं छुपाएगी । 

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इस मामले में ट्वीट करते हुए कहा कि राबिया के साथ कई लोगों ने बर्बरता की और फिर पूरे शरीर को चाकुओं से गोद दिया। चंद्रशेखर आजाद ने लड़की को इंसाफ देने की भी मांग की। 

 मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं । मुख्यमंत्री भी चुप है।लोग कह रहे काश राबिया मुसलमान ना होती।तो दिल्ली जल उठती ।महिला आयोग की चुप्पी भी शर्मनाक है । सोशल मीडिया पर ज़रूर राबिया हत्याकांड का मुद्दा छाया हुआ है  लोग उसे इंसाफ देने के लिए आवाजें उठाने लगी। इसके साथ ही कुछ लोग #JusticeForRabia हैशटैग ट्रेंड करते नजर आए। इस दौरान लोग सरकार और पुलिस-प्रशासन से बेटियों की सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल पूछ रहे हैं।  

जिस देश में पुलिस बन चुकी महिला सुरक्षित नहीं है उस देश में यदि किसी को लगता है कि उसकी बहन बेटी सुरक्षित हैं तो उससे हमें कोई सरोकार नहीं, हम फिर भी उनकी बहन, बेटियों की सुरक्षा की कामना ही करेंगे।

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