मुनेश त्यागी
हरियाणा में भड़की हिंसा में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी हैं, 44 एफ आई आर दर्ज की गई हैं 70 संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं। गुरुग्राम में इमाम की हत्या कर दी गई है, मस्जिद फूंक दी गई है। इस हिंसा में अब तक 70 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह साम्प्रदायिक हिंसा हरियाणा के 8 जिलों रेवाड़ी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल, महेंद्रगढ़ और पानीपत जैसे जिलों में फैल गई है।
मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर लाल ने नूंह की घटना को एक सुनियोजित हमला बताया है। उनका कहना है कि नूंह में सामाजिक यात्रा को भंग करने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र पूर्ण तरीके से हमला किया गया, पुलिस को भी निशाना बनाया गया, जो बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है, फिलहाल सुरक्षा बल तैनात हैं और स्थिति नियंत्रण में हैं।
यहीं दूसरी तरफ राज्य के उपमुख्यमंत्री की यह स्वीकारोक्ति भी मायने रखती है कि यात्रा का प्रबंधन बहुत गलत तरीके से किया गया, जो बहुत खामियों से भरा हुआ था। करीब पांच हजार लोगों की भीड़ को संभालने के लिए केवल सौ पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे जो बिल्कुल ना काफी थे। इस प्रकार यहां मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दो अलग-अलग बातें बोल रहे हैं जो पूरी तरह से सरकार की नाकामी, लापरवाही और दंगा रोकने की उदासीनता को दिखाता है।
यहीं पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का बयान सारी स्थिति को स्पष्ट कर देता है। उन्होने शोभा यात्रा में भीड़ के हथियारों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि शोभा यात्रा में शामिल लोगों को किसने हथियार ले जाने दिए। शोभायात्रा में शामिल लोगों द्वारा हथियार लहराए जाने को क्यों नहीं रोका गया? इसी ने हिंसा को भड़काने का पूरा काम किया है। इस प्रकार हरियाणा की हिंसा में तीन मंत्रियों के विवादास्पद और विरोधाभासी बयान है जो इस मामले में सरकार की गंभीरता के प्रयासों में चार चांद लगा रहे हैं।
हरियाणा का मेवात इलाका पिछले सैकड़ों सालों से सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए मशहूर रहा है। मेवात के लोगों ने 1857 के भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी-बड़ी शहादते दी थीं। आजादी के आंदोलन में भी यहां के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और बडी बड़ी कुर्बानियां दी थीं। 1992 में जब सारा देश साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलस और जल रहा था तो यहां पर कोई दंगा नहीं हुआ था और यहां के लोगों ने सांप्रदायिक एकता कायम करके उदाहरणीय और काबिल-ए-तारीफ मिसाल कायम की थी।
पिछले आठ नौ सालों से इस एकता को तोड़ने की साजिशें जारी थीं। इस ब्रजमंडल यात्रा में स्थानीय लोग कम बाहरी लोग ज्यादा बताए जा रहे हैं। जुनेद और नासिर के हत्यारे मोनू मानेसर का भड़काऊ वीडियो जारी करके बड़ी संख्या में लोगों को भाग लेने की घोषणा की गई थी। स्थानीय लोग इस घटना को पहले से ही भांप गए थे। उन्होंने घटना के एक दिन पहले ही प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यहां पर दंगा भड़क सकता है, हिंसा हो सकती है।
इसके बावजूद भी भड़काऊ नारेबाजी, फायरिंग, आगजनी की गई, दुकानों को फूंक दिया गया। हिंसक हत्यारों को खुलकर हिंसा का तांडव मचाने का मौका दिया गया। बृजमंडल यात्रा में लाठी-डंडे, बंदूक और हथियारों को ले जाने दिया गया। प्रशासन अंधा गूंगा बहरा बना रहा। भड़काऊ वीडियो बनाने वालों के खिलाफ कोई धरपकड़ कार्यवाही नहीं की गई है। इंटरनेट सेवाओं को समय से बंद नहीं किया गया और इस प्रकार वीडियो नफरत फैलाने का अपना काम कर गई।
हरियाणा सरकार अब इस आगजनी और साम्प्रदायिक हिंसा की घटना को बड़ी साजिश बता रही है। सवाल उठता है कि यह साजिश किसने की? साजिश कर्ताओं के खिलाफ समय से कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई? उन्हें हिंसा अपराध दंगे आगजनी किसने करने दी? सांप्रदायिक आग भड़काने वालों के खिलाफ सरकार और प्रशासन द्वारा क्या कार्रवाई की गई? स्थानीय लोगों द्वारा पूर्व चेतावनी के बाद भी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन क्यों निष्क्रिय, उदासीन और लापरवाह बना रहा? इन सवालों का हरियाणा सरकार के पास कोई जवाब नहीं है।
ये सारी घटनायें बता रही हैं कि यह साम्प्रदायिक हिंसा, राज सरकार की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की नफरत की आंधी को बढ़ाने और बनाए रखने की साजिश का अगला कदम है। हम पिछले लगभग तीन महीनों से मणिपुर को जलते हुए देख रहे हैं, वहां हिंसा और अपराधियों का तांडव देख रहे हैं। यहां पर केंद्र सरकार की भी बड़ी जिम्मेदारी बनती है। सरकार तुरंत दंगा और सांप्रदायिक नफरत और हिंसा को रोकने का काम करें।
ऐसे नाज़ुक समय में जरूरी है कि समाज में शांति और भाईचारा कायम रखने वाली ताकतें भी आगे आएं। यहीं पर सबसे ज्यादा जरूरी है कि शासन-प्रशासन और समाज के प्रबुद्ध लोग अफवाहों का कारगर और तुरंत जवाब देते रहें। इस कठिन समय में सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारा और सामाजिक सहिष्णुता बनाए रखने की कोशिशों के साथ-साथ, शासन प्रशासन व खुफिया मोर्चे पर सजगता बढ़ाने और दूरदर्शिता की और समय से सरकारी पहलकदमी की भी उतनी ही जरूरत है।
हरियाणा को दूसरा मणिपुर बनने से बचाने के लिए, शासन प्रशासन, केंद्र व राज्य सरकार और जनता में भाईचारा बनाए रखने वाली ताकतों को एकजुट होकर, शांति समितियां बनाकर, इन सांप्रदायिक एकता को तोड़ने वाले, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की नफरत को बढ़ाने वाले, हिंसा और आगजनी करने वाले देशद्रोही और समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ एकजुट होकर, अविलंब सख़्त से सख़्त कानूनी कार्यवाही करनी होगी, इन तमाम समाज-विरोधी अपराधियों को जेल के सींकचों के पीछे भेजना होगा। तभी हरियाणा को सांप्रदायिक मुहिम की बढ़ती नफरत और साजिश से बचा जा सकता है।

