अग्नि आलोक

*सेक्सुअल अराउजल डिसऑरडर : वजह फिजिकल, मेंटल नहीं; न्यूरोलॉजिकल

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 डॉ. प्रिया मानवी

_दुनिया में कई महिलाएं सेक्शुअल अराउजल डिसऑर्डर से गुजर रही हैं : खासकर पाश्चात्य महिलाएं।_

     _भारत की महिलाएं ठंडेपन से भरी रही हैं। महज 5- 7 मिनट का सेक्स पाने से उनका उत्तेजित होना ही असंभव, तृप्ति का अहसास- अनुभव कहां नशीब होना है। ऐसे में सेक्स उनके लिए आनंद के बजाए पीड़ादायी बनता है। उनको एक समय बाद इस टॉपिक से घिन तक आने लगती है। वे पुरुष का मन रखने या रिश्ता बचाने के लिए पीड़ा/घृणा सहकर भी उसके इस्तेमाल की वस्तु बनती रहें ये अलग बात है।_

   लेकिन~

 अब बाज़ारवादी भारतीय आधुनिकाओं में भी ये डिसऑर्डर देखा जाने लगा है।

इनमें स्वस्थ सेक्स पाने के लिए उनके प्राइवेट पार्ट में लगातार उत्तेजना महसूस होती रहती है।

 _पहले इसे जहां शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारणों से जोड़ा जाता था वहीं नई स्टडी ने इसकी वजह न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम बताई है।_

जी हां। महिलाओं में लगातार असहनीय यौन उत्तेजना बने रहने की बीमारी के संबन्ध में *Persistent Genital Arousal Disorder* से जुड़ी नई स्टडी सामने आई है जिसमें इस डिसऑर्डर की वजह को न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम से जोड़ा गया है। पहले इस बीमारी को शारीरिक या मनोवैज्ञानिक माना जाता था और इसी के अनुसार इसका इलाज भी होता था।

*जानिए, क्या है PGAD?*

 (पीजीएडी) ऐसी समस्या है जो सिर्फ महिलाओं में होती है।

 इससे पीड़ित महिलाओं को सेक्शुअल एक्साइटमेंट नहीं होने पर भी प्राइवेट पार्ट में लगातार यौन उत्तेजना का अनुभव होता रहता है। 

_यह फीलिंग सेक्स या मॉस्टरबेशन के बाद भी बनी रहती है।_

इस स्थिति में महिलाओं को स्ट्रेस, डिप्रेशन, शरीर में दर्द रहने, बैठने या उठने जैसी सामान्य शारीरिक क्रिया में भी परेशानी होने लगती है। यह उनके सामान्य जीवन या रिलेशनशिप को जीने में भी बाधा बनता है।

*इस तरह हुई स्टडी*

Massachusetts General Hospital के जरिए पर्सिस्टेंट जेनिटल अराउजल डिसऑर्डर पर की गई स्टडी में ऐसी महिलाओं पर रिसर्च की गई जिनमें 11 से 70 साल की उम्र के बीच इस बीमारी के लक्षण दिखना शुरू हुए।

 इनमें से ज्यादातर महिलाओं ने यह बात मानी कि उन्हें हर दिन एक मिनट से लेकर चार घंटे तक इस तरह के अराउजल फील होते हैं।

*अजब है यह बीमारी*

 इसमें सेक्स के लिए पुरुष के सामने गिड़गिड़ाती तक है महिला। सेक्स न मिलने पर वह  दर्द तक झेलती है। 

     पीजीएडी की समस्या महिलाओं के यौन अंग से दिमाग तक संकेत पहुंचाने वाली नर्व्स में आई परेशानी या फिर रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले भाग में किसी वजह से हुए नुकसान के कारण होती है। 

स्टडी में यह भी सामने आया कि इस समस्या से जूझ रही महिलाओं ने जब मनोवैज्ञानिक या गाइनोलॉजिकल ट्रीटमेंट लिए तो उन्हें अपनी कंडीशन में ज्यादा अंतर महसूस नहीं हुआ। 

यहां तक कि लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन भी उन्हें थोड़ी देर की ही राहत दे सका। वहीं न्यूरोलॉजिकल इलाज 80 प्रतिशत मरीजों में कारगार साबित हुआ।

लीड रिसर्चर ब्रूस प्राइस के अनुसार~

 लोगों को इस मेडिकल कंडीशन के बारे में जानना जरूरी है। उन्हें यह पता होना चाहिए कि यह मनोवैज्ञानिक नहीं बल्कि न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम है।

 उन्होंने आगे कहा~

 इससे जूझ रही कई महिलाएं अपनी परेशानी के बारे में किसी को नहीं बताती हैं। उन मरीजों के लिए भी इस बीमारी को समझना मुश्किल हो जाता है जो ऐसे डॉक्टर के पास जाएं जिन्हें पीजीएडी या इसके लक्षणों के बारे जानकारी ही न हो।

*​सेक्स भी एक तरह का अडिक्शन*

आपके साथ भी ऐसा होता होगा ना कि ऐल्कॉहॉल का सेवन करने के दौरान एक ड्रिंक के बाद ऐसा लगता है कि एक और पी लेते हैं, बस एक और….ये वाली तो लास्ट है। 

जी हां ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ड्रिंक लेते ही आपको उसका अडिक्शन हो जाता है। कुछ ऐसा ही बहुत से लोगों के साथ सेक्स में भी होता है। 

     _अगर आप ठंडी नहीं हैं तो सफल सेक्स पाने के तुरंत बाद शरीर में जो केमिकल्स रिलीज होते हैं उनकी वजह से आपको सेकंड राउंड, थर्ड राउंड करने का मन करता है।_

    लेकिन यह तृप्ति का स्वाद पाने वाली औरत को होता है। वह और स्वाद, भरपुर आनंद चाहती है। यह सेक्सुअल डिसऑर्डर या रोग नहीं।

 *ये 4 वजहें भी बीमारी नहीं*

 ​   _◆हॉर्मोन्स का ओवरड्राइव_

स्वस्थ सेक्स के दौरान सिर्फ फिजिकल नहीं बल्कि इमोशनल एक्सपीरियंस भी हाई रहता है। जब आपका शरीर कुछ ऐसा एक्सपीरियंस करता है जिसमें शरीर को संतुष्टि मिलती है तो वह ब्रेन को सिग्नल भेजता है कि इस तरह के एक्सपीरियंस को और बढ़ाया जाए, रिपीट किया जाए।

   ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सेक्स के दौरान डोपामाइन और ऑक्सिटोसिन नाम के हॉर्मोन्स रिलीज होते हैं जिससे हमें खुशी मिलती है और अडिक्शन का अहसास होता है।

 _◆​सेक्स के बाद फीलगुड_

अगर पार्टनर के साथ आपका सेक्शुअल ऐक्ट अच्छा रहा तो जाहिर सी बात है ऐक्ट के बाद आपको अच्छा महसूस होगा, आप खुद में अट्रैक्टिव फील करेंगी। फ्री और सेक्सी फील करेंगी। ये सारी फीलिंग्स मिलकर आपको एक फील गुड फैक्टर देगी। आप ये फिर- फिर चाहेंगी।

 एक अच्छा सेक्शुअल एक्सपीरियंस आपके सौंदय, स्वास्थ्य और सेक्स पॉवर को बेहतर बनाता है।

 _◆​फर्स्ट राउंड में ऑर्गैज्म शून्यता_

इस बात की भी संभावना रहती है कि नारी सेक्स के पहले राउंड के दौरान उत्तेजित तो हुई थी लेकिन उसे ऑर्गैज्म महसूस नहीं हुआ और इसलिए उसे और सेक्स करना है ताकि वो किसी भी तरह क्लाइमैक्स तक पहुंच सके।

  _◆​फर्स्ट राउंड का आफ्टर इफेक्ट स्ट्रॉन्ग_

 बहुत सी महिलाओं के साथ ऐसा होता है जहां उन्हें सेक्स करने के बाद डिप्रेसिंग फीलिंग आने लगती है क्योंकि उनका शरीर चाहता है कि उस फीलगुड एक्सपीरियंस को और महसूस किया जाए। 

ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि सेक्शुअल ऐक्ट के बाद उसका आफ्टर इफेक्ट काफी स्ट्रॉन्ग रहता है।

*सेक्स एडिक्ट का इलाज*

_रिसर्च ऑर्थर ऐनी लुइस ओकलैंडर के अनुसार~_

 डॉक्टरों को भी इस बीमारी के बारे में और जानकारी अर्जित करने की जरूरत है। फिजिशियन्स को भी पीजीएडी के बारे में जागरूक होने के जरूरत है। 

 _डॉक्टर के पास जब कोई महिला पेल्विक पेन या युरोलॉजी की समस्या से जुड़े ऐसे लक्षण लेकर जाए जो पर्सिस्टेंट सेक्शुअल अराउजल डिसऑर्डर की ओर इशारा करें तो डॉक्टर को उनसे इस बारे में और जानकारी लेना चाहिए ताकि सही इलाज दिया जा सके।_

(अवेलेबल : फ्री ऑफ कॉस्ट ट्रीटमेंट)

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