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कश्मीर फाइल्स के पीछे की साजिश और कश्मीर त्रासदी का सच…भाग- 8

Activists of `Roots in Kashmir` - a front-line Pandit group, hold placards during a peaceful demonstration to commemorate `Kashmiri Pandit Exodus Day` at Jantar Mantar in New Delhi on Jan.19, 2014. (Photo: IANS)

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अजय असुर

उस वक्त के राज्यपाल जगमोहन कश्मीर घाटी के बिगड़े हालात को काबू करने के बजाये एक तरफा मुसलमानों पर दमनात्मक कार्यवाही और कश्मीरी पण्डितों को भड़काकर और खुद ही पण्डितों को वहां से भगाने में सहयोग दिया और सुविधाएं प्रदान की। कश्मीरी पण्डित नेता संजय टिक्कू बताते हैं कि उस त्रासदी के दौरान कश्मीरी पण्डितों के एक प्रतिनिधि मण्डल तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन से मुलाकात कर कश्मीरी पण्डितों के सुरक्षा के लिये गुहार लगाई थी पर इस संघी जगमोहन ने कश्मीरी पण्डितों की रक्षा करने के बजाये पण्डितों को कश्मीर घाटी छोड़ जम्मू जाने की सलाह दिया और उनके हाल पर छोड़ दिया।

जगमोहन जो राज्यपाल के पद पर विराजमान हैं और वही राज्य के करता-धरता हैं, खुलेआम अपने भाषण में राज्यपाल के पद पर रहते हुवे कहता है कि “कश्मीर का हर मुसलमान आतंकवादी है…. जब तक सारे आतंकवादी मारे नहीं जाते यहाँ शांति नहीं बहाल होगी”। इसके साथ ही आम नागरिकों को पकड़कर आतंकवादी घोषित कर सेना/पुलिस के जरिये गोली मार दी जाती है जिससे आम जनता में भारत सरकार के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ता गया और भारत विरोधी नारे लगने और प्रदर्शन शुरू हो गये। प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों का जबरदस्त दमन किया गया, आम जनता की आवाज को दबा दिया गया। जस्टिस सच्चर और जस्टिस तार्कुडे और उनके साथ कई जस्टिस काश्मीर 1990 में जाते हैं और सब देखने के बाद लिखते हैं कि “जनवरी 1990 में जगमोहन के आने के बाद, भयावह दमनात्मक कार्यवाहियों से घाटी की सारी मुस्लिम आबादी भारत से कट गई है और उनका यह अलगाव अब कड़वाहट तथा गुस्से में बदल गया है।”

उस वक्त गवर्नर जगमोहन पर बीजेपी के प्रदेश प्रभारी नरेन्द्र मोदी का काफी प्रभाव था क्योंकि आर एस एस ने नरेन्द्र मोदी को जगमोहन पर नजर रखने और मोदी के निर्देश पर काम करने के लिये भेजा था। अपने एजेण्डे को सफल बनाने के लिये नरेन्द्र मोदी ने जगमोहन को सलाह दी थी की आतंक का माहौल बना रहे और कश्मीरी पण्डित अपने घर छोड़ कर चले जाएं तो इस पूरे मामले को आधार बनाकर पूरे देश में सांप्रदायिक माहौल बनाया जा सकता है। और फिर घाटी में बचे मुस्लिम समाज के खिलाफ सशस्त्र बल द्वारा जो भी कार्यवाई होगी उस भी साम्प्रदायिक रंग देना आसिन हो जायेगा। अपने इसी कार्यक्रम के तहत जगमोहन ने बखूबी अपने काम को अंजाम दिया।

आर एस एस ने ये भांप लिया था कि कश्मीर घाटी में उग्रवाद जितना ज्यादा बढ़ेगा, उससे कही ज्यादा पूरे देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने में उनको मदद मिलेगी। फिर क्या था आर एस एस ने संयोजित तरीके से प्लान कर आतंकवाद फैलाया। एक रणनीति के तहत आर एस एस के गुण्डों द्वारा यह कश्मीर में भेजकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ा गया, धर्म के नाम पर मरने-मारने को आतुर इन लोगों को कश्मीर में भेजा गया। कश्मीरी पण्डितों से ज्यादा सिख्ख और मुसलमान इस सुनयोजित सांप्रदायिक दंगे में मारे गये। आर एस एस को कश्मीर त्रासदी एक ब्रह्मास्त्र के रूप में मिल गया और कश्मीरी त्रासदी को भाजपा हमेशा से ब्रह्मास्त्र के रूप में इस्तेमाल करती आयी है, पण्डितों के पलायन और जुल्म को इस तरह से पेश करती है कि जिससे अपने को हिन्दुओं का हमदर्द ठेकेदार हों, और हिन्दुओं के दिलो-दिमाग में मुसलमानों के प्रति नफरत भर दिया है। इसी का फायदा उठाकर अभी हाल ही में कश्मीरी अवाम के आवाज को बेरहमी से कुचला है।

शेष अगले भाग में….

अजय असुर
राष्ट्रीय जनवादी मोर्चा

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