Site icon अग्नि आलोक

5 प्रदेश, मोदी से छीनेंगे देश

Share

संजय कनौजिया की कलम”✍️

बड़ी संख्या में जनता भाजपा के खिलाफ अपना मन बना चुकी है..कोविड के चलते चुनाव आयोग की नई गाइड लाइन जैसे डिजिटल प्रचार आदि का आदेश में भले ही भाजपा अन्यो से मजबूत स्थिति में हो परन्तु इसका ख़ास असर पड़ने वाला नहीं..ये भाजपा के लिए वैसे ही सिद्ध होगा जैसे अभी कुछ दिन पहले तमाम सरकारी-गैर सरकारी, संसाधनों अथाह पैसा, विज्ञापन, लालच-प्रलोभन के बावजूद कुर्सियां खाली रह गईं..और अब जिसे कहते है कि बंद मुट्ठी का खुल जाना..आज भले ही भाजपा फिर से मोदी के चेहरे को आगे करे..मोदी का करिश्माई चेहरा और वाणी का प्रभाव खत्म हो चुका है..आप तरो-ताज़ा, पंजाब प्रकरण से ही समझ जाइये कैसे मोदी जी भागे.. वैसे भी किसानो ने मोदी को प्रभावहीन बना डाला है..पिछले 2017 के चुनावों में मोदी एक असरदार व्यक्तित्व बने हुए थे..देश के चारोँ ओर ही नहीं, विदेशों में भी मोदी नाम की ब्रांडिंग हो रही थी..शुरू के यानी 2014 से 17-18 तक विपक्ष मूक दर्शक बना हुआ था..लोकलुभावन लच्छेदार जुमले उस वक्त जुमले सिद्ध नहीं हो रहे थे उस वक्त उन जुमलों में विश्वाश व धैर्य झलक रहा था..2018 के मध्य के बाद से कुछ ऐसा घटित होने लगा जिसने विपक्ष को ऑक्सीजन देना शुरू किया..पुलवामा और सर्जिकल स्ट्राइक को भाजपा ने अपने पक्ष में भुनाकर 2019 के चुनाव में अपनी संख्या 303 कर ली और अस्थाई वोट प्रतिशत में इजाफा कर लिया था..क्या BJP 2019 से पूर्व राजस्थान-मध्यप्रदेश-छत्तिश्गढ़ नहीं हारी ?

…बिहार महागठबंधन ने ही मोदी के विजय अभियान पर अंकुश लगाया था..पुलवामा काण्ड नहीं होता तो शायद BJP 240-60 पर ही सिमट जाती..आज जो बुरी स्थिति U.P में भाजपा की है, अब तो वहां भगदढ़ भी मच गई..UP सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने इस्तीफ़ा दे दिया और शीघ्र ही एक मंत्री सहित 17 विधायकों के साथ अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी में शामिल हो जाएंगे..अभी चुनावों के बीच भाजपा को और भी गर्दिशों का सामना करना होगा, जैसे लोग उनके उमीदवारों को प्रचार करने हेतू गांवों में नहीं घुसने देंगे, विधायकों की पिटाई की शुरुआत तो हो ही चुकी है..बस जरुरत है कि समाजवादी पार्टी अपनी बेहतर होती स्थिति को बनाये रखे बल्कि और जोरदार प्रहार करे..इस स्थिति का टेम्पो ऐसे ही बना रहा तो BJP बहुत बड़े अंतर से हार सकती है..लेकिन सामाजिक न्याय-समता-विकास-उत्थान व शान्ति के पक्षधरों जैसे पत्रकार-अन्य बुद्दिजीवी हर वर्ग के सुलझे समझदार लोगों को भी इस ओर एकजुट-एकसुर के साथ अखिलेश के साथ खड़े ही नहीं बल्कि ताक़त लगाते हुए साथ देना होगा..मोदी के प्रभावहीन होते चेहरे के ग्राफ को लगातार कमजोर भी करते रहना होगा..!
अन्य राज्यों में गोवा में वोट विभाजन भाजपा को लाभ दे रहा है..मणिपुर में वहां की ही क्षेत्रीय पार्टी के अपने क्षेत्रीय मुद्दों के आलावा, आसाम-त्रिपुरा-नागालैंड के हुए हादसे, असर डालकर लाभ पहुंचा रहे है..उत्तराखंड में भी वोट विभाजन मिलीजुली सरकार की ओर इशारा कर रहे है..लेकिन कांग्रेस और भाजपा कड़े मुक़ाबले में 2-3 सीट्स से पहली-दूसरी पार्टी हो सकती हैं, परन्तु भाजपा सरकार बनाने से वंचित ही रहेगी..पंजाब में चन्नी को हीरो करने में मोदी ही जिम्मेवार हैं, वो धन्यवाद के पात्र भी हुए..अन्यथा पंजाब में आम-आदमी पार्टी भी मुक़ाबले में होती..लेकिन चन्नी द्वारा मोदी को करारे जवाब ने मोदी को ही निचले पायदान पर नहीं लाया बल्कि केजरीवाल के असर को प्रभावहीन कर डाला..लेकिन किसानो द्वारा नई पार्टी के प्रभाव में आने से वहां का चुनाव पंचकोणीय हो चुका है और कांग्रेस बहुमत से वंचित हो रही है, मजे की बात यह है कि बहुमत के पास किसानो की पार्टी भी ना जा पायेगी.. तब कांग्रेस और किसानो की मिलीजुली सरकार किस रूप में या किसके नेतृत्व में सरकार बनाएंगे ये परिणाम ही सिद्ध करेंगे..इतना तय है इन प्रदेशों के चुनाव परिणाम..भाजपा में भयंकर भूचाल ला देंगे..उस भूचाल की आमद-दामद में भाजपा में दो फाड़ होना निश्चित है..इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता की अगला लोकसभा चुनाव 2022 के अंत या 2023 के मध्य में ही ना हो जाएँ..यही 5 प्रदेश छीनेंगे मोदी से देश..!!
(लेखक राजनैतिक व सामाजिक चिंतक है)

Exit mobile version