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हिलते हुए सिंहासन को थामने भर की कोशिश है 2000 रुपए के नोट को बंद करने का फैसला

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राजेन्द चतुर्वेदी

ये एक ऐसा गिरोह है, जिसे केवल सत्ता से मतलब है। अतः  सिंहासन हिलता दिखता है, तो गिरोह उसे बचाने के लिए कुछ भी कर डालता है।

2000 रुपए के नोट को बंद करने का फैसला हिलते हुए सिंहासन को थामने भर की कोशिश है।

प्रार्थी को आशंका है कि ये लोग लोकसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान से चार छह महीने पहले 500 रुपए के नोट के साथ भी कोई न कोई हरकत जरूर करेंगे।

संभव है कि चल रहा नोट बन्द कर दें, उसकी जगह दूसरा नोट लाएं।

दरअसल, चुनाव में धनबल, खासतौर पर काले धन के महत्व को जितना ये लोग जानते हैं, उतना कोई नहीं जानता।

ये लोग जानते हैं कि रैलियों, रोड शो, जनसभाओं की व्यवस्था के अलावा रैलियों, रोड शो, जनसभाओं में लाई गई भीड़ को ढोने, भीड़ के लिए भोजन पानी का प्रबंध करने, पारिश्रमिक आदि देने में केवल औऱ केवल श्याम धन का इस्तेमाल होता है।

कार्यकर्ताओं को दारू मुर्गा की पार्टियां और मतदाताओं को गिफ्ट भी ब्लैक मनी से ही दिए जाते हैं।

ये यह भी जानते हैं कि काला धन बड़े नोटों यानी 2000 और 500 रुपए के नोटों में एकत्रित किया जाता है।

यह बात देश का हर समझदार नागरिक जानता है कि जब से राजनीति में चड्डिधारियों का प्रवेश हुआ है, चुनाव भी बेहद खर्चीले हो गए हैं।

लिहाजा, कांग्रेस जैसे साफ सुथरे दल को भी चुनाव के लिए कुछ न कुछ श्यामल लक्ष्मी मैया की जुगाड़ करनी ही पड़ती होगी।

खुफिया रिपोर्ट आ ही गई होगी कि कर्नाटक चुनाव में धन श्याम का इस्तेमाल किस तरह हुआ है। इसलिए 2000 के नोट बन्द कर दिए और बिगाड़ दिया राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश कांग्रेस का गणित।

सनद रहे, अगर कर्नाटक में फासिस्टों की हार न हुई होती तो 2000 का नोट बन्द नहीं होता। 

#हरिबोल  

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