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चिली में जनविरोधी साम्राज्यवादी नीतियों की हार

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,मुनेश त्यागी

 दक्षिण अमेरिका के देश, चिली में 35 वर्षीय गेब्रियल बोरिस चिली के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति बन गए हैं। वे प्रतिबंध्द, सक्रिय और वामपंथी, लड़ाकू छात्र नेता रहे हैं। वे अब तक के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति हैं।
 वे निजीकरण की नीतियों के खिलाफ हैं, सरकारी कंपनियों को बेचे जाने के खिलाफ हैं, चंद लोगों के अमीर बनने के खिलाफ हैं, स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ हैं, वे बढ़ती गरीबी के खिलाफ हैं।
 राष्ट्रपति बोरिस का मानना है कि सबको बराबर, समान और आधुनिक शिक्षा मिलनी चाहिए, सबको स्वास्थ्य की मुफ्त सेवाएं मिलनी चाहिए, सार्वजनिक बैंकों को नहीं बेचा जाना चाहिए, महिलाओं का सशक्तिकरण और उन्हें राजनीति में ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाना चाहिए। वे सामाजिक सुरक्षा और बुढ़ापे की पेंशन आदि के पक्षधर हैं।
 दक्षिणी अमेरिका में गेब्रियल बोरिस के नेतृत्व में वामपंथ के बढ़ते कारवां की जीत बताती है कि जनविरोधी निजीकरण की नीतियों को, जनता की सामाजिक सुरक्षा की नीतियों के अभियान से ही रोका जा सकता है। ।
 इस लड़ाई की नीव अर्जेंटीना के महान क्रांतिकारी अर्नेस्टो चे ग्वेरा ने बहुत पहले ही डाल दी थी, जो वेनेजुएला, होंडुरास, ब्राज़ील, इक्वेडोर, बोलिविया, पीरु और अर्जेंटीना से होते हुए, चिली तक पहुंच गई है।
  पूरी दुनिया में फासिज्म और साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ जन अभियान और जन उभार बढ़ रहे हैं। धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और जनवादी व वामपंथी जनता की एकता की यह जीत बताती है कि लुटेरी साम्राज्यवादी नीतियों को मजबूत, भरोसेमंद और वैज्ञानिक विकल्प वामपंथी समाजवादी जन कल्याण की नीतियों के द्वारा ही हराया जा सकता है और हम वामपंथी संघर्ष के मैदानों से हटे नहीं हैं, हम अपने मार्ग पर और रणक्षेत्र में डटे हुए हैं।
 लुटेरे पूंजीवाद के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत सन 1917 में रूसी क्रांति से हुई थी जो लेनिन के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने शुरू की थी जो आज रूस चीन वियतनाम कोरिया पूर्वी यूरोप उत्तरी यूरोप और क्यूबा जैसे विभिन्न देशों से होती हुई चिली तक पहुंच गई है।  मेक्सिको, इक्वेडोर, पीरु, और अर्जेंटीना में वाम शक्तियां बढ़ रही हैं और दक्षिणपंथी ताकतें और निजीकरण उदारीकरण और वैश्वीकरण की कारपोरेटपरस्त नीतियों की असफलता जारी है और विभिन्न देशों में वामपंथी व्यवस्था के मार्ग की नीतियों की समर्थक जनता संघर्षों के मैदान में उतर रही है। उसने चिली का मैदान भी मार लिया है।
 चिली की जनता ने वहां की कमान अपने सबसे नौजवान नेता गैब्रियल बोरिस को सौंपी है जो जन समर्थक नीतियों के पक्षधर हैं और चिली में मैदान-ए-जंग में वामपंथी नीतियों का झंडा बुलंद किए हुए हैं। चिली में जारी कई दशकों का संघर्ष बताता है कि हमें दुनिया में सैकड़ों गैब्रियल बोरिशों की जरूरत है जो जनता को लामबंद कर सकें और पूंजीवादी साम्राज्यवाद की नीतियों को परास्त कर सके। इसी में मानवता के शानदार भविष्य की गारंटी है।
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