अग्नि आलोक

सभी क्रूर तानाशाहों का अंत बहुत हृदयविदारक और विभत्सतम् ही होता है !

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निर्मल कुमार शर्मा

दुनिया का इतिहास गवाह है कि यहां अब तक जितने भी क्रूर,आतताई,जालिम, शोषक,फासिस्ट और नरपिशाच तानाशाह पैदा हुए हैं,वे अपने शासनकाल में ये सोचते थे कि वे और उनका साम्राज्य हजारों सालों तक अजर- अमर रहेगा,वे आम जनता,मजदूरों,किसानों, कर्मचारियों,युवाओं पर चाहे कितना भी जुल्म कर लें,दुनिया की कोई शक्ति उन्हें कभी पराजित कर ही नहीं सकती ! लेकिन तानाशाहों की ये सोच कुछ ही सालों में धूलधूसरित होकर रह जाती है, क्योंकि वे अपनी कुटिलता पूर्ण अपनी शक्ति के अहंकार में इतने डूबे होते हैं,कि उन्हें किंचित लगता है कि वे सदा-सदा के लिए अपराजेय ही रहेंगे चाहे वह चंगेज खां हो,एडोल्फ हिटलर हो या उसका परम् प्रिय मित्र इटली का फासिस्ट तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी हो,लेकिन इतिहास साक्षी है कि इन सभी क्रूर व अमानवीय तानाशाहों का अन्त में बहुत बुरा हाल हुआ था !
उदाहरण के तौर पर हम एडोल्फ हिटलर के समकालीन और उसके समानविचारधर्मी नरपिशाच सोच के इटली के फासिस्ट तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के अंतिम समय के हालात का एक शब्द चित्र प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं।दूसरे विश्व युद्ध के शुरुआती दिनों में उसने एकबार अपनी शक्ति के दंभ में और मजाक-मजाक में सार्वजनिक रूप से यह बोल गया था कि ‘अगर मैं लड़ाई के मैदान से हटूं तो मुझे गोली मार देना ! ‘कुछ ही दिनों बाद द्वितीय विश्व युद्ध में बुरी तरह हारने के बाद 62वर्षीय बेनिटो मुसोलिनी और उससे उम्र में 37वर्ष छोटी उसकी 25वर्षीया प्रेमिका क्लारेटा पेटाची और उसके अन्य 16 समर्थकों को 28 अप्रैल 1945 को उसके देश इटली में ही उसके विरोधियों ने उसे पकड़कर सरेआम गोली से उड़ा दिया था !
बेनिटो मुसोलिनी और उसकी प्रेमिका सहित अन्य मारे गये 16 मृतकों के शव को एक पीले ट्रक में लादकर 29अप्रैल 1945 को लगभग 3बजे सुबह-सुबह ही इटली के मिलान शहर के पिया ज्रालेरेटो चौक के पास गीले पत्थरों पर लाकर पटक दिया गया ! प्रातः काल लगभग 8 बजे तक एक समाचार पत्र के विषेश संस्करण के माध्यम से और रेडियो के द्वारा पूरे मिलान शहर वासियों को यह सूचना दे दी गई कि डूचे मतलब बेनिटो मुसोलिनी को उसकी प्रेमिका सहित मौत के घाट उतारा जा चुका है,तथा उनकी डेड बॉडी उन्हीं के मिलान शहर के पिया ज्रालेरेटो चौक पर लावारिस पड़ी हुई है !
यह खबर आग की तरह पूरे मिलान शहर में फ़ैल गई,इसके बाद देखते ही देखते पूरा मिलान शहर उस चौक पर इकट्ठे हो गए ! फासिस्ट और नरपिशाच मुसोलिनी के अकथनीय अत्याचारों से लोग उसके प्रति घृणा और क्रोध से उबल रहे थे ! उदाहरण के तौर पर क्रोध की आग में जलती एक महिला वहां पहुंचते ही अपनी रिवॉल्वर से मृत मुसोलिनी के सिर में 5 गोलियों को उतारकर अपने 5बच्चों के मौत का बदला ले लिया ! ज्ञातव्य है कि मुसोलिनी अपने शासनकाल में उसके 5बच्चों की निर्दयतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया था,एक अन्य औरत ने वहां मौजूद हजारों लोगों की भीड़ के सामने मृत मुसोलिनी के सिर पर बैठकर अपना स्कर्ट उठाकर पेशाब करके अपने गुस्से का इजहार किया !
एक तीसरी औरत अपने साथ लाई एक चाबुक से मुसोलिनी के मृत शरीर को जोर-जोर से पीटने लगी ! एक अन्य आदमी क्रोध और प्रतिशोध की ज्वाला में धधकता हुआ अपने साथ लाए गए एक मरे चूहे को मुसोलिनी के मुंह में ठूंसते हुए ,जोर-जोर से चिल्लाए जा रहा था कि ‘अब इस मुंह से भाषण दो ! ‘ इटली के ही एक मशहूर लेखक ने उस समय की हालात का वर्णन करते हुए लिखा है कि ‘मुसोलिनी के अत्याचारों से त्रस्त भीड़ उससे इतनी खफा थी कि मुसोलिनी और उसकी प्रेमिका सहित वहां पड़े 18शवों के ऊपर चढ़ गई और उन शवों को बुरी तरह अपने पैरों से रौंदने लगी ! ‘
उसके बाद वहां का दृश्य और भी भयावह हो उठा ! एक तगड़े और मजबूत कद-काठी का एक व्यक्ति मुसोलिनी के शव को पकड़कर ऊपर उठा दिया ताकि भीड़ में उपस्थित सभी लोग उस नरपिशाच के क्षत-विक्षत शव को ठीक से देख सकें ! लेकिन लोगों की भीड़ और जोर-जोर से चिल्लाने लगी कि ‘..और ऊंचा..और ऊंचा.. हम अभी भी उस राक्षस के मृत शरीर को ठीक से देख नहीं पा रहे हैं ! ‘ यह बात सुनते ही उस तगड़े आदमी ने मुसोलिनी और उसकी प्रेमिका तथा अन्य 4शवों को उनके टखनों में रस्सी बांधकर जमीन से लगभग 6फीट ऊपर एक लोहे के खंभे से बांधकर लटका दिया !
आगे का दृश्य और भी शर्मनाक हो गया ! हुआ यूं कि जब मुसोलिनी की 25वर्षीया प्रेमिका क्लारेटा पेटाची का शव उल्टा लटकाया गया,तब उसकी स्कर्ट ऊपर से लुढ़ककर उसके सिर पर आ गिरी,क्लारेट पेटाची संयोग से पैंटी और अंडरगार्मेंट नहीं पहनी थी,जाहिर है उसका पूरा शरीर ही निर्वस्त्र हो गया था,लेकिन उस अमानवीय शर्मनाक स्थिति में भी वहां उपस्थित भीड़ मुसोलिनी और उसकी प्रेमिका से इतनी घृणा कर रही थी कि उस स्थिति में भी वह उसका उपहास किए जा रही थी ! लेकिन थोड़ी देर में एक आदमी ने आगे बढ़कर क्लारेट पेटाची के स्कर्ट को ऊपर उठाकर उसके पिंडलियों में बांधकर उसके निर्वस्त्र शरीर को आंशिक रूप से ढक दिया !
इटली के ही एक अन्य लेखक ने अपनी पुस्तक ‘द बाडी आफ डूचे ‘में लिखा है कि ‘मुसोलिनी का पूरा चेहरा खून से लथपथ था और मुंह खुला हुआ था,वहीं मृत क्लारेट पेटाची की आंखें खुली थीं और शून्य में देखती हुई प्रतीत हो रहीं थीं ! तभी एक और घटना हुई,मुसोलिनी के फासिस्ट पार्टी का पूर्व सचिव अकीले स्टारेची वहां अचानक प्रकट हुआ और अपने मृत नेता बेनिटो मुसोलिनी को फासिस्ट स्टाइल में सेल्यूट किया ! भीड़ ने उसे तुरंत पकड़ लिया,उसे तुरंत पीठ में गोली मारकर उन्हीं पत्थरों पर फेंक दिया,जहां उसके सर्वोच्च नेता के मृत शरीर की छिछालेदर हो रही थी !
तभी एक और घटना घटित हुई,भूतपूर्व फासिस्ट पार्टी के एक बड़े नामचीन नेता फ्रांसेस्कू बराथू के लटकते शव की रस्सी अचानक टूट गई और उसका मृत शरीर सिर के बल पत्थर पर आ गिरा ! उसके बाद मुसोलिनी के शव की भी रस्सी भीड़ ने जानबूझकर काट दिया,जिससे उसका शव भी मुंह के बल नीचे आ गिरा ! विख्यात अमेरिकी पत्रिका टाइम के एक संवाददाता रेड इंग्राहम इसी भीड़ में सम्मिलित होकर इस वीभत्स लेकिन ऐतिहासिक नजारे को देख रहे थे,उन्होंने अपने लेख ‘द डेथ इन मिलान ‘में लिखा है कि ‘मेरी आंखों के सामने यह सब कुछ घटित हो रहा था, अचानक मैंने देखा कि एक आदमी सभी शवों के ऊपर से चढ़ता हुआ आया और वह नरपिशाच बेनिटो मुसोलिनी के गंजे सिर पर अपने पैर से जोरदार ठोकर मारा ! तभी बगल में खड़े एक व्यक्ति ने अपनी राइफल के बट से मुसोलिनी के सिर को फिर सीधा किया ! ‘
‘मौत के बाद मुसोलिनी का शव बहुत छोटा दिख रहा था ! वह फासिस्ट मिलिशिया की वर्दी पहने हुए था । उसके पैरों में काले रंग के राइडिंग बूट्स कीचड़ में सनी हुई दीख रही थी, उसकी बांई आंख में बंदूक की गोली घुसकर उसके सिर के पीछे से निकल गई थी,जिससे उसके सिर के पिछले हिस्से में एक बहुत बड़ा छेद हो गया था,जहां से उसके मस्तिष्क के अंदरूनी भाग के कुछ लोथड़े बाहर को लटक रहे थे,उसके शव के पास में उसकी 25वर्षीया एकदम युवा प्रेमिका क्लारेटा पेटाची का शव पड़ा हुआ था, जो सफेद रंग की ब्लाउज पहन रखी थी,उसके सीने पर दो गोलियों के निशान साफ दिख रहे थे,जिनसे खून निकल कर जम गया था ! नरपिशाच बेनिटो मुसोलिनी की ऊंचाई 5फीट 6 इंच और वजन 79किलोग्राम था उसे 4गोलियों से मारकर उसका काम तमाम किया गया था,जबकि उसकी प्रेमिका क्लारेटा पेटाची को दो गोलियों से मौत के घाट उतार दिया गया था !
न्यूयॉर्क टाइम्स ने मुसोलिनी के मौत पर व्यंग्य करते हुए लिखा था कि ‘एक ऐसा शख्स जो पुराने रोम के गौरव को वापस लाने की बात करता था,लेकिन आज उसी बड़बोले,जुमलेबाज, शेखी बघारने वाले,शातिर,बदमाश और नृशंस हत्यारे की लाश मिलान शहर के एक चौक पर लावारिस हालत में पड़ी हुई थी,जिसे क्रोध से तमतमाई भीड़ के लोग उससे घृणा की इंतिहा तक गुस्से में आकर अपने पैरों से ठोकर मार रहे थे, उस पर थूक रहे थे,उसे गालियां दे रहे थे,उस पर पेशाब कर रहे थे ! ‘
दुनिया के कुछ विश्वप्रसिद्ध इतिहासकारों का मत है कि बेनिटो मुसोलिनी के शव के साथ इटली की जनता ने उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर बहुत ज्यादा ही बदसलूकी और उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया,सुप्रसिद्ध लेखक प्रोफेसर कर्टजर ने अपनी अपनी मशहूर पुस्तक ‘द पोप एंड मुसोलिनी ‘ में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर को मुसोलिनी की मृत्यु और उसके मृत शरीर के साथ इटली की जनता के अकथनीय दुर्व्यवहार का समाचार 29 अप्रैल 1945 को उसके भूमिगत् बंकर में मिल गया था,यह सब सुनकर हिटलर जैसे तानाशाह की भी रूह कांप गई,उसने उसी समय निर्णय ले लिया था कि उसके मरने के बाद हर हालत में उसका मृत शरीर दुश्मनों के हाथ नहीं पड़नी चाहिए !
इसीलिए जर्मनी के कुख्यात तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने अपने निजी अंगरक्षकों को यह स्पष्ट आदेश दे रखा था कि उसकी मौत के बाद उसके शव को तुरंत पेट्रोल छिड़ककर आग में जलाकर नष्ट कर दिया जाय, क्योंकि उसे भी डर था कि उसके मरने के बाद उसके शव की भी मुसोलिनी जैसे फजीहत और घोर अपमान किया जा सकता है ! केवल दो दिन बाद 30अप्रैल 1945को बेनिटो मुसोलिनी का परम् मित्र जर्मन नाजी तानाशाह एडोल्फ हिटलर भी अपनी प्रेमिका इवा ब्राउन के साथ आत्महत्या कर लिया !
इसलिए लोकतंत्र और रामनामी आवरण के छद्म खोल में छिपे भारतीय लोकतंत्र का गला घोंटने को लालायित तथा आमजनता, मजदूरों, किसानों, युवाओं, विद्यार्थियों आदि के हितों के खिलाफ काम करनेवाले तानाशाहों को इटली और जर्मनी के खूंख्वार,क्रूर,आतताई,शोषक, व्यभिचारी,सनकी तानाशाह शासकों के अंतिम समय में वहां की आम जनता के प्रति किए गए उनके किए गए क्रूरताओं से उपजे प्रतिशोध से हुई उनकी फजीहत को एकबार ध्यान में रखकर ही इस देश की आवाम तथा आम जनता के प्रति लगातार किए जा रहे अपने कुकृत्यों और दुर्नीतियों पर एकबार पुनर्विचार जरूर कर लेना चाहिए !

     -निर्मल कुमार शर्मा 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक,पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र, निष्पक्ष,बेखौफ,आमजनहितैषी,न्यायोचित व समसामयिक लेखन,
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