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स्त्रियों की लड़ाई आसान नहीं है…

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जब जब
किया जायेगा
स्त्री को निर्वस्त्र
और घुमाया जाएगा
बनाया जाएगा उसका तमाशा
तब तब
जाने कितने परिवार
जो उबर चुके होंगे…
कन्या भ्रूण को
खत्म करने के इरादे से
सहम जाएंगे पुनः
और लेते जाएंगे निर्णय उसकी समाप्ति का…!

जब जब स्त्री को
प्रेम करने की सजा
मृत्यु के रूप में दी जाती रहेगी
तब तब
समाज के पिता और भाई
अपने घर की
युवा होती लड़की की
मुस्कान को
शक की नजर से देखेंगे
और फिर जिस दिन देख लेंगे उसे किसी से प्रेम करते
यह सामाजिक प्रेशर उन पर फिर काम करने लगेगा
और फिर वह भी यही निर्णय लेंगे
ऑनर किलिंग का…!

जब जब
कोई शिक्षित स्त्री प्रश्न करेगी
तब तब
उसके प्रश्न को ही दबा दिया जाएगा
कहकर विद्रोही…!

स्त्रियों तुम्हारी लड़ाई आसान नहीं है
तुम्हारी लड़ाई पितृसत्ता व्यवस्था में पले
मानसिक विकारों वाले पुरुषों से है…
जिन्हें सारी मनमर्जियां स्त्रियों पर सौंपने की बीमारी है
जिनके घरों के आन मान और सम्मान..
सब तुम्हारे कंधे पर है और
तुम्हारी मुस्कान से संचालित
होता है !

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