हैदराबाद वि वि के दलित छात्र की आत्महत्या के मामले को गौण करने/दबाने के लिए जेएनयू के मामले को देशद्रोही बनाम देशभक्ति का बनाकर शोर मचाया जा रहा है।एम्स में 2006 में मीणा बिरादरी के एक छात्र द्वारा आत्महत्या के बाद तत्कालीन सरकार ने इसकी जाँच के लिए त्री सदस्यीय एक समिति गठित किया था।उसकी अध्यक्षता यूनिवर्सिटी ग्रांट आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष सुखदेव थोराट ने किया था।उक्त समिति ने 2007 में मेंअपनी रिपोर्ट दाख़िल कर दी थी। श्री थोराट का इंटरव्यू ताज़े फ़्रंट लाईन में छपा है।उनका कहना है कि आत्महत्या करने वाला रोहित वेमुला पहला छात्र नहीं है।इसके पहले कम से कम 25 दलित छात्र आत्महत्या कर चुके होंगे।लेकिन उन मामलों में चरचा स्थानीय स्तर पर या अख़बारों में एकाध-दिन छप कर रह गयीं।
रोहित की आत्महत्या ऐसा पहला मौका है जब उच्च शिक्षा में दलित-आदिवासियों के प्रति भेदभाव का राष्ट्रीय मामला बना। देश भर के दलित, आदिवासी और पिछड़े छात्रों-नौजवानों ने इस मामले को उठाना शुरू किया।यह देशभर का मामला न बन जाए और राज्यों में होने वाले चुनावों में इससे नुक़सान न हो इसलिए जेएनयू के मामले को विराट बनाकर पेश किया जा रहा है।कन्हैया कुमार का पुरा भाषण पुलिस और मीडिया के पास मौजूद है। उसमें कोई ऐसी बात नहीं है जिसके आधार पर उनके विरूद्ध देश विरोध के आरोप का स्पर्श होता हो। बल्कि गृहमंत्री ने हाफ़िज़ सईद के नाम पर की गई नक़ली ट्वीट पर इस मामले को पाकिस्तानी आतंकवादी के साथ जोड़ने का प्रयास किया।
भारत जैसे विशाल देश के गृहमंत्री से ऐसी हल्की, ओछी और गैरजवाबदेह काम कर सकता है इसकी अपेक्षा नहीं की जा सकती थी। इससे पता चलता है कि रोहित आत्महत्या मामले से देश का ध्यान हटाने के लिए मोदी सरकार किस स्तर पर उतर आई है। 17 फ़रवरी को दिल्ली के इकौनौमीक टाईम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ रोहित वेमुला की आत्महत्या के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को दोषी ठहराया गया है।स्मरण करने की ज़रूरत है कि रोहित और अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अन्य दलित साथियों को भी राष्ट्रविरोधी कहा गया। केंद्रीय मंत्री बंगारू दत्तात्रेय ने मानव संसाधन मंत्री को पत्र लिखकर इन राष्ट्रविरोधियों पर कार्रवाई करने की माँग की थी। मानव संसाधन मंत्रालय ने हैदराबाद सेन्ट्रल विवि को मंत्री की शिकायती पत्र के आधार पर जाँचकर कार्रवाई करने को निदेशित किया गया। इसके लिए मंत्रालय ने विवि को चार-चार रिमांइडर चिठ्ठी भेजी।उस दबाव में रोहित सहित अन्य पाँच दलित छात्रों को होस्टल से निकाल बाहर किया गया था।रोहित जैसे ग़रीब विद्यार्थी का पीएचडी के छात्र को मिलने वाली राशि रोक दीगई थी।होस्टल से तो निकाल ही दिया गया था, इनलोगों को क्लास रूम के अतिरिक्त और कहीं भी जाने से रोक दिया गया था।उनको कैंटीन में भी जाने की इजाज़त नहीं थी।जहाँ इनको कुछ सस्ता खाने को मिल सकता था।रोहित ने पीएचडी के इंटरव्यू में टॉप किया कर था। पढ़ाई-लिखाई में हमेशा अव्वल रहा था।आज हालत यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर लाख-दो लाख पर कोई दलित स्कॉलर निकलते हैं। उनको हमारा जाति आधारित समाज का अभिजात्य वर्ग सहन नहीं कर पाता है।
उनके भविष्य को बर्बाद करने की कोशिश होती है। उनमें से कोई-कोई इतना संवेदनशील होते हैं जो उपेक्षा को, भेदभाव को, सुक्ष्म ढंग से अपमानित किया जाने को सहन नहीं कर पाते हैं और आत्महत्या में ही इन सब उत्पीड़न और अपमान से अपनी मुक्ति का रास्ता खोज लेते हैं।आज दिल्ली पुलिस कमिश्नर कह रहे हैं कि पुलिस कन्हैया की ज़मानत का विरोध नहीं करेंगे। ऐसी कृपा क्यों? आपने कितने आराम से बिहार के एक ग़रीब परिवार के छात्र को देशद्रोही के रूप देश-दुनिया में प्रचारित कर दिया।आपके पास उस आरोप को साबित करने आधार नहीं है इसलिए उस पर कृपा करने के अंदाज में अब कह रहे हैं कि हम उसके ज़मानत का विरोध नहीं करेंगे।हम चाहेंगे कि आप उसके ज़मानत का विरोध कीजिए। एक देश द्रोही के प्रति आपके मन मेंअचानक इतनी नरमी क्यों आ गई ! अगर आपके पास विरोध करने लायक साक्ष्य नहीं है तो सरकार को कन्हैया से माफ़ी माँगनी चाहिए।यह सरकार बड़े और अभिजात्य लोगों की सरकार है। दिल्ली मे जेएनयू में जो कुछ हुआ है उससे गंभीर चिंता पैदा होती है।
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा भेजे गए पटियाला कोर्ट की हालत जानने के लिए वरिष्ठ वकीलों को वहाँ गाली दी गइ।उन पर बजरी फेंकी गई।जुडिसियल कस्टडी में कोर्ट में पेश करते समय कन्हैया को पीटा गया। मिडिया वह पुरा दृश्य दिखा रहा है।लोकतंत्र के लिए कल हमने गंभीर अशुभ संकेत देखा है।ग़रीब, आदिवासी, दलित या पिछड़ों को आज जो कुछ हासिल है वह लोकतंत्र के ज़रिए ही। ये लोग तो लोकतंत्र और आरक्षण पर अविश्वास करने वाले लोग हैं। रोहित की आत्महत्या के लिए केंद्र सरकार और उनके संगठनों के विरूद्ध अभियान चलना चाहिए।ऐसे मामलों में जितनी जाँच हुई है सरकार उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।भविष्य में फिर किसी रोहित को आत्महत्या के लिए मजबूर न होना पड़े इसके लिए केंद्र सरकार नए क़ानून बनाए।
अभी बड़े घरानों का एक लाख चौदह हज़ार करोड़ रूपये का क़र्ज़ सरकार ने माफ़ कर दिया। दुनिया भर में आप दौड़ रहे हैं निवेश नहीं आ रहा है। देशी कारपोरेट तक निवेश करने को तैयार नहीं है। रोज़गार का सृजन नहीं हो रहा है। अर्थव्यवस्था असफल है।इन सब पर से ध्यान हटाने के लिए जेएनयू की घटना को तील का ताड़ बनाकर देशभक्ति आड़ लेकर अपनी असफलता को छुपा रहे हैं।
शिवानंद तिवारी २०१६

