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मणिपुर की वजह से बहुत तेजी से गिर रहा है केंद्र सरकार का ग्राफ

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मुनेश त्यागी

       मणिपुर की घटनाओं की हिंसा में दो महिलाओं के साथ हुई दरिंदगी और बर्बरता ने जैसे पूरे समाज में हलचल मचा दी है, जैसे पूरे समाज में सरकार के खिलाफ बेचैनी और गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। इस घटना को लेकर लोग एकदम अचंभित हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार के रहते हुए और वह भी डबल इंजन की सरकार के रहते हुए, यह सब कैसे हो सकता है? मणिपुर की वजह से केंद्र सरकार की छवि का ग्राफ देश समेत पूरी दुनिया में बड़ी तेजी से गिरता जा रहा है।

      बहुत सारे लोग आज परेशान होकर मोदी सरकार की डबल इंजन सरकार की नीतियों से खुश नहीं हैं। अब तो मोदी के चाहने वाले भी, मोदी की नीतियों की मुखालफत करने लगे हैं। मोदी की प्रशंसा करने वाले लोगों ने भी जैसे मोदी का साथ पूरी तरह से छोड़ने का मन बना लिया है। मणिपुर हिंसा को लेकर समाज में बेचैनी बढ़ती जा रही है। समाज का हर वर्ग किसान मजदूर नौजवान बेटियां बहुएं दुकानदार, सड़क पर काम करने वाले लोग, मणिपुर हिंसा में हुई दरिंदगी को लेकर, बेहद परेशान आक्रोशित और चिंतित हैं।

        आज इस मामले में जब हमने लोगों से उनके विचार जानने चाहे तो उन सब ने जैसे एकमत होकर पूरी तरह से विचार-विमर्श करके, मोदी सरकार की मुखालफत करनी शुरू कर दी है। इस बढ़ती परेशानी के मद्देनजर आज हमने महिला प्रोफेसरों, महिला अधिवक्ताओं से, कई मोदी सरकार के समर्थकों से, स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों से, वादकारियों से, दुकानदारों से और सड़क किनारे रेहड़ी पटरी वालों से, बातचीत की, तो उन सब ने इस हिंसा की निर्मम और बहुत ही जोरदार तरीके से आलोचना की। 

     इन सब का कहना था कि यह मोदी सरकार की आलोचना का सवाल नहीं है, बल्कि सवाल केंद्र सरकार और राज्य सरकार की नीतियों का है, डबल इंजन सरकार के काले कारनामों का है। उनका कहना था कि जिस तरह से वहां हिंसा हो रही है और जिस तरह से महिलाओं को निर्वस्त्र करके सड़कों पर घुमाया गया, उनसे छेड़छाड़ की गई, उनसे बलात्कार किया गया और उनकी हत्या कर दी गई, यह सब एकदम अविश्वसनीय है, हम ऐसा सोच ही नहीं सकते थे कि मोदी सरकार की डबल इंजन की सरकार में ऐसा भी हो सकता है। मोदी सरकार तो सबका विकास सबका साथ, बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, का नारा देकर सत्ता में आई थी और लोगों ने उनकी इन बातों और नारों पर विश्वास करके उन्हें सत्ता में आरूढ किया था।

       उन सब का कहना था कि मोदी सरकार को समय रहते इन अपराधियों के, हत्यारों के, इन बलात्कारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी, इनको पकड़कर अदालत में पेश करके मुकदमा चलाना चाहिए था और अभी तक इनको कठोर से कठोर सजा देकर जेल के अंदर बंद कर देना चाहिए था, मगर सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जैसे वह एक साजिश के तहत मणिपुर में हिंसा को होते ही देखना चाहती थी।

      यहीं पर जिस तरह से सरकार अपने विरोधियों से बातचीत कर रही है, अपने विरोधियों को ही रास्ते से हटा रही है, उनकी जुबान बंद करने की कोशिश कर रही है, उससे भी ये सभी लोग खुश नहीं थे। उनका कहना था कि कम से कम केंद्र सरकार और भारत के प्रधानमंत्री ऐसा नहीं कर सकते। उन्हें संसद में और जनता व देश के सामने आकर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन सब का कहना था कि यदि यूट्यूब पर औरतों की नग्न तस्वीरें वायरल नहीं होती, तो देश दुनिया और जनता को कुछ पता ही नहीं चलने वाला था।

      इन सब का कहना है कि मणिपुर में कानून के शासन का, संविधान की मान्यताओं का ध्वस्तिकरण  हो चुका है और यह सब करने में डबल इंजन की सरकार जिम्मेदार है। उनका यह भी कहना है कि अगर भारत का सर्वोच्च न्यायालय सरकार से यह नहीं कहता कि अगर सरकार कुछ नहीं करेगी तो हमें जरूरी कदम उठाने पड़ेंगे, इससे डरकर ही सरकार को कुछ दिखावटी कार्यवाही करने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन अभी भी पूरी तरीके से अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं की जा रही हैं।

      जब उन्होंने यह जानना चाहा कि डबल इंजन की सरकार के रहते हुए यह सब कैसे हो गया और सरकार इस मामले में क्या चाहती है? तो हमने उन्हें बताया कि डबल इंजन की सरकार मणिपुर में सत्ता में बने रहने और वहां की जमीन और खनिज पदार्थों को हथियाने और वहां के प्राकृतिक संसाधनों का निजीकरण करने की नीतियों पर चल रही है। मणिपुर में इस राज्य सरकार की अक्षम्य नाकामी और उदासीनता ने, मणिपुर की विनाश लीला को जन्म दिया है और मणिपुर की जनता पर भयानक हमले मोदी के भारत में मानवता के बढ़ते संकट का आईना हैं। हमने उन्हें बताया,,,,,

डबल इंजन की सरकार का 

बस एक ही रह गया है खेल, 

चाहे कुछ भी हो, जारी रहे, 

सत्ता में बने रहने का खेल।

         मणिपुर में मोदी सरकार और राज्य सरकार की जो जन विरोधी गतिविधियां जारी हैं, उन्हें किसी भी तरीके से ना तो बर्दाश्त किया जा सकता है और ना ही उनका समर्थन किया जा सकता है। सरकार की लगातार की जा रही आनाकानी से ऐसा लगता है कि जैसे सचमुच ही यह मणिपुर की हिंसा और दुर्दशा एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है, इसीलिए वह संसद में कानूनों के तहत चर्चा करने को तैयार नहीं है, इसीलिए प्रधानमंत्री संसद में चर्चा करने से भागते दिखाई दे रहे हैं। अधिकांश लोग अचंभित हैं कि आखिर यह कैसी “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” है?

       अब सरकार को रास्ते पर लाने के लिए, देश की जनता को, नौजवानों को, किसानों को, मजदूरों को और समस्त महिलाओं को एकजुट होकर, सरकार के खिलाफ संघर्ष के मैदान में उतरना पड़ेगा। उनको डबल इंजन की सरकार को सत्ता से हटाना पड़ेगा, निष्पक्ष तरीके से जांच करके मणिपुर की हिंसा के समस्त अपराधियों को तुरंत ही सख्त से सख्त सजा देनी पड़ेगी और तमाम पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए, तभी जाकर मणिपुर की जनता का विश्वास जीता जा सकता है, तभी मणिपुर की जनता के साथ पूरा इंसाफ किया जा सकता है और केवल तभी वहां के समाज में शांति और अमन चैन कायम किया जा सकता है। इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं बच गया है। मणिपुर की हिंसा पर एक कवि  ने क्या खूब कहा है,,,,

तमाशा जुल्म का देखकर 

जो मौन हो अभी भी, 

तुम्हारे जिस्म के अंदर 

बताओ कौन है अभी भी?

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