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हेराल्ड केस, 10 साल से चल रहा है, दशकों तक चलता रहेगा

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मुकेश कुमार सिंह
सियासी हलके में दस साल से सुर्खियां बटोर रहे नैशनल हेराल्ड केस का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस कथित घोटाले में न तो किसी ने पैसा बनाया और न उसका कोई लेनदेन हुआ। अलबत्ता, जिस रफ्तार से यह मामला चल रहा है, उसे देखते हुए इसके कई दशकों तक जारी रहने का कयास जरूर लगाया जा सकता है। नैशनल हेराल्ड केस के जन्मदाता बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी हैं। उन्होंने 2012 में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में फरियाद करके इस मामले की जांच की मांग की। उनके दृष्टिकोण से इस मामले को समझने की कोशिश करें तो कुछ प्रमुख बिंदु उभरते हैं:

मोदी सरकार बनने के बाद जून 2014 में कोर्ट ने सोनिया-राहुल समेत सभी आरोपियों को तलब किया और आयकर विभाग को नैशनल हेराल्ड और सोनिया-राहुल के टैक्स असेसमेंट की जांच करने को कहा। यह एक सामान्य अदालती प्रक्रिया थी क्योंकि जांच के बगैर अदालत कैसे तय करती कि आरोप सच्चे हैं या झूठे? आयकर विभाग ने 2011-12 के लिए यंग इंडियन लिमिटेड को 249.15 करोड़ रुपये टैक्स का भुगतान करने का नोटिस थमा दिया और आरोप लगाया कि YIL में राहुल गांधी को शेयरों से 154 करोड़ रुपये की कमाई हुई। कांग्रेस का कहना है कि आयकर विभाग ने इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया कि जिन शेयरों पर लाभांश मिल नहीं सकता, उनसे कमाई कैसे हो सकती है? और, यदि कमाई ही नहीं हुई तो टैक्स की देनदारी या चोरी का मामला कैसे बनेगा? बहरहाल, इन दलीलों को सितंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने और दिसंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए कह दिया कि इनकम टैक्स विभाग अपनी जांच को जारी रखे। फिलहाल, यह एक रहस्य है कि आयकर विभाग की जांच कहां तक पहुंची।

इससे पहले अगस्त 2014 में, ED ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर लिया। ‘स्वत: संज्ञान’ के बावजूद जांच की रफ्तार को देखते हुए दिसंबर 2015 में हेराल्ड केस के सभी आरोपियों को जमानत मिल गई। इससे पहले 2020 में मोतीलाल वोरा और 2021 में ऑस्कर फर्नांडीज का निधन हो गया। इनकी जगह कांग्रेस के नए पदाधिकारी बने मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन कुमार बंसल, राहुल गांधी और सोनिया गांधी से लंबी पूछताछ हो चुकी है। लेकिन कोई नहीं बता सकता कि जांच कब पूरी होगी, ट्रायल कब शुरू होगा, फैसला कब आएगा?

2018 में केंद्र सरकार ने हेराल्ड हाउस को मिली जमीन के 56 साल पुराने स्थायी पट्टे को रद्द कर दिया ताकि हेराल्ड हाउस से AJL बेदखल हो जाए। लेकिन अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने AJL के खिलाफ कार्रवाई को अगले आदेश तक रोक दिया। आरोप है कि नैशनल हेराल्ड चलाने वाली पुरानी कंपनी AJL पर बकाया कांग्रेस पार्टी के 90 करोड़ रुपये चुकाने के लिए नई कंपनी YIL ने 50 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके बाद कांग्रेस ने AJL के बाकी बचे 89.5 करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया। जबकि कांग्रेस पार्टी का कहना है कि AJL को खरीदते वक्त YIL ने कांग्रेस पार्टी को उसके 90 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले 10-10 रुपये के 9 करोड़ शेयर दे दिए।

मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप चूंकि इस मामले के केंद्र में है, इसलिए इस पर कांग्रेस की सफाई के कुछ मुख्य बिंदु गौर करने लायक हैं:

दरअसल, हेराल्ड केस में जिस कचहरी यानी पटियाला हाउस कोर्ट को सचाई तय करनी है, वहां तो मामला सालों-साल से ठंडे बस्ते में है। अलबत्ता, सियासी चरित्र की वजह से इस केस ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दर्जनों चक्कर काट लिए हैं, जहां ‘मेरिट ऑफ द केस’ की बातें कभी हुई ही नहीं।

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