-निर्मल कुमार शर्मा,
आजकल संपूर्ण देश में लेखकों,दलित अधिकार के लिए लड़ने वाले और आवाज उठानेवाले कार्यकर्ताओं,पत्रकारों,वकीलों,कवियों ,बुद्धि जीवियों आदि पर अनर्गल आरोप लगाकर उन्हें डराया,धमकाया और गिरफ्तार किया जा रहा है यहाँ तक कि उनकी प्रायोजित तरीके से प्रशिक्षित गुँडों द्वारा हत्या तक कराई जा रही है । आम जनता में दहशतगर्दी फैलाने हेतु कहीं गोकशी के नाम पर,कहीं बीफ के नाम पर,कहीं बच्चा चोर के नाम पर सुप्रीम कोर्ट की ऐसी हत्याओं को रोकने हेतु संबंधित राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश देने के बावजूद भी सुनियोजित तरीके से गुँडों के समूहों द्वारा अनियंत्रित और पागल भीड़ द्वारा बहुत से निरपराध,गरीब और कमजोर लोगों की लगातार हत्याएं हो रहीं हैं । सबसे दुःखद बात यह है कि इन हत्यारों को जमानत मिलने पर जेल के गेट पर ही सत्तारूढ़ दल के सरकार के मंत्री तक फूल-मालाओं से बेशर्मी से स्वागत् भी कर रहे हैं । इनके इस कुकृत्य से यह बात तो स्पष्ट हो ही रही है कि उक्त हत्याएं इनके इशारे पर ही की गईं हैं । जो भी निष्पक्ष व्यक्ति बहुसंख्यक हिन्दूवाद के खि़लाफ आवाज उठाता है उसको सत्ताधारी वर्ग के कुछ चुनिन्दा नेताओं और प्रवक्ताओं तथा बीजेपी द्वारा गठित आईटीसेल के द्वारा समवेत स्वर में देशद्रोही,अर्बन नक्सली,माओवादी या पाकिस्तान समर्थक आदि नई-नई अविष्कृत गाली देकर उसका जमकर अपमान किया जाता है । आज इस देश की हालात भय,डर और आतंक फैलाकर इमर्जेंसी से भी बदतर कर दी गई है,जबकि वर्तमान सत्ता के शीर्ष कर्णधारों द्वारा समय-समय पर पानी पी-पीकर इमर्जेंसी की बुराई की जाती रही है ।
यहाँ बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों को अपमानित और प्रताड़ित कर साधारण भरतीय आमजन को यह संदेश दिया जा रहा है कि जब इतने बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों के साथ ऐसी अमर्यादित और अशोभनीय व्यवहार किया जा सकता है,तो तुम्हारी क्या औकात है ! उक्त सारी घटनाओं को देखते हुए इस सरकार की फॉसीवादी चरित्र ही दर्शित हो रहा है । उद्देश्य यह है कि देश की संपूर्ण आम जनता में भय,दहशत और आतंक पैदाकर,फैलाकर सत्ता को अपनी मनमर्जी से चलाओ,ताकि इस देश में कोई भी विरोध करने की हिम्मत ही न कर सके,साहस ही न कर सके ! वर्तमान सत्ता जर्मनी में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय उसके शासक तानाशाह हिटलर के पदचिन्हों पर चलता नजर आ रहा है । अभी पिछले दिनों बर्लिन में उस दौर की नृशंसता और कुकृत्यों पर आधारित एक प्रदर्शनी लगी थी। उस समय के कुछ पुराने अभिलेखों के अनुसार कुछ दृष्टांत निम्नवत हैं-एक बैंक कर्मचारी,जिसने बड़े पदों पर बैठे नाजी लोगों का मजाक उड़ाया था,एक संगीतकार जिसने हिटलर पर तंज कसने वाले गानों को कंपोज किया था,एक खदान कर्मी जिसने पुलिस वालों को कम्युनिस्ट विचारधारा के पर्चे बांटे थे,एक 22 साल के स्विस धर्मप्रचारक को बिना टिकट यात्रा करने के जुर्म में गिरफ्तार करके उससे हिटलर को मारने का जुर्म जबरन कबूल करवा लिया गया । इन सभी लोगों को नाजियों द्वारा गठित कथित जनता की अदालत ने देशद्रोह का मुकदमा चलाकर तुरंत फाँसी पर लटका दिया !
भारत के वर्तमान काल के सत्ताधारियों का भी एकमात्र उद्देश्य भी यही है कि अपनी भांड़, नपुंसक,चाटुकार और चारण मिडिया के बल पर लोकतंत्र की बात करने वालों,गरीबी,बेरोजगारी, मंहगाई,भ्रष्टाचार,शिक्षा और अस्पतालों की दुर्व्यव्यवस्था आदि समस्याओं के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों,किसानों,आम आदमी, दिहाड़ी मजदूरों,दलितों के हित की बात करने वालों के प्रति नफ़रत पैदा करना,डरा देना, बदनाम कर देना,देशद्रोही घोषित कर देना आदि जैसे भी हो जातीय और धार्मिक ध्रुवीकरण करना,मानवाधिकारों की बात करने वालों को सीधे अर्बन नक्सलाइट और माओवादी घोषित कर देना बायें हाथ का खेल हो गया है,कुछ दिनों पूर्व तूतीकोरिन में स्टरलाइट तांबे के बहुराष्ट्रीय कंपनी की प्रायोजित साजिश में मारे गये लोगों के परिजनों की मदद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एस.वंचिनाथन, आदिवासियों,दलितों और सियासी कैदियों की मदद करने वाले सहृदय और सज्जनता के प्रतीक वकील सुरेन्द्र गाडगिल को गिरफ्तार किया जा चुका है ,हैदराबाद के मानवाधिकार कार्यकर्ता चिक्कुडू प्रभाकर जैसे सज्जन व्यक्ति को निरर्थक आरोप लगाकर छः महिने छत्तीसगढ़ के सुकमा जेल में बंद कर दिया गया,इसी क्रम में भीमाकोरेगांव उपद्रव में अलग -अलग शहरों से ये सरकार,जो खुद 43 प्रतिशत दागी सांसदों से संपन्न है,16 सामाजिक कार्यकर्ताओं ,मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले ,आदिवासियों,किसानों,मजदूरों की जायज हकों के लिए लड़ने वाले,अंधे बच्चों को पढ़ने में मदद करने वाले,जनवाद पर मार्मिक कविता लिखने वाले कवियों को गिरफ्तार करके उन्हें जबर्दस्ती आतंकवादी,अर्बन नक्सली और माओवादी घोषित करने के प्रयास में विफल रहने पर,मोदी की हत्या करने का कथित षड़यंत्र रचने का घृणित आरोप लगा दिया गया,जबकि ये सारे लोग खुद सत्तारूढ़ दल के नेताओं के चरित्र से हजार गुना पवित्र और मानवीय लोग हैं ।
इस सरकार का सबसे घृणित कृत्य, विश्वप्रसिद्ध प्राचीन इतिहास की 90वर्षीया सीनियर प्रोफेसर रोमिला थापर का अपमान करना है,जिन्हें उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए क्रमशः अमेरिका की ब्राउन युनिवर्सिटी,आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी,शिकागो यूनिवर्सिटी,एडिनबरा यूनिवर्सिटी और कलकत्ता यूनिवर्सिटी ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है । उन्हें आजीवन उपलब्धि के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सम्मानित क्लूग पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । उन्होंने दर्जनों पुस्तकें लिखीं हैं ,जो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सराही गईं हैं,वे दिल्ली विश्वविद्यालय की सात साल रीडर के पद पर रहीं,21 वर्ष जेएनयू में भारतीय प्राचीन इतिहास की प्रोफेसर रहीं और अब पिछले 26 सालों से जेएनयू में ही प्रोफेसर इमरिटा के पद पर नाममात्र के मानदेय पर अपना उत्कृष्ट कार्य कर रहीं हैं,उन जैसी अन्तर्राष्ट्रीय लब्धप्रतिष्ठित विदुषी प्रोफेसर से वर्तमान सत्ता के कर्णधारों द्वारा नियुक्त कठपुतली वाइसचांसलर उनका सी.वी. माँग रहा है ! इससे ज्यादे इस देश के लिए शर्मनाक बात क्या हो सकती है ! विडंबना यह भी है कि आज भारत की सत्ता ऐसे मसखरों और बहुरूपियों के हाथों चली गई है जिनके खुद की स्कूली शिक्षा कितनी है, ये देश को नहीं पता ! उनके ये कृत्य हैं ! यह इस देश की जनता,यहाँ के लोकतंत्र के लिए बहुत -बहुत अफस़ोस और चिन्ता की बात है ।
-निर्मल कुमार शर्मा,गाजियाबाद,उप्र,संपर्क- 9910629632

