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रात जितनी ही संगीन होगी,सुबह उतनी ही रंगीन होगी

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राजेन्द्र तिवारी

रात जितनी ही संगीन होगी,सुबह उतनी ही रंगीन होगी।

जब काली सर्दियों के सिर से रात का आँचल ढलकेगा ।

जब दुख के बादल छट जायेंगे, सुख का सागर छलकेगा।

जब अम्बर झूम के नाचेगा और धरती नगमे गायेगी।

वह सुबह कभी तो आयेगी।

( वह सुबह अवश्य आयेगी बस सदैव आशावादी, संगठित, जागरूक व प्रयत्नशील बने रहिए )

           साभार - राजेन्द्र तिवारी " भारतीय ", इंदौर , संपर्क - 6261185 828

          संकलन - निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद उप्र, सं
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