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सुंदरतम

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जल ने प्रलय मचा रखी है
आसमाँ की मोहब्बत में
दुनिया तबाह कर रखी है।

सोचते हो मोहब्बत
बस तुमने ही की है यहाँ
ओह नहीं नहीं……

हवा ने पानी से
पानी ने हवा से
आंखों से आंखें मिला रखी है।

सोचते हो खूबसूरत
बस तुम ही हो यहां
ओह नहीं नहीं……

पर्वतों ने अपनी सुंदरता से
सारी दुनिया अपने
कदमों में झुका रखी है।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

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