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 इस सदी की सबसे “ वल्गर “ तस्वीर

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यह तस्वीर काशी विश्वविद्यालय के राजा राम मोहन राय के छात्रावास के एक कमरे की है। यह कमरा कामर्स विभाग के छात्र रोहित राणा के नाम आवंटित है और राणा काशी विश्वविद्यालय NSUI के अध्यक्ष हैं। 

इन्हें पुलिस पहरे में रखा गया है। इस पहरे को हाउस अरेस्ट नही कह सकते, क्योंकि यह हाउस नही है, यह नयी परम्परा की शुरुआत है। ऐसा कभी इतिहास में न हुआ है, न भविष्य में होगा। कारण बताया जा रहा है क़ि बनारस में बनारस के सांसद और देश के प्रधानमंत्री मोदी आ रहे हैं। 

पुलिस कैम्पस में किसके परमिशन से आयी? 

कौन है विश्वविद्यालय का कुलपति? 

कुलपति कितना पढ़ा लिखा है? क्या उसने “कुलपति“ गरिमा का इतिहास पढ़ा है? छात्र, शिक्षण संस्थान और हुकूमत के रिश्तों की जानकारी है कुलपति के पास? 

यह जो आज हुआ है, अंग्रेज़ी निज़ाम तक में नहीं हुआ है। इतिहास देख लो।

डीयर कुलपति! 

चाहूँ तो अभद्र भाषा में यही बात लिखूँ, लेकिन उस मदरसे का तालिबे इल्म नहीं रहा, हमें भाषा की तमीज़ में तर्क रखने का सबक़ सिखाया गया है। अंग्रेज़ी पढ़ाई करके आए हो, इंग्लैंड का इतिहास पढ़े हो, उसका बोध भी समझ लो। बिश्व युद्ध लड़ा जा चुका है। पश्चिम की अर्थ व्यवस्था चरमरा चुकी है। सदन में चर्चिल बजट पेश कर रहे हैं, सेना में, निर्माण में, उद्योग और अन्य मदों में कटौती की गयी लेकिन शिक्षा बजट में बढ़ोत्तरी। 

चर्चिल से सवाल पूछा गया था- जवाब सुन लें कुलपति जी! सेना की कटौती से सीमा सिकुड़ सकती है, उद्योग और निर्माण और अन्य मदों में कटौती से आर्थिक गति रुक सकती है लेकिन शिक्षा सही गति में चलती रही तो हम सीमा बढ़ा सकते हैं, निर्माण को गतिशील कर सकते हैं लेकिन अगर शिक्षा बाधित हुई तो मुल्क ख़त्म हो जायगा। क्योंकि क़ौम नाकारा हो जायगी।

डीयर कुलपति। आप साइंस से हैं, हाइपो थीसस और प्रसेप्शन से वाक़िफ़ होंगे। आप कुलपति हैं यानी कसटोडियन। आप विश्विद्यालय में शिक्षक हैं, प्रशासनिक कर्मचारी हैं और छात्र हैं। याद रखिए सबसे मज़बूत और आवश्यक इकाई है छात्र। आपकी जिम्मेवारी है इसे गढ़ना, बेहतर इंसान बनाना। बेहतर इंसान का मतलब अमीबा नहीं होता, न ही गोडसे होना होता है। बेहतर इंसान होने का मतलब सुकरात, बुद्ध, गांधी, पंडित नेहरु, डॉक्टर लोहिया होना होता है। पढ़ाई में गांधी, भगत सिंह, सुभाष केवल रटने और पास होने के लिए हैं या उनकी डगर पर चलने की आदत डालने की? कुलपति जी आप जिस कुरसी पर बैठे हैं, उसी पर आचार्य नरेंद्र देव, डॉक्टर त्रिगुण सेन, डॉक्टर इक़बाल नारायण भी बैठ चुके हैं इनका इतिहास देख लें। 

पुलिस के हाथों विश्वविद्यालय सौंपना शिक्षा का सबसे बड़ा अपमान है। अपमान का पाप मत करिए। कुलपति जी! याद रखिए, आपका इतिहास आने से नहीं दर्ज होगा, जाने से दर्ज होगा।

(Chanchal Bhu जी की वॉल से साभार)

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