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*नईदुनिया की पुरानी दुनिया !बैपार में इमोशनल नईं होने का, काहे का स्यापा?*

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प्रकाश हिन्दुस्तानी 

इन्दौर में 60/1 केसरबाग रोड पर बनी इमारतों में से एक इमारत, मालिक ने ढहवा दी। वहां नई भव्य बिल्डिंग बनेगी। 100 करोड़ की। फाइव स्टार स्कूल खोला जाएगा। धनिकों के बच्चे पढ़ेंगे।अफसर-बैपारी-दलाल आदि बनेंगे। शिक्षा को धंधा बना लो तो माल ही माल मिलता रहता है। इनके रिटर्न रेकरिंग होते हैं। बढ़िया है! सभी बड़े-बड़े लोग इस धंधे में हैं। पूरा कानूनी काम है। एक लंबर!

इस नये ‘प्रोजेक्ट’ पर इन्दौर, भोपाल, दिल्ली, नागपुर आदि के कई जूने-पुराने पत्रकार स्यापा कर रहे हैं। स्यापा फिजूल है। वे कह रहे हैं कि इस परिसर की एक बिल्डिंग में कभी नईदुनिया का दफ्तर हुआ करता था। हमारी स्मृतियां जुड़ी है। यह बिल्डिंग धरोहर थी।

तो भाई, पत्रकार लोग ये बिल्डिंग क्या तुम्हारी थी? तुम्हारे बाप छोड़कर गये थे? तुम्हारी धरोहर कैसे हो गई? वह निजी, कमर्शियल इमारत थी, कोई लाल किला थोड़े ही था! जब नगर निगम, टाउन कंट्री प्लानिंग, विकास प्राधिकरण, ग्रीन ट्रिब्यूनल आदि को आपत्ति नहीं तो आप कौन? मालिक का मालिक बनने की कोशिश मत करो। तुम काहे को नईदुनिया के नाम पर इमोशनल अत्याचार करने पर तुले हो?  

रही बात नईदुनिया अखबार की, तो वह 13 साल पहले ही बिक चुका। वह तो अब किसी और प्रकाशन का हिस्सा है। मैंने भी नईदुनिया और वेबदुनिया में काम किया है। सेठ ने यही सिखाया कि खूब काम करो, अपनी तनख्वाह लो और बढ़ लो! फिर तुम कौन?

इस नये दौर में मुझे VC ने इमोशनल कर दिया। इस जगह के वर्तमान मालिक हैं। विदेश चले गये हैं। कारण यह बताया गया कि लोग उनसे तरह तरह के सवाल पूछते। किस किस को जवाब देते फिरते? सही है, बैपार में इमोशनल नईं होने का। इमोशनल हो तो बैपार नहीं करने का। अल कबीर और अल नूर सबके बड़े एक्सपोर्टर्स हैं, लेकिन वे माल थोड़े तैयार करते हैं। वे तो केवल रोकड़े का हिसाब देखते हैं।

फोटो फेसबुक पर Rajesh Jwell की वाल से उठाया गया है।

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