हेमलता कंसोटिया
1 जुलाई 2021 को दोपहर में दादर नगर हवेली (गुजरात से सटे) केन्द्र शाषित प्रदेश में सीवर सफाई करते हुए तीन कर्मचारियों की दर्दनाक मौत हो गई। तीनो सीवर सफाई मजदूर वाल्मीकि समाज से थे। गुजरात हाई कोर्ट के जजमेंट जिसमे की साफ़ तौर पर आदेश दिया गया है कि सीवर् के अंदर घुँसकर सीवर साफ़ करवाना अपराध है। कोई भी ऐजेंसी कर्मचारी को सीवर में सफ़ाई के काम के लिए नही मजबूर कर सकती है। यह सरासर अन्याय है अपराध है। इसके बावजूद भी कानूनों को ताक़ पर रख कर इन गरीब सीवर कर्मचारियों की लगातार हत्याएँ हो रही हैं। प्रशासन की आँख तले यह सब घटनाएं लगातार हो रहीं हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी सीवर में मजदूर को सफाई के लिए उतारने की कड़ी निंदा की है। अपने आदेश में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी घटनाओं पर सख़्त आपत्ति जताते हुए कहा है की यह सीधा -सीधा एक मजदूर को गैस चैंबर में उतारने जैसा है जहाँ ऐसे मजदूरों की मौत निश्चित है। इस तरह की प्रैक्टिस को तुरंत रोका जाए और कहीं पर ऐसा होता है तौ इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी अपराध की श्रेणि में आती है। केंद्र सरकार द्वारा पारित मन्युवल स्कैवेंजर एक्ट 2013 (MS Act 2013) के तहत् किसी भी सीवर सफाई कर्मचारी को सीवर में घुँसकर सफाई करने की सख़्त मनाही है। कर्मचारी को जबदस्ती सीवर में घूंसाना एक ग़ंभीर अपराध है। मन्युवल स्कैवेंजर एक्ट 2013 का साफ़ तौर पर उल्लंघन किया गया है।
इसके मद्देनज़र हम दादर नगर हवेली प्रदेश की सरकार से एवं दादर नगर हवेली प्रदेश के सफाई कर्मचारी आय़ोग से तथा राष्ट्रीय मानव अधिकार आय़ोग और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से अपील करते हैं की ये संस्थाएँ इस घटना के विषय में तुरंत संज्ञान ले और इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख़्त कार्येवाही करे और पीड़ित परिवारों को मन्युवल स्कैवेंजर एक्ट 2013, वर्कमैंन कंपेंसशन एक्ट अनुसूचित जाति /अनुसूचित जन जाति क़ानून के तहत मुक़द्दमा दर्ज़ करके संबंधित सरकार से तथा संबंधित अजेंसीस से उचित मुआवजा दिलवाने के लिए सख्त कार्यवाही करे।

