रजनीश भारती
अभिसार शर्मा, रवीश कुमार, पुण्य प्रसून बाजपाई, अजीत अंजुम आदि जैसे पत्रकार, ये भाजपा और मोदी विरोधी हो सकते हैं मगर अमेरिकी साम्राज्यवाद के विरोधी नहीं हैं। ये कांग्रेसपरस्त या दूसरे राजनैतिक पार्टी और पूंजीवाद के पक्षधर पत्रकार हैं। इसी तरह के कई और पत्रकार हैं, जो मोदी और भाजपा की बुराई तो करते हैं मगर जिस पूंजीवादी व्यवस्था ने मोदी जैसों को पैदा किया, उस पूंजीवादी व्यवस्था की आलोचना नहीं करते, क्योंकि ये लोग समाजवाद के दुश्मन हैं। ये लोग अमेरिका की सह पर भारत में चीन विरोधी माहौल बनाते रहे हैं। आज फिर लद्दाख में भारतीय सीमा पर चीनी सैनिकों के घुसपैठ की फर्जी खबरें दिखाकर भारत को विश्व युद्ध का अखाड़ा बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
जरा सोचिये, जब चीन अपने सस्ते मालों के दाम के बल पर हमारे देश के 70-80 % बाजार पर छाया हुआ है तो वह चीन हमारे देश की थोड़ी सी जमीन पर कब्जा करके हमारे देश की सेना को क्यों ललकारेगा। जिसकी दुकानदारी अच्छी चल रही हो वह बेजा फसाद करके अपनी दुकानदारी खराब नहीं करता।
अभिसार शर्मा, रवीश कुमार….. जैसे लोग यह नहीं बताते कि असल लड़ाई तो बाजार में चल रही है । चीन के सस्ते समाजवादी उत्पादों के मुकाबले भारत के मंहगे पूंजीवादी उत्पादन बिक नहीं पा रहे हैं। हमारे देश के पूंजीपति अपने कारखाने बंद करके चीन का सस्ता माल खरीद कर बड़े-बड़े शापिंग माल खोलकर तथा आनलाइन शापिंग के जरिये बेच रहे हैं। जिससे हमारे देश के छोटे दुकानदारों की तबाही बढ़ रही है, बेरोजगारी, सूदखोरी, भ्रष्टाचार,गरीबी,भुखमरी, मंहगाई और अपराध में बढ़ोत्तरी हो रही है।
*ऐसी दशा में हम भी समाजवादी उत्पादन करके सस्ता माल पैदा करके चीन को कम से कम अपने बाजार में तो हरा सकते हैं।* मगर पूंजीपति वर्ग समाजवाद के लिये अपनी निजी पूंजी को समाज के हवाले करके अपनी कब्र खुद नहीं बनायेगा। ये काम जनता ही कर सकती है। इसीलिये पूंजीपति वर्ग नशाखोरी,अश्लीलता, अन्धविस्वास, अज्ञानता, अपसंस्कृति,…आदि बुराइयों को बढ़ावा देकर जनता के खिलाफ लड़ रहा है। इस लड़ाई में कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियां पूंजी पति वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं तथा पूंजीपति वर्ग की गोदी मीडिया और पैदल मीडिया इनका प्रचार करती हैं तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद इनकी मदद करता है।
भारत को विश्वयुद्ध का अखाड़ा बनने से बचाने के लिये तथा अमेरिकी साजिश को बेनकाब करने के लिये, इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करके दोनो देशों के मेहनतकश किसानों,मजदूरों तथा सेना में शामिल उनकी संतानों पर युद्ध का बोझ लादने से बचाया जाए।तथा दोनों देशों के बीच आपसी विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिये हल कराया जाए।
*रजनीश भारती*

