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नीतीश जी के सुशासन और उनके विकास की असलियत

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शिवानंद तिवारी

पूर्व सांसद बिहार

आज के अखबार में छपी दो खबरें नीतीश जी के सुशासन और उनके विकास की असलियत उजागर कर रही हैं. पहली खबर सिकंदरा की है. एक गरीब महिला के घर शराब बरामद करने के लिए पुलिस छापेमारी करती है. वह महिला दुर्गा का रूप धारण कर लेती है. हाथ में तलवार और त्रिशूल लेकर पुलिस को चुनौती देती है. वह जो सवाल उस दारोग़ा से कर रही है दरअसल वह सवाल उस दरोगा से नहीं है जो उसके घर में छापेमारी करने के लिए गया है. यह सवाल तो नीतीश कुमार से है. उसका यह सवाल नीतीश कुमार के न्याय के साथ विकास के दावे को नंगा कर रहा है.सवाल जायज है. घर में जवान बेटी है , बाल बच्चे हैं. वह पूछ रही है कि आपने तो कोई नौकरी दिया नहीं है ! कैसे हम परिवार का पेट पालें ? उसका कहना है कि वह चोरी चमारी नहीं कर रही है. शराब बेच कर अपने बाल-बच्चों की परवरिश कर रही है. वह जेल चली गई होगी. अब उसकी जवान बेटी की कौन हिफ़ाज़त करेगा नीतीश जी ? उसके बच्चों का मां की गैर हाज़िरी दाना पानी कैसे चलेगा! नीतीश कुमार अखबार बहुत गौर से पढ़ते हैं पता नहीं इस खबर पर उनकी नजर पड़ी है या नहीं. अगर पड़ी है तो इस गरीब बेसहारा महिला के सवालों का उनके पास क्या जवाब है ! नीतीश जी कोई भी क़ानून इतना अमानवीय कैसे हो सकता है! समाज को बेहतर बनाने वाला कोई भी क़ानून उसके अमानवीय पक्ष को अनदेखा कैसे कर सकता है !


दूसरी खबर मधुबनी के झंझारपुर इलाके की है. ख़बर तस्वीर के साथ है. विस्थापितों का एक सौ परिवार खुले आसमान के नीचे इस जानलेवा ठंड के मौसम में जीवन बसर कर रहा है. सर के ऊपर पतला पॉलिथीन. उसमें भी कई जगह छेद . इस ठंडी हवा में उनका जीवन कैसे बसर हो रहा है इसकी कल्पना भी मुश्किल है. बासठ वर्षीय समतुल्य देवी कहती हैं कि हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है.
इन लोगों का परिवार 2019 में कमला बलान नदी का तटबंध टूटने से विस्थापित हुआ है. 2020 मार्च में इनमें से 51 लोगों को ज़मीन का काग़ज़ मिला. लेकिन अभी तक उस ज़मीन पर क़ब्ज़ा नहीं मिला. 2020 में मुख्यमंत्री जी इन लोगों की हालत देखने नहीं बल्कि बांध हाल चाल देखने उधर गये थे. इन पर नज़र पड़ी तो ज़िला प्रशासन को आदेश दिया कि जल्द ज़मीन भरवा कर इन लोगों को क़ब्ज़ा दिलवाया जाए. उसके बाद से अब तक कोई उनकी ओर झांकने भी नहीं गया है.
इस तरह से न जाने कितना आश्वासन मुख्यमंत्री जी ने लोगों को दिया होगा. लेकिन खेद है कि उनका आश्वासन, उनका आदेश शायद ही जमीन पर उतरता है.
जो निर्देश या आदेश दिया जा रहा है वह अमल में आ रहा है या नहीं इसका कोई तंत्र इतने दिनों में नीतीश जी ने विकसित नहीं किया है. नीतीश जी की विकास दृष्टि न्याय पर आधारित है या नहीं जिसका वह दावा करते हैं ! लेकिन इनकी विकास नीति का परिणाम है कि एक ओर अकेली महिला अवैध ढंग से शराब बेच कर परिवार चला रही है. हज़ारों परिवार जानलेवा ठंड में चिमकी के नीचे जीवन बसर कर रहे हैं. तो दूसरी ओर राजधानी पटना में पिछली दिवाली में 28 हज़ार रुपये किलो की मिठाई का भी भोग लगा. यही है नीतीश जी का न्याय के साथ बिहार का विकास.

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