डॉ. अभिजित वैद्य
धर्म का ध्वज जब अनपढ़ लोगों के हाथ में जाता है,
तब उस ध्वज से खून की बुँदे टिपकने लगती है,
वह खून होता है उस धर्म का !
कवी कुसुमाग्रज की इन तप्त पंक्तियोंकी याद आई धर्म का झंडा हाथ में लिए हुए भगवा
कफ़न धारन करनेवाले अनपढ़ लोगों द्वारा की गई बकवास और जहाल मंतव्य सुनकर !
संत बसवेश्वर, संत कबीर, संत मीराबाई, संत रोहिदास, संत नामदेव, संत एकनाथ, संत
जनाबाई, संत तुकाराम, संत तुकडोजी तथा संत गाडगेबाबा महाराज के इस देश में संतों
का स्थान अका बुवा-बाबा-महाराज ने ली है l बुवाबाजी करनेवाले ज्यादातर कम पढे-
लिखेवाले हैं l इनमें से ज्यादातर बुवा-बाबा को विज्ञान, कला, साहित्य का ज्ञान तो नहीं है
अपितु उन्हें धर्मग्रंथों का भी अभ्यास नहीं है l इनमें से अनेक गुनाहगार है l लेकिन इनके
पास एक चीज बहुत बड़ी मात्रा में है और वह है संपत्ति l अध्यात्त्म के नाम पर गरीब
जनता को फंसाना उनका पेशा है l महान हस्तियों के साथ उनके संबंध होते है l उनके
सम्मुख सत्ता एवं कानून झुक जाते हैं l हमारे देश की संत परंपराने इस देश को सभ्यता,
सहिष्णुता तथा समता के धागे में बाँध दिया है l उपरोक्त संतों ने भारतीय संस्कृति को
धनवान एवं समृद्ध बनाया l स्वतंत्रता के बाद संतों का स्थान बुवा लोगों ने लिया l
हिंदुत्ववादी लोगों ने बुवाबाजी का सही ढंग से जतन किया और इसका कर्ज चुकाने हेतु
इन बुवा लोगों ने हिंदुत्ववादी लोगों को सत्ता में लाने के लिए तैयारी की l धर्म की भाषा
बोलनेवाले बुवा हिंसा के बारे में खुलेआम चर्चा करते हैं और नक्षलवादीयों की हिंसा का
निषेध करनेवाले हिंदुत्ववादी इन बुवाओं की सराहना करते हैं l हरिद्वार की धर्मसभा में
हिंसा की भाषा करनेवाले तथा महात्मा गांधीजी को हत्या का निर्लज्ज समर्थन करनेवाले
इन गुंडों का निषेध आजतक किसी भी हिंदुत्ववादी संघटनाओं तथा भाजप के किसी भी
नेता द्वारा किया गया नहीं l मुस्लिमों को काँटने की भाषा करनेवालों का निषेध मोदी एवं
अमित शाह क्यों नहीं कर रहे इसका कारन मालूम है इसलिए हम वह अपेक्षा नहीं करते l
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कवी भाऊ पंचभाई के शब्दों में ———
राजधर्म के सूत्र का उन्होंने ऐसा पालन किया
कल उन्होंने इन्सानों का सभ्यता से गला घोट दिया l
मनुवादियों ने स्वार्थ के हेतु धर्म की बुनियाद रखी और देश पर जन्माधिष्ठित
वर्णव्यवस्था जारी की और इस देश की प्रगति को रोक दिया l देश को अपाहिज बना
दिया l विभिन्न जातियों में बिखरा हुआ हमारा देश पराया लोगोंकी गुलामी में आसानी से
चला गया l मनुवादियों के संबंधों को उन्होने छुआतक नहीं l उनके विरुद्ध मनुवादी कभी
लडे नहीं l जब अंग्रेजों के विरुद्ध हमारा देश लड रहा था तब गोळवलकर कहते थे अंग्रेज
हमारे दुश्मन नहीं है l हमारे दुश्मन है मुसलमान, ख्रिश्चन एवं कमुनिस्ट l लाखों ज्यू
लोगों की हत्या करनेवाला हैवान हिटलर उनका आदर्श था l वंशछेद करना हिंदुत्ववादीयों
का उस समय से ही सपना बन गया l हिंसा उनकी विचारों की आत्मा थी l भारतीय
स्वतंत्रता का आंदोलन अहिंसा से विजयी हुआ इसका दुःख होना स्वाभाविक था l उसको
छेद देने हेतु उन्होंने भगतसिंह की फाँसी हेतु झूठे आँसू बहा दिए l लेकिन भगतसिंह
समाजवादी एवं नास्तिक था तथा हिंसा का निषेध करनेवाला था इसे वे भूल गए l
भगतसिंह की फाँसी रोकने हेतु हिंदुत्ववादीयो ने ना कभी आंदोलन छेड़ा ना कोई प्रयास
किए. काँग्रेस से दूर होकर आजाद हिंद सेना निर्माण करनेवाले सुभाषचंद्र बोस पर गांधी
एवं नेहरुजी ने किस तरह से अन्याय किया इसकी काल्पनिक कथाएं लिखी गई l लेकिन
आजाद हिंद सेना में एक भी संघ स्वयंसेवक सम्मिलित क्यों नहीं हुआ ? देश छोड़ने से
पहले सुभाषबाबु ने गांधीजी से आशीर्वाद लिए और आजाद हिंद रेडिओ पर किए गए पहले
भाषण में उन्होंने गांघीजी का नाम्मोलेख ‘राष्ट्रपिता’ ऐसा किया था l आजाद हिंद सेना के
सैनिकों को रिहा करने के लिए अपना कानूनी ज्ञान लेकर सावरकर आगे नहीं बढे l उनका
वकीलपत्र पं. नेहरूजीने लिया l मिला हुआ स्वातंत्र्य हिंदुत्ववादीयों को अपना नहीं लगा
क्यों की इस आंदोलन में उनका सहभाग नहीं था l लेकिन इससे भी अधिक महात्मा गांधी
जैसे वैश्य व्यक्ति के पास स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व का होना, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
जैसे ‘अस्पृश्य’ द्वारा स्वतंत्र भारत का पहला संविधान लिखा जाना तथा संविधान के
जरिए जातिव्यवस्था नष्ट करके, द्लितोंको शिक्षा के द्वारा खुला कर देना, उन्हें आरक्षण
की सुविधा उपलब्ध कराकर यह देश धर्मनिरपेक्ष तथा जनतंत्र निर्माण करना हिंदुत्ववादियों
को पसंत नहीं था l इस्लामी एवं ब्रिटिश सत्ता के दीर्घ कालावधि में भी अबाधित रहा
ब्राम्हणवाद तथा ब्राम्हणी प्रभुत्व देश के संविधान ने नष्ट किया इसका बहुत गुस्सा था l
संघ की स्थापना हिंदूराष्ट्र के लिए की गई थी l हिंदू राष्ट्र का अर्थ है मनुस्मृति पर
आधारित राष्ट्र l मनुस्मुति जलाकर समस्त हिंदूओ की समता पर निर्माण किया हुआ राष्ट्र
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नहीं ! भारत स्वतंत्र हुआ और ब्राम्हनी प्रमुत्व रखने वाले हिंदू राष्ट्र का सपना चकना चूर
हो गया । अब जनतंत्र मार्ग से सत्ता हासिल करनी होगी तो समूचे हिन्दुओं की मतपेटी
निर्माण करनी होगी । अगर हिंदुओ को इकठ्ठा करना है तो मुस्लिम के प्रति उनके मन
द्वेष निर्माण करना यही एक आधार है । इसके लिए देश के हिन्दुओ को विशेषतः ‘निम्न
जाती के लोगों को हमेशा देशांतर्गत तथा देश के बाहर के मुस्लिम आक्रमण की डर की
छाया में रखना । हिंसा के लिए प्रेरित करना । शस्त्र उठाने के लिए भडकाना । हजारों
साल परायी सत्ता के जुल्म में होते हुए हिंदू धर्म ‘खतरे’ मे नहीं था । इन सत्ताओं से देश
को स्वतंत्र करने के लिए धर्म सभा लड़ी नहीं । देश को स्वातंत्र्य मिलने के बाद हिंदू धर्म
तुरंत संकट में आ गया । वास्तव में हिंदू धर्म संकट में आया ब्राहमण वाद एवं मनुवाद
के कारन । अपने ही धर्म के बांधवों पर सैकड़ो साल बहुत अत्त्याचार करनेवाला दूसरा
कौनसा धर्म है ? लेकिन मुस्लिम द्वेष एक ऐसा जहर है की सैकड़ो सालों से अपने ही
धर्म के बांधवों की ओर से अत्याचार सहन करनेवाला मुस्लिम वर्ग के विरुद्ध हाथियार
उठाने के लिए आगे-पीछे नहीं देखता । यह हथियार उठाकर ब्राह्मणवादी या उनके
बालबच्चे सडकों पर उतरते नही, हिंसा करने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाकर सडकों
पर उतरता है बहुजन समाज । गोध्राकांड में उच्चवर्णीय सडक पर नहीं उतरे, सड़कों पर
उतरे दलित एवं आदिवासी ।
यह प्रयोग अब व्यापक रूप में करने की कोशिश हैं । गोध्रा हिंदुत्ववाद की प्रयोगशाला थी ।
प्रयोग यशस्वी करनेवाले सत्ता पर आ गए । पूरे देश में निर्माण की गई इन प्रयोगशालाओं में
अब जहर युक्त रासायन तैयार हो रहा है । १८५७ के आंदोलन में हिंदू एवं मुसलमान कंधे
को कंधा लगाकर ब्रिटिशों के विरुद्ध लडे । अब हिंदुओं ने इससे भी बड़ा हिंसक धर्मयुद्ध
मुस्लिमों के विरुद्ध शुरू करना चाहिए ऐसी खुलेआम चेतावनी दी जा रही है । म्यानमार में
लष्कर एवं पुलिस मुस्लिमों के विरुद्ध कैसी हिंसा कर रही है इसका उदाहरण दिया जा रहा
है । किसी भी सभ्य, सुसंस्कृत, प्रगत, विज्ञानवादी देशों का उदाहरण न देते हुए गंदी,
जंगली, प्रतिगामी, मध्यमयुगीन हिंसक हुकूमत हमारे आदर्श बन गए है । धर्म की पताका के
नीचे गुंड तैयार किए जा रहे है । और गुंडागर्दी हमारा धर्म बन रहा है । महात्मा गांधीजी के
छायाचित्र पर खुलेआम गोली चलानेवाली पूजा पांडे उर्फ़ अन्नपूर्णा माँ, महात्मा गांधीजी को
हरामखोर कहकर गोडसे को नमन करनेवाला अकोले का आठवीं उत्तीर्ण अभिजित सराग उर्फ़
कालीचरण तथा हिंदुओं मे प्रभाकरन या भिंद्रनवाले होना चाहिए ऐसा आवाहन करनेवाला
यती नरसिंधानंद आदि सभी हिंदुत्ववाद के नाम पर बीमारी का लक्षण है ।
संतश्रेष्ठ तुकाराम ने अति स्पष्टता से ऐसे लोगों की संभावना की है ———
ऐसे कैसे बन गए भोंदू, कर्म करके समझते हैं साधू
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बदन पर लगाकर भस्म, आँखे मिटाकर करते हैं पाप ।
लेकिन अगर आज तुकाराम महाराज होते तो कहते ——–
ऐसे कैसे बन गए गुंडे, चक्कू पकड़कर समझते है साधू
बदनपर पहनकर भगवा कपडा, कहते हरेक का कर यूँ टुकड़ा ।
धर्म के नाम पर अनेक गुंडों को बड़ा करनेवाले, पालन करनेवाले, अभय देनेवाले और उनका
इस्तेमाल करनेवाले कोई और ही लोग है ।
लेकिन कवि नीरज ने जो सवाल पूछा है इसे इन लोगों के सम्मुख रखना आवश्यक है ——
क्या करेगा प्यार वह भगवान को
क्या करेगा प्यार वह इमान को
जन्म लेकर गोद में इन्सान की
प्यार कर पाया न जो इन्सान को ।
लेकिन भावनिक आवाहन एवं मानवता की आवाज ह्रदय तक पहुँचनेवाले ये लोग नहीं है ।
हरिद्वार की विस्फोटक भाषण इस देश की हिंसात्मक यादवी की शुरुवात है । पूर्व
सरसंघचालक सुदर्शन ने अतिस्पष्टता से कहा था की, इस देश में जल्दी ही भविष्य में हिंदू
एवं मुस्लिमों में महाभारत जैसा गृहयुद्ध युद्ध होगा । महाभारत के युद्ध के पश्चात पाँच
पांडव, धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती एवं श्रीकृष्ण इतने ही जिंदा बचे थे इस बात को शायद सुदर्शन
भूल चुके थे ।
गृहयुद्ध करने का नियोजन बहुत पुराना है । उसे रोकने का निर्धार एवं कृति इस देश पर
प्रेम करनेवाले सभी लोगो ने नववर्ष के स्वागत के साथ करनी चाहिए ।
पुरोगामी जनगर्जना के नियमित पाठकों, हितचिंतकों तथा सभी देशवासियों को प्रजासत्ताक
दिन तथा नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !

