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*घाटी में सबसे घातक हमला:सरकार के सुरक्षा प्रयासों से उपजी बौखलाहट*

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कश्मीर में आतंक के विरुद्ध जन-आक्रोश की नई लहर

बृजमोहन श्रीवास्तव

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में कम से कम 28 नागरिक मारे गए, जिनमें ज़्यादातर पर्यटक थे । यह 2019 के पुलवामा हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला है। इसके पहले 18 मई 2024 में भी दो आतंकवादी हमले हुये थे जिसमें शोपियां में बीजेपी के पूर्व सरपंच ऐजाज अहमद शेख की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी, रात 10:30 बजे हिरपोरा में हुई इस घटना का उद्देश्य केंद्र सरकार के सुरक्षा प्रयासों से उपजी बौखलाहट थी । इसी दिन अनंतनाग में जयपुर के एक मुस्लिम जोड़े को भी गोली मार कर घायल किया था । इन दोनों घटनाओं के पीछे भारत सरकार के सुरक्षा प्रयासों के दावों को झुठलाने की कोशिश के साथ पर्यटकों को हतोत्साहित करने का उद्देश्य आतंकवादियो का था

। पहलगाम में हुआ यह हमला बैसरन नामक घास के मैदान में हुआ,जहाँ केवल पैदल या टट्टू से ही पहुँचा जा सकता है, मंगलवार की सुबह पर्यटकों का एक समूह वहाँ घूमने गया था। इस हमले में निर्दोष पर्यटकों की निर्मम हत्या ने केवल मानवता को ही शर्मसार नहीं किया है बल्कि कश्मीर की शांति और विकास की राह में एक गंभीर चुनौती भी पेश करने की कोशिश की है जो उनकी हताशा को बयां करती है। इस त्रासदी के बीच मगर एक सकारात्मक परिवर्तन भी देखने को मिला है। घटना के तुरंत बाद जिस प्रकार से कश्मीर के आम नागरिकों ने इस हमले की खुलकर निंदा की है और आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ बुलंद की है जो इसके पहले कभी देखने को नहीं मिली थी । कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने रैलियाँ निकालकर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जो इस बात का संकेत है कि अब कश्मीर के लोग शांति और विकास के पक्षधर हैं और केन्द्र की नीतियों का खुलकर समर्थन कर रहे है। पिछले कुछ वर्षों में शांति और विकास का जो माहौल बना है, उसने स्थानीय लोगों को यह महसूस कराया है कि स्थिरता और समृद्धि ही उनके भविष्य की कुंजी है। पर्यटन, शिक्षा, और व्यापार के क्षेत्र में हुए सुधारों ने लोगों को यह समझाया है कि आतंकवाद से दूरी बनाकर ही वे अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। कश्मीर के वातावरण में यह बदलाव अचानक नहीं आया है यह परिणाम केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी की नीतियों और प्रयासों से सम्भव हुआ है जो वह गत कई वर्षों से कर रहे है। उनके ईमानदार प्रयासों ने कश्मीर के लोगों में विश्वास और सुरक्षा की भावना को पुनर्जीवित किया है। पिछले समय से श्री शाह ने कश्मीर के बहुत से दौरे के दौरान स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित किया ,कश्मीरियों के मन में यह भरोसा जगाया कि केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा व भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। पहलगाम की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विदेश दौरे पर रहते हुए इस पर सतत निगरानी रखी । वहीं अपने विदेशी दौरे को बीच में छोड़कर कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि कश्मीर की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार गंभीर है। घटना के तत्काल बाद श्री अमित शाह जी के पहुँचने से कश्मीर में सुरक्षा और विश्वास का माहौल बना है लोगों को विश्वास हुआ है कि केंद्र के शांति के प्रयासों में कोई कमी नहीं आयेगी । उनके इस कदम से निश्चित ही आतंकियों के मनोबल पर असर पड़ेगा । बैसरन की घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या आतंकवाद फिर से पैर पसारने की कोशिश कर रहा है ? इसका जवाब निश्चित ही नहीं है क्योंकि अब कश्मीर के लोग जागरूक हो चुके हैं और उन्होंने तय कर लिया है कि वे आतंकवाद का समर्थन नहीं करेंगे। उनकी यह दृढ़ता ही आतंकवाद के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। क्योंकि इस घटना के बाद कश्मीर में जो जन-आक्रोश देखने को मिला है, वह इस बात का प्रमाण है कि अब कश्मीर के लोग आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो चुके हैं। यह बदलाव न केवल कश्मीर के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक आशा की किरण है। पिछले कई दशकों से कश्मीरी नागरिकों को आतंकवादी गतिविधियों के कारण भारी व्यक्तिगत, आर्थिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ा है। फिर भी, वे आज भी इस स्थिति का पूरी हिम्मत के साथ सामना कर रहे हैं। ऐसे कठिन समय में भी इतनी मजबूती से खड़े रहना और स्थिति को संभालना, उनकी मानसिकता वाकई इस देश के लिए प्रेरणादायी है। यह अवसर है जब केंद्र सरकार इस जन-भावना को और मजबूत करे और कश्मीर के लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करे, ताकि वे आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और प्रभावी ढंग से लड़ सकें। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों का समर्थन करना चाहिए। अंततः, पहलगाम की घटना एक चेतावनी है, लेकिन कश्मीर के लोगों की प्रतिक्रिया एक आशा की किरण है जो केंद्र सरकार के प्रयासों पर सील लगाते हुये कह रही है कि अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हों जिससे कश्मीर शांति, विकास, और समृद्धि की ओर अग्रसर हो जिससे आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके । (लेखक राष्ट्रीय महामंत्री-प्रभारी जम्मू-कश्मीर व प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता,नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी हैं)

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