
निर्मल कुमार शर्मा,
अभी पिछले दिनों मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक अनुषांगिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह की दो दिवसीय अखिल भारतीय चिंतन बैठक संपन्न हुई। इसमें देश-दुनिया में हिंदुत्व की दशा-दिशा और चुनौतियों पर सारा ध्यान केंद्रित रहा। इस महत्वपूर्ण बैठक के समापन भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्री मोहनराव मधुकर राव भागवत ने कहा कि ‘सत्य,करूणा,सुचिता आदि सभी धर्मों के मूल गुण हैं। हम एकांत में साधना और लोकांत में सेवा करते हैं। धर्म की रक्षा धर्म के आचरण से होती है। हमारे गुण-धर्म ही हमारी संपदा और हमारे अस्त्र-शस्त्र हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी का प्रतिस्पर्धी नहीं है,बल्कि धर्म तथा राष्ट्र के उत्थान के लिए कार्यरत संगठनों,संस्थाओं व व्यक्तियों का सहयोगी है ‘
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्री मोहनराव मधुकर राव भागवत ने इस बैठक के समापन भाषण में आज के वर्तमान समय के ज्ञान-विज्ञान से सम्पन्न आधुनिक युग में बहुत ही शर्मनाक,भारतीय समाज के लिए बहुत ही घृणित,अतिनिंदनीय,राष्ट्रविरोधी और इस देश के संवैधानिक व लोकतांत्रिक राष्ट्र राज्य के लिए बहुत ही घटिया बयान दिया कि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब इसे लेकर बहुत ही चिंतित है कि कैसे कुछ तत्व व ताकतें तथा शैक्षिक संस्थानों विशेषकर इस देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय, आइआइटी तथा आइआइएम संस्थान समेत अन्य सुप्रतिष्ठित संस्थान युवावर्ग को दिग्भ्रमित मतलब माइंडवाश करने में जुटे हैं ! ये छात्र -छात्राओं को मुख्यधारा से अलग – थलग कर उन्हें भटकाने का षड्यंत्र करने का काम कर रहे हैं ! इनके नापाक मंसूबों को सफल न होने देने के लिए क्या प्रयास होने चाहिए,इस पर इस बैठक में विस्तार से चर्चा हुई ! इस बैठक में हिन्दुत्व व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बदनाम करने की साजिशों का जवाब कैसे दिया जाय, इस पर रणनीति बनी ! ‘
लेकिन भारत को दुनिया के सैन्य और वैज्ञानिक क्षेत्र में सबसे प्रगतिशील व उन्नतिशील देशों के समकक्ष खड़ा करने में अपने बेहतरीन प्रयास करनेवाले यहां के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, आइआइटी तथा आइआइएम संस्थानों समेत अन्य सुप्रतिष्ठित संस्थान भारतीय युवावर्ग को किस प्रकार दिग्भ्रमित मतलब माइंडवाश करने में जुटे हैं ? और ये छात्र -छात्राओं को मुख्यधारा से अलग – थलग कर उन्हें भटकाने का कैसे षड्यंत्र करने का काम कर रहे हैं ? इस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चीफ श्री मोहनराव मधुकर राव भागवत जी कोई बयान नहीं दिए हैं ! और यह भी कि भारत के सुप्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों,आइआइटी तथा आइआइएम संस्थानों समेत अन्य सुप्रतिष्ठित संस्थानों को भारतीय युवा वर्ग को कथित तौर पर दिग्भ्रमित मतलब माइंडवाश करने से रोकने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इस अनुषांगिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह की दो दिवसीय अखिल भारतीय चिंतन बैठक में कौन सी रणनीति बनी ? इस पर भी श्री मोहनराव मधुकर राव भागवत जी बिल्कुल मौन साध लिए हैं !
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चीफ श्री मोहनराव मधुकर राव भागवत जी के उक्त बयान से यह तो निश्चित रूप से प्रमाणित हो ही गया है कि अभी पिछले दिनों जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय समेत इस देश के तमाम सुप्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में दिन-दहाड़े पुलिस की आंखों के सामने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बनाए बजरंग दल व श्रीराम सेना जैसे उग्रवादी संगठनों के प्रशिक्षित गुंडों द्वारा वहां के छात्रों तथा प्रोफेसरों के साथ वहां की छात्राओं तथा महिला प्रोफेसरों तक पर किए गए प्राणांतक हमले मात्र संयोग नहीं, अपितु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा बाकायदा पूर्व नियोजित व सुचिंतित दुर्नीति के तहत बनाए गए थे और उसी के तहत वे हमले किए गए थे ! और ये भी कि बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में एक छात्रा के साथ की गई बिल्कुल अमर्यादित तथा अश्लील आचरण भी उक्त बजरंग दल व श्रीराम सेना जैसे उग्रवादी संगठनों के प्रशिक्षित गुंडों द्वारा ही किया गया !
कितने दु:ख,हतप्रभ तथा बिस्मित कर देनेवाली बात है कि इस दुनिया के किसी भी देश की सभ्यता,संस्कृति,विज्ञान और तमाम अन्य प्रगतिशील विचारधारा के उत्थान के लिए वहां के उच्च शिक्षा संस्थान तथा आधुकतम् सुविधाओं से सम्पन्न युनिवर्सिटीज,मेडिकल कॉलेजों, इंजिनियरिंग कॉलेजों,शोध संस्थानों तथा अन्य रिसर्च संस्थानों का उस देश के सामाजिक, नागरिक, चारित्रिक,आर्थिक व वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्राप्त करने के सबसे बेहतरीन माध्यम हैं। आज इस दुनिया के सबसे उन्नतशील व वैज्ञानिक रूप से समृद्ध देश अपनी जनता के लिए हर सुख-सुविधा और आरामदायक जिंदगी के लिए परमावश्यक चीजों और साधनों की जरूरतों को पूरा करने के अलावा अपने देश के लिए तथा अपनी जनता के उपयोग में आनेवाले हर उपकरणों और साधनों यथा कारें,बसें,ट्रामों, मेट्रोज,हवाई जहाजों, अंतरिक्ष यानों,अंतरिक्ष स्टेशनों आदि को अत्यंत परिष्कृत बनाने में सतत लगे हुए हैं । इसलिए वे अपने उच्च शिक्षा संस्थानों और शोध संस्थानों को असीम सुविधाओं को प्रदान कर,उन उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा नये-नये अविष्कार कराने के लिए वहां उच्च स्तर के शोधार्थियों, वैज्ञानिकों, डाक्टरों, प्रोफेसरों आदि को हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराते हैं,ताकि उनका देश आधुनिकतम् विकास में वैश्विक स्तर पर सबसे समृद्ध और उन्नत बना रहे ।
लेकिन भारत में इसके ठीक उलट एक ऐसी निकृष्ट सोचवाले,असभ्य लोगों के एक समूह ने येनकेनप्रकारेण अपने छल-बल-पैसे-धोखे, धार्मिक व जातीय वैमनस्यता और तिकड़मबाजी तथा झूठ बोलकर यहां की केन्द्रीय और यहां के कई राज्यों की सत्ता पर कब्जा जमाने में सफल हो गए हैं,जो इस देश को पुनः 10हजार साल पहले के आदिम और पौराणिक समय के कुटिलता की पराकाष्ठा तक अधम,पशुवत जाति आधारित यथा ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्व तथा शूद्र आदि जन्म आधारित व जाति आधारित,अश्यपृश्यता, छूआछूत,ऊंच-नीच आदि तमाम नारकीय व मनुष्येत्तर जीवन जीने को अभिशापित जाति व्यवस्था को पुनर्जीवित और पुनर्प्रतिष्ठित करने को उद्यत हैं !
इस देश की सत्ता पर काबिज इन कथित उच्च जातियों लेकिन वास्तव में असामाजिक तत्वों द्वारा हिन्दू राष्ट्र बनाने की अवधारणा ही निकृष्ट सोचवाली,कुटिलतम्, भारतीय समाज और इस राष्ट्र राज्य को अबतक सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाने वाले जातिवाद का संस्थापक कुटिल मनु द्वारा हजारों साल पूर्व बनाई गई जन्म आधारित जातिप्रथा ही है ! और वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा उसी निकृष्टतम् व नारकीय जातिवादी कुव्यवस्था को पुनः प्रतिष्ठापित करना ही उसका परम् उद्देश्य हो गया है ! यह कटुसत्य और कटु यथार्थ है कि जब हिन्दू धर्म ही पूर्णतः अवैज्ञानिक,जातिवाद,ऊंच-नीच,छुआ-छूत,अकथनीय नारकीय भेदभाव, अमानवीय,व नरभक्षी जहररूपी प्रदूषित वायु से अपना सांस लेता है,तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे निकृष्ट और घटिया सोचवाले संगठन द्वारा हिन्दू राष्ट्र बनाने की परिकल्पना करना,निश्चित रूप से सबसे अमानवीय व पक्षपात आधारित जातिवादी वैमनस्यता से अभिशापित ही होगा ! इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इसके जारजपुत्र वर्तमान समय में भारत में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के इस देश को कथित हिंदू राष्ट्र बनाने के हर प्रयास का इस देश की 85प्रतिशत की विशाल जन संख्या वाले अनूसूचित जातियों,अनूसूचित जनजातियों व अन्य पिछड़े वर्ग की जातियों के विशाल व जागरूक लोगों को इसे लागू करने को आतुर इन असामाजिक तत्वों का सशक्त और संगठित होकर,पुरजोर विरोध करना ही होगा ।
निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पाखंड, अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ‘, गाजियाबाद, उप्र,