कैलाश रावत
पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष।
श्री लक्ष्मी नारायण नायक जी आजादी के लिए जेल फिर आजाद भारत में आजादी लोकतंत्र गरीब गुरबो के हक के लिए अन्याय अत्याचार सामंतवाद गैर बराबरी के खिलाफ कई बार जेल
महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समाजवादी धारा और विचारधारा महात्मा गांधी डॉक्टर राम मनोहर लोहिया समाजवाद के महान व्यक्तित्व पराधीन भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में बुंदेलखंड मैं व्याप्त सामंतवाद सामंती विचारधारा और सामंती सोच ईलाकेदारी जागीरदारी बेगारी प्रथा का विरोध कर समाज में नई चेतना लाने डर खत्म करने का हमेशा प्रयास किया सच को सच कहने का साहस दिखाया स्वतंत्र आंदोलन के दौर में श्री लक्ष्मी नारायण नायक ने अंग्रेजी हुकूमत सामंती संप्रभुता संपन्न के दौर में नायक जी ने बुंदेलखंड के साथ भारत की गुलामी तथा जनसाधारण के साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संगठित होकर आंदोलन करना प्रारंभ किया उन दिनों जिस पृष्ठभूमि से स्वर्गीय श्री लक्ष्मी नारायण नायक आते थे ऐसी हिमाकत कर पाना कल्पना से परे एक दुर्लभ कार्य था तदोपरांत जीवन पर्यंत जिन मूल्यों के लिए संघर्ष किया उसे ही अपना उद्देश्य बनाकर सारा जीवन समर्पित कर दिया विचारधाराओं की विविधता तथा मत भिन्नता असहमति अहिंसा के सम्मान जैसे प्रजातांत्रिक नेसानिग के पैरोकार तथा प्रवर्तक रहे यदि लक्ष्मी नारायण नायक जैसा महान व्यक्तित्व नहीं होता तो बुंदेलखंड किस हालत में होता इसकी कल्पना नहीं की जा सकती
सोशलिस्ट पार्टी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी जनता पार्टी से कई बार विधायक और सांसद निर्वाचित हुए दुख इस बात का है नायक जी जैसा नेता मिलना अब संभव नहीं है दैवितयमान राजनीतिक महापुरुष शुचिता की राजनीत नैतिकता ईमानदारी के पैमाने पर शायद ही मिलेगा अब यह भी मुश्किल है
सोशलिस्ट पार्टी और समाजवादी आंदोलन के श्री लक्ष्मी नारायण नायक जी राष्ट्रीय स्तर के राजनेता थे एक बार श्री लक्ष्मी नारायण नायक जी को कर्पूरी ठाकुर और राज नारायण जी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव था यह प्रस्ताव धर्म स्वरूप सक्सेना रमेश चंद शर्मा गुरु गुना के द्वारा लक्ष्मी नारायण नायक के समक्ष रखा बह अपने साथियों से चर्चा कर निर्णय लेना चाहते थे नायक जी साथियों का संकोच करते रहे इसी दरमियान पार्टी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मामा बालेश्वर दयाल जी को बना दिया गया। नायक जी को
Heavyweight politician Samajwadi andolan
कहा जाता था और वास्तव में थे जनता पार्टी की सरकार 1977 से 1980 तक लक्ष्मी नारायण नायक के मन मुताबिक चली उन्होंने जिसे चाहा विधायक का टिकट दिया है और अपनी मर्जी से मंत्री बनवाए
लक्ष्मी नारायण नायक सोशलिस्ट पार्टी समाजवादी आंदोलन के ऐसे सैनिक थे जो हर क्षण अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए तैयार रहते थे लक्ष्मी नारायण नायक में अपार सहनशक्ति थी और शक्ति के साथ साथ अदम्य साहस धैर्य और जोखिम उठाने की क्षमता डॉ राम मनोहर लोहिया जयप्रकाश नारायण के साथ रहकर उन्होंने समाजवादी विचारधारा का शगुण कार्य रूप क्या हो सकता है इसे समझा और उसे कार्यान्वित करने का दायित्व दूरदृष्टि और सत्कर्म के साथ निभाया उस समय की आवश्यकता को उन्होंने गहराई के साथ समझा चिंतन और कर्म मस्तिष्क और हाथ विचार और विचारों के साथ उसको रूपांतरित करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कसौटी हैडॉ राम मनोहर लोहिया ने इसी के साथ गांधी के साथ अहिंसा और सत्याग्रह सिविल नाफरमानी के अनुशासन को स्वीकार किया था डॉक्टर लोहिया के विचारों की कार्यशैली क्या होना चाहिए और उसको पीड़ित शोषित समाज के नितांत एकांकी एवं अद्भुदय मनुष्य तक कैसे पहुंचना चाहिए उसे लक्ष्मी नारायण नायक ने अपने कर्म से दर्शाया उन्होंने सिद्धांत को कार्य रूप में आत्मसात किया राजनीति के क्षेत्र में सैद्धांतिक बहसऔर कठिन संघर्ष के साथ अपने विचारों पर टिके रहे कर्म और समर्पित भाव के एकमात्र प्रमाण लक्ष्मी नारायण नायक थे
1957 से 1977 तक के समाजवादी आंदोलन की कर्मठ कार्यकर्ता एवं जनमानस के मर्म के ज्ञाता लक्ष्मी नारायण नायक को हमेशा याद किया जाएगा डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारों की अकैडेमिक व्याख्या भविष्य में भी होती रहेगी किंतु उनके विचारों के आधार पर कर्म की रूपरेखा जब भी बनाई जाएगी तो उसमें लक्ष्मी नारायण नायक का नाम सर्वोपरि रहेगा नायक जी ने हर मोर्चे पर समाजवादी विचारधारा के अनुसार संघर्ष किया आंदोलन की मध्य प्रदेश ही नहीं पूरे भारत में आंदोलन चलाए शामिल हुए संवैधानिक अधिकारों के लिए जिस प्रकार मध्यप्रदेश विधानसभा लोकसभा में लोक मानस का प्रतिनिधित्व किया वह भारत के जनतांत्रिक इतिहास में महत्वपूर्ण पृष्ठ है
लक्ष्मी नारायण नायक में बुद्धि और कर्म दोनों का समुचित योग था उनका कर्म पक्ष इतना प्रबल था कि बौद्धिक विवेचन तथा विश्लेषण की बारीकियां उनके सामने टिकने में असमर्थ हो जाती थी इस अर्थ में नायक जी की छवि ईमानदार जुझारू व्यक्ति के रूप में मील का पत्थर है उन्होंने इसकी चिंता कभी नहीं की कि मुद्दा बड़ा है या छोटा उससे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा बनेगी या बिगड़ेगी छोटे से छोटे मुद्दे को भी उतना महत्वपूर्ण समझा जितना कि बड़े से बड़े मुद्दे को उनके आंदोलन का मुख्य उद्देश्य समाज में जागृति पैदा करना था इसमें संदेह नहीं लक्ष्मी नारायण नायकजी ने अपने आंदोलनकारी चरित्र और संघर्ष से समाजवादी पार्टी समाजवादी आंदोलन की इतनी शुद्रण नीव बुंदेलखंड में डाल दी थी चाहे जितनी विरोधी शक्तियां लग जाए बे उसे मिटा नहीं सकते थे बुंदेलखंड में जनजागृति आमजन की आजादी मैं लक्ष्मी नारायण नायक की दूरदृष्टि और उनके उत्कर्ष द्वारा स्थापित जन चेतना का बहुत बड़ा हाथ है लोकजीवन और लोकहित के लिए उनकी अनवरत संघर्ष चिंता के प्रति जनमानस की कृतज्ञता थी 1977 के लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में सर्वाधिक मतों से खजुराहो संसदीय क्षेत्र से जीते लक्ष्मी नारायण नायक अपनी संघर्ष और लोकप्रियता के आधार पर विजई होकर निकले तो भारत में ही नहीं अंतरराष्ट्रीय प महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में चर्चित हो गए चिंतन कर्म क्षेत्र में रूपायित आने वाले प्रथम पुरुष थे उनकी कथनी करनी में अंतर नहीं था जनतंत्र लोकतंत्र के लोकत्व के मर्मज्ञ थे लक्ष्मी नारायण नायक समाजवादी दृष्टि कोई किताबी दृष्टि नहीं थी दिन पर दिन समाजवादी आंदोलन के साथ जोड़कर उनका व्यक्तित्व भारतीय जनमानस का केंद्र बिंदु बन चुका था लक्ष्मी नारायण नायक जहां खड़े होते थे वहीं से समाजवादी आंदोलन का क्रांतिकारी कार्यक्रम शुरू हो जाता था बुंदेलखंड की ग्रामीण जनता के प्रतिनिधि होने के नाते उसे भारतीय जनमानस तक पहुंचाने में सफल भूमिका अदा करते थेराजनीतिक आंदोलन में ऐसे व्यक्ति बहुत कम है जिन्होंने भारतीय राजनीति में नए सिद्धांतों का योगदान किया अपने चरित्र और कर्मठता के आधार पर जनमानस को हमेशा आंदोलित किया
स्वतंत्रता आंदोलन गोवा मुक्ति आंदोलन के नेता पूर्व सांसद श्री लक्ष्मी नारायण नायक ने जीवन पर्यंत अंधेरी कोठरी में गरीबों के घरों के लिए रोशनदान की तरह उजाले की उम्मीद जगाते रहे अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति शोजन्नयता और सद्भाभाव का व्यवहार उनकी विशेषता थी ना किसी विरोधी का मजाक उड़ाया और अपमानित करने का तो सवाल ही नहीं उठता है मध्य प्रदेश की राजनीति के आधार स्तंभ राजनीति में पारदर्शिता ईमानदारी के जो प्रतिमान स्थापित किए वह एक मिसाल है नायक जी के लिए राजनीति सेवा का माध्यम मिशन राज और समाज बदलने का माध्यम
स्वर्गीय श्री लक्ष्मी नारायण नायक का सारा जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण चुनौतियों से जूझने में बीता दोनों पुत्रों का असामयिक निधन परम पूजनीय चाचा जी भगवती देवी का निधन परिवारिक त्रासदी से जुड़ी विकट समस्याओं के बाद उन्होंने समाज सेवा और सिद्धांत से कभी समझौता नहीं किया अपने उन्हीं मूल्यों को पोषित करने के कारण बड़ी कीमत चुकानी पड़ी
सम्मानीय श्री लक्ष्मी नारायण नायक से हमारे अत्यंत नजदीकी और परिवारिक संबंध रहे मेरे पिताश्री स्वर्गीय श्री राम प्रसाद रावत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बाल सखा सहपाठी और स्वतंत्रता आंदोलन के सहयोगी राजशाही जमाने में ग्राम मडिया में कोई शासकीय विद्यालय नहीं था पूर्व सांसद लक्ष्मी नारायण नायक के जेष्ठ भ्राता पंडित जी श्री कमलापत नायक मडिया में राम प्रसाद रावत के निवास पर रहकर बच्चों को पढ़ाया करते थे इसी कारण नायक जी का मेरे घर रहना आना जाना और राजनीतिक समाजवादी गतिविधियों का केंद्र मेरा घर ग्राम मडिया था 1980 में लोकदल प्रत्याशी के रूप में परम पूज्यनीय बड़े भाई श्री गया प्रसाद रावत जी ने श्री लक्ष्मी नारायण नायक के खिलाफ खजुराहो संसदीय क्षेत्र से लोक दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा राजनीतिक मतभेद के बाद हमारे परिवारिक संबंध हमेशा कायम रहे नायक जी पिता तुल्य और हमारे आदर्श
नायक जी ने शोषित पीड़ित गरीब किसान मजदूर और सर्वहारा वर्ग के लिए सदैव संघर्ष किया चार बार विधायक खजुराहो संसदीय क्षेत्र से सांसद मध्यप्रदेश विधानसभा में सोशलिस्ट पार्टी विधायक दल के नेता सोशलिस्ट पार्टी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे 1977 में जनता पार्टी सरकार के दौरान मध्य प्रदेश की सत्ता की चाबी नायक जी के हाथ में थी जैसा चाहा वैसी मध्य प्रदेश की सरकार चली मंत्री बनाना और हटाना नायक जी के परामर्श से होता था मोहनदास करमचंद गांधी के बाद श्री लक्ष्मी नारायण नायक ही ऐसी हठयोगी राजनेता थे जो ठान लिया कल के दिखाया ललितपुर सिंगरौली रेल लाइन टीकमगढ़ में लाने का श्रेय नायक जी को जाता है उन्हीं के सतत प्रयास और जिद से यह संभव हो सका
महान समाजवादी नेता और चिंतक विचारक लक्ष्मी नारायण नायक का सपना था हर खेत को पानी हर हाथ को काम इस उद्देश्य के लिए उन्होंने टीकमगढ़ निवाड़ी जिले में बहुउद्देशीय सरसोरा जल विद्युत बांध बनवाने का प्रयास किया नायक जी का प्रयास सफल भी हो जाता बांध बध भी बन गया होता दुर्भाग्य से जनता पार्टी की सरकार चली गई
बुंदेलखंड निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर जिला में विकास कार्य नायक जी के कार्यकाल में हुए बुंदेलखंड वासी सदियों तक याद रखेंगे
लक्ष्मी नारायण नायक की राजनीतिक में विराम 1980 के खजुराहो लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद लग गया था लेकिन निरंतर सक्रियता सत्कर्म कर्मठता जन आंदोलन विधानसभा लोकसभा चुनाव लड़ते रहना जब तब अपने बयानों राजनीतिक संघर्ष के कारण स्थानीय राजनीति में गर्मी लाते रहे
नायक जी कहा करते थे किसी के खत्म करने से कोई खत्म नहीं होता है आदमी संगठन संस्था और पार्टी सब अपने अपने कर्मों से नष्ट श्रीहीन होते हैं
राजनीति में ना कोई किसी का गुरु ना चेला सबके अपने अपने विचार और प्रारब्ध होते हैं
सोशलिस्ट विचारधारा के आधार स्तंभ शिखर व्यक्तित्व पिता तुल्य परम पूज्य लक्ष्मी नारायण नायक का 103 वर्ष की उम्र में 30 नवंबर 2019 को निवाड़ी में देवलोक गमन हुआ छोटे से गांव साधारण परिवार से श्री लक्ष्मी नारायण नायक ने त्याग तपस्या जुझारू पन संघर्ष सतत संपर्क से देश और मध्य प्रदेश की राजनीति में अपना साम्राज्य स्थापित किया लाल टोपी नायक जी के पहचान रही
ग्राम मडिया जिला निवाड़ी मध्य प्रदेश 4722338
7999606143
9826665847

