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इंटरनेट के फैलाव ने बहुत सी निहायत निजी चीजों को सार्वजनिक कर दिया?

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मुकुल श्रीवास्तव
जून 2020 में टिक टॉक बैन होने के बाद शॉर्ट वीडियो की दुनिया लंबा रास्ता तय कर चुकी है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक तो हैं ही, एमएक्स, मौज, जोश, चिंगारी, मित्रों जैसे ऐप भी इस दुनिया में तहलका मचाए हुए हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जिस तरह से फेक न्यूज और आरोप-प्रत्यारोपों की बाढ़ आ गई थी, इसके यूजर विकल्प की तलाश में थे। इसी विकल्प की भरपाई रील्स कर रही हैं।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता इंटरनेट यूजर बेस को होस्ट करने वाला देश है। यहां फिल्में, उनके डायलॉग और म्यूजिक हमारे जीवन में इस हद तक घुसे हुए हैं कि उसके बगैर जीवन की कल्पना करना मुश्किल है। हर कोई कैमरे के सामने सिलेब्रिटी बनना चाहता है, जिसका रास्ता रील्स की कुछ इस तरह से बढ़ती दुनिया बना रही है-

विवादों की रील
लेकिन कुछ सवाल ऐसे भी हैं जिनके जवाब अभी खोजे जाने हैं।

समय की बर्बादी
इंटरनेट के फैलाव ने बहुत सी निहायत निजी चीजों को सार्वजनिक कर दिया है। ऐसे में हम उन असामान्य घटनाओं को भी सार्वजनिक जीवन का हिस्सा मान लेते हैं, जिनसे एक परपीड़क समाज का जन्म होता है। शायद यही वजह है कि अब दुर्घटना होने पर लोग मदद की बजाय वीडियो बनाने में लग जाते हैं कि उससे वायरल हो जाएंगे। और अंत में सबसे बड़ा मुद्दा रील देखने में समय की बर्बादी का है, जिसमें दर्शक कोल्हू के बैल की तरह चलता तो बहुत है पर पहुंचता कहीं नहीं। इंटरनेट की दुनिया में बिखरी हुई रील्स में फूहड़ चुटकुले, दूसरों को तंग करने वाले मजाक का ज्यादा बोलबाला है। हो सकता है, आने वाले वक्त में जैसे-जैसे इन रील्स के दर्शक समझदार होते जाएं, इनका कंटेंट भी बेहतर होता जाए।

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