जयपुर
राजस्थान के अजमेर में हुए देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल पर वेब सीरीज बनने जा रही है। ‘अजमेर फाइल्स’ नाम से बनने वाली इस वेब सीरीज में उन मासूम लड़कियों के दर्द को दिखाया जाएगा, जिनके साथ रेप हुआ। अश्लील फोटो खींचे। लड़कियों को ब्लैकमेल करके उनके साथ हैवानियत की गई।
वेब सीरीज सितंबर-अक्टूबर में रिलीज होगी। वेब सीरीज को टिप्स की ओर से बनाया जा रहा है। इसके निर्देशक अभिषेक दुधैया है। अभिषेक इससे पहले 2021 में भुज-दी प्राइड ऑफ इंडिया बना चुके हैं, जिसमें अजय देवगन, संजय दत्त, शरद केलकर और सोनाक्षी सिन्हा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।
पहले जान लें क्या हुआ था
साल 1992, अप्रैल-मई का महीना था। अजमेर के एक नामी गर्ल्स कॉलेज की हाई प्रोफाइल स्टूडेंट्स की न्यूड तस्वीरें अचानक से शहर में सर्कुलेट होनी शुरू हुईं थीं। एक-दो नहीं, बल्कि 100 से ज्यादा छात्राओं की तस्वीरें थीं। ब्लैकमेलिंग का ऐसा सेक्स स्कैंडल, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। ट्रैप की शिकार लड़कियां मामूली नहीं, रसूखदार घरों से थीं। अपराधियों की भी बड़ी सियासी पहुंच थी।
अजमेर शहर नब्बे के दशक में अश्लील फोटो ब्लैकमेल कांड से बदनाम हो गया था। अब उस मुद्दे पर बनने वाली वेब सीरीज चुनावी साल में सबका ध्यान खींच सकती है।
मुंबई से निर्देशक अभिषेक दुधैया ने विशेष बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल- क्या आप अजमेर के चर्चित अश्लील फोटो ब्लैकमेल कांड पर फिल्म बना रहे हैं ?
अभिषेक- जी हां, यह एक वेब सीरीज है, जिसे हम ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज करेंगे। हम टिप्स वालों के साथ इसे बना रहे हैं। टिप्स के कुमार तोरानी के साथ यह मेरा पहला प्रोजेक्ट है। इसका नाम अजमेर फाइल्स अनाउंस किया गया है।
वेब सीरीज भी फिल्म की ही तरह होती है, लेकिन टेक्निकली फिल्म और वेब सीरीज दोनों अलग-अलग कही जाती है। आजकल बहुत सी वेब सीरीज बन रही है, जो दर्शकों में बहुत पॉपुलर भी हो रही हैं जैसे दिल्ली क्राइम, सेक्रेड गेम्स, फैमिली मेन आदि।
सवाल- यह नाम कश्मीर फाइल्स की तरह लग रहा है। फिल्म का नाम अजमेर फाइल्स ही रखा है और विषय भी उसी तरह का संवेदनशील है ?
अभिषेक- बहुत से शीर्षक विचार प्रक्रिया में सामने आए थे। उनमें से इस नाम को चुना गया है। चूंकि जिस शहर में यह कांड हुआ था उसके नाम से ही यह नाम निकला है।
सवाल- कश्मीर फाइल्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हुई। देश के राजनीतिक-सामाजिक सर्किल में उस फिल्म की बहुत चर्चा रही। क्या उम्मीद है अजमेर फाइल्स से ?
अभिषेक- अजमेर ब्लैकमेल कांड भी मानवता को हिला देने वाला कांड था। हमें उम्मीद है कि लोगों को फिल्म के जरिए उस कांड की भयावहता की जानकारी मिल सकेगी।
अजमेर फाइल्स की घोषणा निर्देशक अभिषेक दुधैया ने कर दी है। अजमेर फाइल्स के बारे में निर्देशक ने भास्कर के साथ साझा की हैं अपनी भावनाएं।
सवाल- क्या इस वेब सीरीज को बनाने से पहले आवश्यक लीगल और प्रशासनिक अनुमति आपने ले ली है ?
अभिषेक- हां, इस तरह की सभी अनुमति और राइट्स लेने के बाद ही हम प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहे हैं।
सवाल- यह कब तक रिलीज होगी, सुना है सितंबर-अक्टूबर (2023) तक आप इसको रिलीज करना चाह रहे हैं ?
अभिषेक- हां, हमारी कोशिश यही है कि सितंबर-अक्टूबर तक आ जाए।
सवाल- अजमेर ब्लैकमेल कांड धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बेहद संवेदनशील रहा है। राजस्थान में दिसंबर में विधानसभा चुनाव है। ऐसे में चुनावों से ठीक पहले इस फिल्म के आने से कोई राजनीतिक विवाद तो नहीं होगा ?
अभिषेक- कोई भी विवाद क्यों होगा? हमने केवल वही फैक्ट, संवाद और विषय लिया है, जो पुलिस की जांच और न्यायालय के निर्णयों में दर्ज है। जो चीज ऑन रिकॉर्ड है, उनके बारे में कैसे कोई विवाद होगा।
जिनके साथ यह घिनौना कांड किया गया था क्या उनकी पीड़ा आम लोगों तक नहीं पहुंचनी चाहिए।
सवाल- क्या फिल्म की शूटिंग राजस्थान में भी होगी ?
अभिषेक- हां, हम कोशिश कर रहे हैं कि अजमेर में ही शूटिंग करे।
सवाल- क्या राजस्थान के कलाकारों को भी इस फिल्म में भूमिका मिलेगी ?
अभिषेक- राजस्थान के कुछ कलाकारों को जरूर हम इस में ले रहे हैं।
सवाल- अजमेर फाइल्स में और कौन-कौन से अभिनेता काम कर रहे हैं ?
अभिषेक- अभी इस बारे में अलग-अलग चरणों में घोषणाएं होंगी। अभी एक साथ सारी घोषणाएं नहीं की जा सकती।
सवाल- आप परमवीर चक्र विजेता कैप्टन सरदार बाना सिंह पर भी कोई बायोपिक बना रहे हैं ?
अभिषेक- हां, उस बायोपिक पर काम चल रहा है। कहानी तैयार हो गई है।
भुज दी प्राइड ऑफ इंडिया की शूटिंग के दौरान अभिनेता अजय देवगन के साथ फिल्म के निर्देशक अभिषेक दुधैया।
सवाल- पहले आप ने भारत-पाकिस्तान युद्द आधारित भुज-दी प्राइड ऑफ इंडिया नामक फिल्म बनाई थी। परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बाना सिंह पर भी फिल्म लाने वाले हैं। आपकी फिल्मों के विषय यह दर्शाते हैं कि आपकी विचारधारा देश प्रेम आधारित है ?
अभिषेक- मेरी विचारधारा देश प्रेम से संचालित है। किसी पार्टी विशेष से मेरा संबंध नहीं है, लेकिन जहां भी देशहित की कोई बात आती है, तो मेरा दिल उससे स्वत: ही जुड़ जाता है।
सवाल- आपका ज्यादातर फोकस सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्म बनाने पर रहता है। क्या कारण हैं ? जैसे भुज-दी प्राइड ऑफ इंडिया में कच्छ (गुजरात) के एक गांव की महिलाओं द्वारा भारतीय वायु सेना के लिए रातों-रात हवाई पट्टी तैयार करने की कहानी हो या कैप्टन बाना सिंह की जीवनी ?
अभिषेक- फिल्म कहानी कहने की एक कला है। सत्य घटनाओं में बहुत सी चीजें छुपी हुई हैं। बहुत सी प्रेरक और जोशीली कहानियां हैं। उन्हें फिल्म के माध्यम से कहना, बताना, दर्शाना एक रोमांचक काम है। दर्शकों को भी सत्य घटनाओं पर आधारित कहानी अक्सर पसंद भी आती हैं, क्योंकि उनमें बनावटीपन नहीं होता।
सवाल- आपके माध्यम से और भी देश प्रेम आधारित प्रोजेक्ट्स देखने को मिलेंगे ?
अभिषेक- भारतीय इतिहास की बहुत सी ऐसी गौरवपूर्ण कहानियों पर हमारा काम चल रहा है।
पीड़िताओं का दर्द आज भी जिंदा है। अजमेर फाइल्स के जरिए उनका दर्द अब आम लोग भी जान सकेंगे।
सरकार भाजपा की थी और कांग्रेस के पदाधिकारी पकड़े गए थे
अजमेर अश्लील फोटो ब्लैकमेल कांड के समय राजस्थान में सरकार भाजपा की थी और मुख्यमंत्री थे भैरोंसिंह शेखावत। इस कांड का मास्टर माइंड फारुख चिश्ती था, जो अजमेर शहर यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष था।
उसके सहित उसके बहुत से दोस्त और कांग्रेस पार्टी के कई पदाधिकारी भी इस कांड में लिप्त थे। कांड की शुरुआत कुछ ऐसे हुई थी कि आरोपियों ने एक बिजनेसमैन के लड़के से दोस्ती गांठ कर उसका यौन शोषण किया और फोटो खींचे।
उन फोटो के जरिए उसे ब्लैकमेल कर उसकी गर्लफ्रेंड को बुलाया गया। फिर उसका यौन शोषण कर फोटो खींचे गए और फिर उसे ब्लैकमेल कर उसकी फ्रेंड को बुलाया जाने लगा। इसके बाद जो भी लड़की आती उसका यौन शोषण कर उसकी आपत्तिजनक फोटो खींच कर उसकी किसी सहेली को बुलाया जाता।
फिर उसके साथ भी वही खौफनाक सिलसिला आगे बढ़ाया जाता। शहर के नामचीन परिवारों की लड़कियों को फंसा कर उनका यौन शोषण कर उनकी फोटो खींचे गए। जिन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर एक लड़की को दूसरी लड़की (सहेली, बहन या रिश्तेदार) को पार्टी आदि के बहाने कहीं पर बुलाया जाता था।
फिर उसका यौन शोषण कर फोटो खींच अन्य लड़कियों को बुलाया जाता था। इस तरह से यह चेन आगे से आगे चलती जाती थी। अंत में ब्लैकमेल से परेशान होकर कुछ लड़कियों ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया, तब इस कांड की परतें खुलनी शुरू हुईं।
दोषियों को उम्र कैद की सजा मिल सकी। इस कांड में पीड़ित रही बहुत सी लड़कियों ने तो पुलिस में जाने की हिम्मत भी नहीं दिखाई थी। कुछ लड़कियों के हिम्मत दिखाने के बाद उन्हीं की पीड़ा को सभी पीड़िताओं की पीड़ा मानकर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी थी।
अजमेर फाइल्स वेब सीरीज में जयपुर के डॉ. जितेंद्र शर्मा रिसर्च का काम कर रहे हैं।
जयपुर के डॉ. जितेंद्र शर्मा कर रहे हैं अजमेर फाइल्स की रिसर्च में मदद
जयपुर के डॉ. जितेंद्र शर्मा अजमेर फाइल्स वेब सीरीज बनाने वाले निर्देशक अभिषेक दुधैया से जुड़े हुए हैं। वे फिल्म की रिसर्च, कहानी लेखन, लीगल डॉक्यूमेंटेशन, शूटिंग प्लान आदि में मदद कर रहे हैं।
जितेंद्र राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के छात्र रहे हैं। संगीत विषय में उन्हें पीएचडी की उपाधि प्राप्त है। डॉ. जितेंद्र शुभ विचार नामक एक संस्था भी चलाते हैं। डॉ. जितेंद्र ने भास्कर को बताया कि अभिषेक दुधैया एक समर्पित फिल्मकार हैं और उनकी पिछली फिल्म भुज-दी प्राइड ऑफ इंडिया देखकर उनकी विचार प्रक्रिया को समझा जा सकता है।
वो फिल्म हिट रही थी और उसका एक गाना ओ देस मेरे तेरी शान से बढ़कर…तो पूरे देश में अब तक हर उस अवसर पर बजाया जाता है, जहां राष्ट्रभक्ति की बात हो रही हो।
अब भी पीड़िताएं झेल रही बदनामी का दंश
ब्लैकमेल कांड में जो आरोपी फरार हुए थे। वे अब तक पकड़े जा रहे हैं। ऐसे में जब भी कोई आरोपी पकड़ा जाता है, तो उसकी शिनाख्त और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस की ओर से पीड़िताओं को बुलाया जाता है।
जिस वक्त यह कांड हुआ था तब ज्यादातर पीड़िताओं की उम्र 16 से 22 साल के बीच थी। अब उनमें से ज्यादातर अपने परिवार में व्यस्त हैं। वे नानी-दादी तक बन चुकी हैं। परिवार में उनकी बहू-बेटियां, दामाद, भाई, भतीजे, पिता, पति सभी हैं। ऐसे में उन्हें फिर से उस दर्दनाक हादसे के लिए जब बुलाया जाता है, तो उनके जख्म फिर से हरे हो जाते हैं।
फोटो लीक होकर बहुत से लोगों तक पहुंचने लगी थी
जब ब्लैकमेल कांड हुआ तो उसमें आरोपियों द्वारा खींचे गए फोटो धीरे-धीरे लीक होकर बहुत से लोगों तक पहुंच गए। जिनके पास फोटो पहुंचे, उनमें से भी कुछ लोगों ने उन लड़कियों को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और यह सिलसिला आगे से आगे बढ़ता रहा।
उस दौर में फोटोग्राफी की तकनीक बहुत विकसित नहीं थी तो नेगेटिव से फोटो बनाने का काम शहर की जिस कलर लैब में होता था, उसकी भूमिका भी संदिग्ध रही थी।
कश्मीर फाइल्स की तरह ही चुनावी साल में देश में राजनीतिक माहौल गरमा सकती है अजमेर फाइल्स
पिछले साल की चर्चित फिल्म कश्मीर फाइल्स ने देश और विदेश में लोगों का खूब ध्यान खींचा है। तारीफ और आलोचना भी उस फिल्म के हिस्से में आई हैं। दोनों मामले भी लगभग एक ही दौर 1990-1992 के आस-पास के हैं।
राजस्थान में दिसंबर-2023 में चुनाव है और फिर लोकसभा चुनाव संभावित है। ऐसे में सितंबर-अक्टूबर तक इस वेब सीरीज के आने पर चुनावों में यह मुद्दा राजनीतिक-सामाजिक तापमान को गर्म कर सकता है।
वेब सीरीज की शूटिंग अजमेर में होने और फिल्म का नाम अजमेर फाइल्स होने से राजस्थान के लोगों का इस पर ध्यान जाना स्वाभाविक ही है। राजस्थान में आज भी घर-घर में लोग इस कांड की दहशत से परिचित हैं। इंटरनेट पर आज भी इस ब्लैकमेल कांड की सारी जानकारी, खबरें, तहकीकात, कानूनी कार्रवाई, घटनाएं आदि दर्ज हैं।

