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सनातन हिन्दू धर्म को खतरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अधिक है

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राजेन्द्र चतुर्वेदी 

सनातन हिन्दू धर्म को खतरा ईसाई, मुसलमानों, सिखों, बौद्धों से न के बराबर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बहुत अधिक है।

उपरोक्त विचार किसी कांग्रेसी, वामपंथी, अम्बेडकरवादी, पेरियारवादी या मौलाना, पादरी, भंते, रागी के नहीं, बल्कि वर्तमान दौर के सबसे बड़े सन्त करपात्री जी के हैं।

करपात्री महाराज ने शंकराचार्य परम्परा को नया ओज दिया, तेज दिया, सनातन धर्म की कोई भी परम्परा ऐसी नहीं है, जिस पर करपात्री महाराज का प्रभाव न पड़ा हो, इसलिए उन्हें धर्म सम्राट कहा जाता है।

वह धर्म सम्राट करपात्री महाराज ही थे, जिन्होंने आरएसएस के हिन्दू राष्ट्र के सपने को खतरनाक बताया था, और कहा था कि रावण की लंका और कंस की मथुरा, ये दोनों हिन्दू राष्ट्र ही तो थे, लेकिन उनमें कोई सुखी नहीं था, सब दुखी थे।

धर्म सम्राट राम राज्य की स्थापना के पक्षधर थे। उन्होंने कहा था, भारत के लिए रामराज्य ही आदर्श है। यह अलग बात है कि स्वयं को धर्म सम्राट का शिष्य कहने वाला एक फर्जी शंकराचार्य आज स्वयं हिन्दू राष्ट्र की बांग लगाता धूम रहा है। खैर…। 

यहां बात किसी फर्जी शंकराचार्य की हरकत पर नहीं की जा रही है, प्रार्थी धर्म सम्राट की दूरदर्शिता की तरफ मित्रों का ध्यान दिलाना चाहता है।

धर्म सम्राट ने आरएसएस को ठीक ही सबसे बड़ा खतरा बताया था, क्योंकि हम देख सकते हैं कि जब से सत्ता की ताकत इस संगठन के शरीर में पहुंची है, तब से ये हिन्दू सनातन धर्म के मान बिन्दुओं को खत्म करने के लिए ओवर टाइम कर रहा है।

काशी में सैकड़ों मंदिर मड़ियाँ तोड़ दी गईं, विग्रह तोड़ दिए गए और काशी कॉरिडोर बनाकर मंदिर के संचालन का जिम्मा ब्रिटेन की एक कम्पनी को दे दिया गया।

उज्जैन में महाकाल लोक बना दिया गया। इसके लिए वे सभी गोह, खोह, गुफाएं, मड़ियाँ ध्वस्त कर दी गईं, जहां बैठकर तांत्रिक मांत्रिक तपस्या किया करते थे।

अयोध्या में खतरनाक तरीके से ध्वस्तीकरण जारी है।

सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में मां का दर्जा प्राप्त देव नदी, दिव्य नदी गंगा में क्रूज उतार दिया गया है। अब गंगा की पवित्र लहरों में विलासिता अठखेलियाँ करेगी।

भगवा रंग की बिकिनी पर उपद्रव मचाने वाले जिंदा हैं या राम कूं प्यारे हो गए? 

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