इज़राइल और हमास के बीच छिड़ चुके अनेक युद्धों की अगली कड़ी के रूप में छिड़े नए युद्ध में आरएसएस/भाजपा परिवार, अपनी पूर्व निर्धारित,मुस्लिमद्रोही मान्यता के मुताबिक, खुलकर इज़राइल के पक्ष में और फिलिस्तीन के विरोध में खड़ा हो गया है।
नरेन्द्र मोदी जब भारत के प्रधानमंत्री की हैसियत से, सार्वजनिक रूप से इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद में इज़राइल का समर्थन करते हैं तो दुनिया में इसे भारत की बुद्ध ,महावीरऔर गांधी विरोधी हिंसक मान्यता के, भारत विरोधी स्वर के रूप में ही देखा, सुना और समझा जाएगा।
दिनकर जी ने तो, सालों पहले भारत को परिभाषित करते हुए लिख दिया था कि,
उठे जहां भी घोष शांति का, भारत!स्वर तेरा है।
धर्म दीप हो जिसके भी कर में, वह नर तेरा है!
तेरा है वह वीर, सत्य पर जो अड़ने जाता है।
किसी न्याय के लिए प्राण अर्पित करने जाता है।
मानवता के इस ललाट चंदन को नमन करूँ मैं।
मेरे प्यारे देश, देह या मन को नमन करूँ मैं?
किसको नमन करूँ मैं भारत?किसको नमन करूँ मैं?
और अब ,इस परिप्रेक्ष्य में पढ़िये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का ये अधिकृत बयान, जिसमें कांग्रेस कह रही है कि:-
” भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इसराइल के निर्दोष नागरिकों पर हुए हमलों की कड़ी शब्दों में निंदा करती है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सदैव मानना रहा है कि आत्म सम्मान, समानता और गरिमा के जीवन के लिए फ़लस्तीनी लोगों की वैध आकांक्षाओं को इसराइल के वैध राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को सुनिश्चित करते हुए केवल बातचीत की प्रक्रिया के माध्यम से पूरा किया जाना चाहिए. किसी भी प्रकार की हिंसा कभी भी कोई
समाधान नहीं दे सकती है और इसे रोकना चाहिए.”
अब देशवासियों को ये तय करना है कि भारत के शास्वत स्वर को कौन अभिव्यक्त कर रहा है?
–विनोद कोचर

