दुनियाभर में इस वक्त जो इलाका सबसे ज्यादा चर्चा में है, वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. इसका नाम सिर्फ रणनीति, तेल-गैस और टैंकरों-जहाजों पर हो रहे हमलों के लिए आ रहा है लेकिन इस जगह को अगर किसी ने कभी करीब से देखा, तो भूल नहीं पाएगा. कुदरत ने मानो चुन-चुनकर रंग भरे हैं और एक खूबसूरत तस्वीर तैयार की है. युद्ध के शोले, बारूदी गंद और काले धुएं के गुबार में मानो ये सब खो चुका है और बाकी रह गई सिर्फ होर्मुज की बदरंग तस्वीर. चलिए आपको बताते हैं कि ये जगह सिर्फ यही नहीं इससे अलग भी बहुत कुछ है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ तेल-गैस के टैंकर जाने का रास्ता नहीं है बल्कि ये सुंदर सा एक गांव भी है. ओमान के मसंदम प्रांत में बसा कुम्जार गांव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बिल्कुल ऊपर से नजर आता है. ड्रोन तस्वीर में दिखता है -नीला समंदर, ऊंचे पहाड़ और छोटे-छोटे घरों का क्लस्टर, जैसे कोई स्वर्ग का टुकड़ा यहां रखा हो.
यही गांव दुनिया की एकमात्र जगह है जहां कुम्जारी भाषा बोली जाती है. ये अपनी तरह की भाषा है, जिसमें फारसी, अरबी, हिन्दी और पुर्तगाली का अनोखा मिश्रण है. ड्रोन व्यू में गांव की शांति देखकर लगता है कि भाषा की यह विविधता प्रकृति की विविधता से मैच करती है.
ईरान के किनारे और बंदर अब्बास पोर्ट का एरियल व्यू देखेंगे, तो दिल थाम लेंगे. सुनहरी रेत, नीला-हरा पानी और आधुनिक बंदरगाह का मिश्रण, तो दूसरी तरफ रेगिस्तानी पहाड़, दूसरी तरफ खाड़ी का चमकता पानी. ये खूबसूरती देखने के लिए है, भला लड़ने और मिसाइलें दागने की जगह है क्या?
क्लैरेंस स्ट्रेट के जरिये अलग हुआ केश्म द्वीप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सबसे बड़ा रत्न है. ये एरियल तस्वीर में दिखता है, तो लंबा-चौड़ा द्वीप,
एक तरफ ओमान के ऊबड़-खाबड़ मसंदम पहाड़, दूसरी तरफ ईरान के सपाट लेकिन रंगीन तट. स्ट्रेट इन दोनों को जोड़ता भी है और अलग भी करता है, यही इसकी सबसे बड़ी भौगोलिक खासियत है.
ड्रोन तस्वीरों में स्ट्रेट का पानी कभी गहरा नीला, कभी हरा-फिरोजी और कभी चांदी जैसा चमकता दिखता है. सूरज की रोशनी पड़ते ही पूरा होर्मुज हीरा-मोती बिखेर देता है. इस जगह को सिर्फ समुद्री संपदा के लिए याद किया जाए, तो इसके साथ अन्याय होगा, ये कुदरत का करिश्मा है
कुम्जार से लेकर केश्म तक और बंदर अब्बास तक,स एक ही ड्रोन शॉट में तीन अलग-अलग क्षेत्रों की खूबसूरती एक साथ नजर आती है. इतनी विविधता शायद दुनिया के किसी और चोकपॉइंट में नहीं मिलती. आज भी यहां सड़क नहीं है, सिर्फ नाव से ही जा सकते हैं.
कुम्जार के मछुआरे, बंदर अब्बास का व्यस्त पोर्ट और केश्म के शांत मैंग्रोव, तीनों एक ही स्ट्रेट के किनारे बसे हैं, फिर भी प्रकृति की शांति बरकरार है, जैसे युद्ध की खबरें यहां तक नहीं पहुंचतीं. हालांकि इस बार युद्ध की चिंगारी केश्म तक भी पहुंची.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ तेल का रास्ता नहीं, बल्कि एक जीवंत भौगोलिक तस्वीर है. यहां पहाड़ समंदर से मिलते हैं, द्वीप मुख्य भूमि से अलग होते हैं और भाषाएं भी नई-नई पैदा होती हैं.
आजकल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात सिर्फ टैंकर और तनाव से की जाती है, लेकिन कुम्जार, बंदर अब्बास और केश्म की ये ड्रोन तस्वीरें याद दिलाती हैं – यह जगह कितनी खूबसूरत, कितनी विविधता से भरी हुई और कितनी जादुई है. शायद यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है.