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जगत का कल्याण समाजवादी कल्याणकारी सोच और नीतियों से ही

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मुनेश त्यागी 

       पिछले लगभग तीस साल से हम देख रहे हैं कि दुनिया के पश्चिम के पूंजीवादी देश, पूरी दुनिया पर अपनी नीतियां थोप रहे हैं, अपनी लुटेरी सभ्यता और संस्कृति दुनिया के ऊपर थोपना चाहते हैं। वे पूरी दुनिया को अपनी लूट के तरीकों से चलाना चाहते हैं। पिछले तीस साल का इतिहास बता रहा है कि पश्चिमी देश आजादी, स्वतंत्र चुनाव, समता, समानता, बराबरी, भाईचारे और समाजवादी विचारधारा में विश्वास नहीं करते। वे हकीकत में इन सर्वमान्य और जनकल्याणकारी विचारों के सबसे बड़े विरोधी और शत्रु बनकर उभरे हैं। वे पूरी दुनिया पर पूंजीवादी लुटेरी व्यवस्था थोपना चाहते हैं और पूरी दुनिया को अपनी लूट स्थली बनाकर उसको लूटना चाहते हैं और चंद पूंजीपतियों को मालामाल करना चाहते हैं। पूरा अमेरिका, नाटो के देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाऐं,,,आईएमएफ, डब्ल्यूटीओ, विश्व बैंक, इन्हीं नीतियों को पूरी दुनिया पर थोप रहे हैं और थोपना चाहते हैं।

      पश्चिम की यह विचारधारा और सोच यानी पूंजीवाद की यह शोषणकारी और प्रभुत्वकारी मुहीम सबको अपने आगोश में लेना चाहती है। अब इस दुनिया में न्यायिक, सर्वहितकारी और समाजवादी वैश्विक व्यवस्था और पश्चिम के स्वेच्छाचारी प्रभुत्व की नीतियों के बीच संघर्ष जारी रहेगा, यही पूरी दुनिया का सबसे बड़ा विवाद बिंदु बनने जा रहा है। प्रभुत्वकारी पूंजीवादी, आक्रामक और युद्धोन्मादी पश्चिम देश क्या चाहते हैं? हमें पूरी दुनिया के स्तर पर इस पर विचार करने की जरूरत है और इसे जानने की जरूरत है।

      पूंजीवादी लुटेरी और शोषक व्यवस्था वाले अमेरिका के पास दुनिया को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वह पूरी दुनिया को युद्ध में झोंककर सारी दुनिया पर अपना कब्जा और प्रभुत्व कायम चाहता है। पूरा पश्चिमी खेमा, पूरी दुनिया पर अपना राज कायम करना चाहता है जो खतरनाक, खूनी और गंदा खेल है। वे यानी पश्चिमी देश, पूरी दुनिया को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। पूरी दुनिया में अपनी लूट को कायम करने के अलावा और अपनी लूट को जारी रखने की नीतियों को लागू करने के अलावा उसके पास कोई एजेंडा नहीं है। 

       पिछले 200 साल का पूंजीवादी लूट का इतिहास बता रहा है कि दुनिया के सारे पूंजीवादी मुल्क सिर्फ और सिर्फ अपनी पूंजी के निजाम और प्रभुत्व को बढ़ाना चाहते हैं, अपने मुनाफों को बढ़ाना चाहते हैं। दुनिया ने जो तरक्की और उन्नति और प्रगति की है, वे उसका लाभ दुनिया की सारी जनता को नहीं देना चाहते और अपने इस विकास का फायदा उठाकर, पूरी दुनिया से मुनाफा बटोरना चाहते हैं, वैज्ञानिक विकास का फायदा भी वे पूरी दुनिया को नहीं देना चाहते। उनके पास सारी दुनिया के मजदूरों और किसानों एवं तमाम मेहनतकशों के कल्याण की नीतियां नहीं है। पूंजीवादी व्यवस्था दुनिया में भयंकर रूप से फैली गरीबी, भूखमरी, अमीरी, गरीबी, बेरोजगारी, कमरतोड़ मंहगाई , असमान विकास, शोषण, जुल्म, अन्याय, हिंसा, खून खराबे और युध्दों का खात्मा नहीं कर सकती।

     पश्चिमी देश यूक्रेन में और अब इजराइल कोई एकतरफा युद्ध के लिए भड़का रहे हैं। अमेरिका जानबूझकर तैवान में हस्तक्षेप करके दुनिया को अस्थिर करने की तैयारियां कर रहा है। अमेरिका क्वैड बनाकर, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान को शामिल कर लिया है, चीन को घेरने और आतंकित करने की नीतियां अपनाता चला आ रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश पूरी दुनिया में तनाव पैदा कर रहे हैं।

      पश्चिमी विचारधारा यानी लुटेरा पूंजीवाद जनता और देशों की संप्रभुता को नहीं मानता, उनके अस्तित्व को नकारता और रौंदता है। वह उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है। वह चाहता है कि सारी दुनिया उनकी आज्ञा, उनके हुक्म का पालन करे। पश्चिम के पास दुनिया को देने के लिए कुछ भी नहीं है। सकारात्मक विचार और सर्वांगीण विकास उनके पास नहीं है। पश्चिमी देश केवल अपना प्रभुत्व स्थापित और कायम रखना चाहते हैं। पश्चिम देश अपने लुटेरी और पूंजीवादी संस्कृति को, सोच को और मानसिकता को, दुनिया पर थोपना चाहते हैं।

      पश्चिमी देश चाहते हैं कि पूरी दुनिया उनके लुटेरे विचारों को, पूरी तरह से, बिना किसी नानुकुर के स्वीकार कर ले और उनके मातहत हो जाए। पश्चिमी देश नहीं चाहते कि दुनिया के देश निजीकरण, उदारीकरण और वैश्विक वैश्वीकरण की नीतियों का फायदा उठाएं। अगर कोई देश ऐसा करता है तो वे उसका विरोध करते हैं। विशेष रूप से चीन ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों  को अपने यहां लागू किया और उनसे फायदा उठाया और देखते ही देखते वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ताकत बन गया है। इन नीतियों को लागू करने की वजह से पश्चिमी देश, चीन को अपना दुश्मन समझने लगे हैं। अब वे चीन द्वारा मुफ्त व्यापार, आर्थिक खुलापन और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा का विरोध कर रहे हैं और उसे चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

      उनका मानना हैं कि वे पतनशील नहीं है, जो उन्हें पसंद नहीं है, उसे वे मिलकर समाप्त कर देना चाहते हैं जैसे कि रूस, इराक, चीन, ईरान, लीबिया अफगानिस्तान और दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के देशों में लगातार बिना किसी डर के और रुकावट के हस्तक्षेप पैदा कर रहे हैं, अपनी नीतियों को वहां थोप रहे हैं, सैकड़ों वर्षों से वहां की धनसंपदा को लूट रहे हैं और अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। उन्होंने जनता के अधिकारों को आगे नहीं बढ़ाया है, उन्हें बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी से निजात नहीं दिलाई है। अब वे वहां की सरकारों को, अपने अपने देशों में, जन समर्थक और जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने से रोक रहे हैं।

       वे दुनिया की जनता को अपनी स्वतंत्र और निष्पक्ष व मनचाही नीतियां लागू करने देना नहीं चाहते। वे क्यूबा में समाजवादी व्यवस्था का विरोध करते हैं। पिछले 60 साल से क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया हुआ है। वे क्यूबा को अपनी समाजवादी नीतियों को खुलकर लागू करने से रोक रहे हैं। क्यूबा लगातार अमेरिका के भय और आर्थिक नाकेबंदी में जी रहा है। अमेरिका वहां की जनता को अपनी आजादी का प्रयोग व उपयोग नहीं करने देना चाहता। वह क्यूबा की जनता की आजादी का सबसे बड़ा दुश्मन बन कर बैठ गया है। अमेरिका यही काम दक्षिणी अमेरिका के विभिन्न देशों में यही काम कर रहा है।

     पूंजीवादी व्यवस्था के देश, पूरी दुनिया में फासीवादी ताकतों को बढ़ावा दे रहे हैं और फासीवादी निजामों की रक्षा कर रहे हैं, उसकी स्थापना करना चाहते हैं और फासीवादी, जनविरोधी व्यवस्था और विचारधारा को उन देशों और जनता पर थोपना चाहते हैं। वे रूस और चीन को फासीवादी निजामों और आक्रामक तौर तरीकों से घेर रहे हैं। फासीवादी लोगों के द्वारा वहां पर हस्तक्षेप करा रहे हैं।

      वे जनवादी,  धर्मनिरपेक्ष, स्वतंत्र और समाजवादी लेखकों, लेखन और साहित्य से घृणा करते हैं। उनकी पुस्तकों को बैन कर रहे हैं, जला रहे हैं। ये देश इस्लाम, ईसाइयत, स्वतंत्रता, देशभक्ति और समाजवाद की अच्छाइयों का विरोध करते हैं। वे आक्रामक, विस्तारवादी और चंद पूंजीपतियों की पूंजी और धन दौलत बढ़ाने की नीतियों पर चलते हैं और इन्हीं नीतियों को लागू करते हैं और वे चंद पूंजीपतियों के मुनाफे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। पश्चिमी देश, पूरी दुनिया को अपनी तरह से चलाना चाहते हैं, अपनी तरह से हाथियाना चाहते हैं।

     यह एकदम अनुचित है। यह नहीं चलेगा। दुनिया में जो सर्व हितकारी, सर्वसमावेशी और मानवीय है, वही चलेगा और जिसे पूरी दुनिया के लोग चाहते हैं, दुनिया में वही सोच चलेगी। जोर जबरदस्ती से कोई सोच ना तो लागू की जा सकती है और दुनिया में जोर जबरदस्ती के आधार पर कोई विचारधारा ना ही आगे बढ़ सकती।

    अगर पूंजीवादी लुटेरी व्यवस्था सोच और मानसिकता के लोग, पूरी दुनिया को एक तरह से हांकना चाहते हैं, अपनी जन विरोधी विचारधारा को पूरी दुनिया पर थोपना चाहते हैं, अपने लुटेरे निजाम और सोच को पूरी दुनिया में कायम करना चाहते हैं, पूरी दुनिया के संसाधनों को लूटना चाहते हैं, तो यह नहीं चलेगा। लोग इसका विरोध करेंगे और अपने अपने हक अधिकारों, न्याय, आजादी, जनतंत्र, गणतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। पूंजीवादी वैश्विक लूट का विरोध करेंगे और अपने अपने देशों में किसान मजदूर समर्थक जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने की कोशिश करेंगे।

    जब 106 साल पहले 1917 में रूस में मेहनतकशों के द्वारा समाजवादी क्रांति की गई और वहां किसानों मजदूरों की सरकार और सत्ता कायम की गई और उसके बाद इस समाजवादी सरकार ने वहां की जनता में सबको रोटी कपड़ा मकान शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार माहिया करा दिए। सारी जनता को विकास का लाभ दिया और देश के संसाधनों को पूरी जनता के विकास के लिए प्रयोग किया और उसने पूंजीवाद के तौर तरीकों को पूरी तरह से त्याग दिया और जन कल्याणकारी कदमों को उठाया।

       इसके बाद पूरी दुनिया में समाजवाद की लहर चल पडी और एक तिहाई से ज्यादा दुनिया लाल रंग में रंग गई और वहां पर किसानों मजदूरों की सरकारें कायम हो गई और इन समाजवादी सरकारों ने चंद लोगों के कल्याण के लिए काम न करके, पूरे समाज के लोगों के कल्याण और विकास के लिए काम किया और अपनी पूरी जनता को सबको काम, सबको रोटी, सबको शिक्षा, सबको स्वास्थ्य, सबको रोजगार मोहिया करा दिये और उन्होंने अपने-अपने देश में पूंजीवादी सोच को ठुकरा कर, पूरी जनता के कल्याण हेतु समाजवादी कल्याणकारी राज्य कायम किया और उसने दिखा दिया की केवल समाजवादी व्यवस्था में ही, पूरे देशवासियों की और पूरी दुनिया की जनता का कल्याण किया जा सकता है और पूरी दुनिया को पूंजीपतियों की गुलामी से, शोषण से, जुल्म से, अन्याय से और मुनाफाखोरी से बचा जा सकता है।

       इस प्रकार यह पूरी दुनिया में सर्वविदित हो गया कि समता, समानता, न्याय, स्वतंत्रता, सम्प्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, आपसी सहयोग, भाईचारे का सर्वव्यापी माहौल कायम करके और सर्वकल्याणकारी समाजवादी व्यवस्था कायम करके ही, इस दुनिया का विकास किया जा सकता है, इसमें अमन चैन, आपसी भाईचारा, सबका विकास और शांति स्थापित की जा सकती है। पूरी दुनिया की जनता देख रही है कि पूंजीवादी व्यवस्था और सोच उसकी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती है।

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