.ब्रजेश जोशी
गुमास्तानगर चौराहे का करोड़ों का प्लाट बना टैक्सी स्टैंड –पार्किंग, चाय – पान , पीने-खाने का ठिया और मूत्रालय … ! ४६ साल से खुला पड़ा है कसेराजी का प्लाट…बड़ा नाम होते हुए भी गुमास्तानगर के चुनाव में इन्हें मात्र १३० वोट मिले..!.
आप अगर इंदौर शहर में घूमते होंगे तो आज भी आपको सालों पूर्व बीके हुए कई ऐसे खाली प्लाट देखने को मिल जाएंगे ! कभी हजारों में ख़रीदे गये ये प्लाट आज करोड़ों की कीमत रखते हैं | ऐसा ही एक ६००० वर्गफीट का प्लाट है गुमास्तानगर चौराहे पर जो कि श्री लक्ष्मीनारायण –बद्रीनारायण कसेरा का है, जो इन्हें १९७५ में गुमास्तानगर संस्था ने दिया था | नाम से ही लक्ष्मीनारायण …कसेराजी के पास ऐसे कुछ और प्लाट और अचल संपतियां भी है ये बड़े आसामी भी कहलाते है लेकिन कभी कुछ बेचने का काम वो नहीं करते हैं, ऐसा लोग बताते हैं |

गुमास्तानगर चौराहा स्थित उनके कार्नर प्लाट के लिए भी कई खरीदार उनसे मिलें लेकिन वो प्लाट बेचने को कभी तैयार नहीं होते है ना ही किसी को किराये से देने के लिए | इसी के चलते अब ये प्लाट एक ऐसा ठिया बन गया है जहाँ हर तरह के शौकीन लोग रोज आनंद लेते हैं |यहाँ दिन में चाय चलती है तो सिगरेट –चरस और बीड़ी का धुंआ भी उड़ता दिखता है !रात होते ही ये प्लाट भी रंगीन हो जाता है ,हर तरह का रंग आप यहाँ देख सकते हैं | यहाँ सिर्फ क्षेत्रीय लोग ही धुंआ फूंकने नहीं आते यहाँ तो चंदननगर,द्वारकापुरी,सुदामानगर और आसपास के भी कुछ विशेष तत्व इस ठिया बन चुकी जगह का पूरा उपयोग करने आते हैं | हां ,ये बात और है कि लोगों के बड़ी संख्या में यहाँ बैठने से, खड़े रहने से कालोनी के लोगों में भय का भाव भी बना रहता है | लेकिन ये बात अलग है कि यहाँ पर चाय वाला ,पान वाला और खड़ा हुआ हर ऑटो वाला सदा ही खुश नज़र आता है |उनका कहना है कि बहुत ही उदारमना हैं श्री कसेराजी, हमसे कुछ मांगते ही नहीं, सालों हो गये यहाँ ठिया जमाए | वही गुमास्तानगर संस्था के लोग कहते है हमने कोशिश की थी कि कम से कम बाउंड्री वाल तो समाजसेवी कसेराजी बना ले लेकिन वो शायद बनाना नहीं चाहते हैं , यही कारण है कि प्लाट अब मूत्रालय के रूप में भी उपयोग में आता है, आसपास के पचासों दुकानदार इस प्लाट का उपयोग मूत्रालय के रूप में ही करते हैं ,यहाँ तक की निगम के सफाई कर्मी आदि भी | प्लाट खुला होने से कचरा और गंदगी भी एकत्र होती रहती है | आसपास रहने वालों की शिकायत भी आती है पर क्या करे कसेराजी यहाँ कुछ करते ही नहीं,वो अपनी मर्जी के मालिक जो ठहरे | वो संस्था के सबसे पुराने सदस्यों में से एक हैं और अबकी बार सितम्बर माह के अंत में तो वें गुमास्तानगर संस्था का चुनाव भी लड़े लेकिन बड़ा नाम होने के बाद भी उन्हें मात्र १३० वोट मिले और वें चुनाव भी हार गये |
कुलमिलाकर हम तो यही कह सकते है कि यहाँ यदि निर्माण होता है इससे आसपास के लोगों को खासी राहत मिलेगी और गुमास्तानगर संस्था पर भी सवाल खड़े नहीं होंगे कि खरीदार ने अब तक निर्माण क्यों नहीं किया | लेकिन जिनका प्रमुख ठिया ये प्लाट बन चुका है उन्हें यदि यहाँ निर्माण हुआ तो जरुर निराशा होगी क्योंकि आजकल करोड़ों की जमींन मुफ्त में खाने-पिने के लिए इस्तेमाल करने को कहाँ मिलती है, हर जगह चौकीदार जो रहते हैं | दुनिया का पालनकर्ता भगवान लक्ष्मीनारायण उम्र दराज समाजसेवी आदरणीय लक्ष्मीनारायणजी कसेराजी को सद्बुद्धि प्रदान करे और वें भी क्षेत्र के विकास में अपना कुछ योगदान दे सके और उस प्लाट का भी कल्याण हो जाए जो ४६ साल पुराना हो चुका है |जय रणजीत ...ब्रजेश जोशी … वरिष्ठ पत्रकार …इंदौर..