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अमेरिका में तो केवल रंगभेद है,भारत में रंगभेद के साथ भयंकरतम् जातिभेद और लिंगभेद भी है !

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-निर्मल कुमार शर्मा

अमेरिका में तो केवल रंगभेद है,अभी पिछले दिनों वहाँ एक अश्वेत व्यक्ति को एक छोटे से अपराध के लिए वहाँ रंगभेदी घृणा की वजह से एक गोरे रंग के पुलिस वाले द्वारा अपने घुटनों से उसके गले को दबाकर उसकी निर्मम हत्या करने का मामला दुनियाभर की मिडिया में प्रमुखता से छाया रहा। अमेरिका भर में उस गोरे पुलिस वाले के उस दुष्कृत्य पर जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हुआ, अमेरिकी राष्ट्रपति को विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों की वजह से ह्वाइट हाउस के बंकर में छिपना पड़ा था,वहाँँ के चालीस शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ गया ! समाचार पत्रों की सूचनाओं के अनुसार अब यह रंगभेद विरोधी आंदोलन यूरोपियन देशों में भी ब्लैक लाइव्स मैटर यानि अश्वेतों की जिंदगी भी महत्वपूर्ण है के नाम से आंदलनों की झड़ी लगी हुई है। इस अमानवीय रंगभेदी बर्बरता के खि़लाफ वैश्विक आंदोलनों की वजह से विश्व की दो जानी-मानी सौदर्यप्रसाधनों को बनाने वाली कंपनियाँ क्रमशः यूनिलीवर और जॉनसन एंड जॉनसन जैसी कंपनियाँ भी अपने प्रोडक्ट्स जो कथित काले या साँवले रंग के व्यक्ति को गोरा बनाने की दावा करनेवाली क्रीम फेयर एंड लवली सहित अपने इस तरह की गोरा बनाने की दावा करनेवाली सभी उत्पादों को बंद करने की घोषणा कर चुकी हैं !

         पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका में तो केवल रंगभेद जैसे अमानवीय प्रथाएँ ही अस्तित्व में हैं,परन्तु भारत जैसे देश में तो रंगभेद के साथ,जातिभेद और लिंगभेद भी इक्कीसवीं सदी के अति आधुनिक वैज्ञानिक युग में अभी भी अपने भयंकरतम् और पैशाचिक रूप में उपस्थित हैं !भारत के हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश ऐसे क्षेत्र हैं,जहाँ अभी भी लड़कियों को माँ के गर्भ में ही निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी जाती है !एक आंकड़े के अनुसार उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में प्रति 1000 लड़कों पर केवल 700 लड़कियों का अनुपात रह गया है। उत्तराखंड में पिछले साल मई-जून में उसके 132 गाँवों में केवल और केवल 200 लड़के पैदा हुए। उक्त उदाहरणों से यह बात दृढतापूर्वक स्थापित होती है कि आज के आधुनिक विज्ञान के युग में भी कितनी निर्ममता से लड़कियों को उनके जन्म लेने से पहले ही हत्या कर दी जा रही है ! पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाँवों में लड़कियों की भ्रूणहत्या करनेवाले डॉक्टरों ने गाँवों में बाकायदा इश्तिहार छपवाकर दिवारों पर चिपकाए थे कि केवल 500 रूपये खर्चकर बाद में लड़कियों के दहेज में खर्च होनेवाले 5 लाख बचाएं। जन्म के बाद भी लड़कियों की भारतीय समाज में घोर उपेक्षा होती है,अगर वह लड़की साँवले या काले रंग की हुई,तो उसका तो भगवान ही मालिक है ! उसे बचपन से ही तिरस्कृत शब्द कलुई कहकर परिवार वाले और अड़ोसी-पड़ोसी भी बुलाने लगते हैं।

    जहाँ तक भारत में जातिवाद,अश्यपृश्यता, छूआछूत,ऊँच-नीच का प्रश्न है। जातिवादी व्यवस्था के रचयिता मनु के समय में भी जातिवादी वैमनस्यता का वह नजारा नहीं दिखता होगा,जितना भारत के स्वतंत्रता के 73 साल बीत चुकने के बाद भी उसका वीभत्स रूप आज भी दिखने को मिल जा रहा है,उदाहरणार्थ एक आंकड़े के अनुसार गुजरात जैसे विकसित कहे जानेवाले राज्य से लेकर उत्तर प्रदेश,बिहार, जम्मूकश्मीर आदि 12 राज्यों में अभी भी नीची कही जानेवाली दलित जातियों की गरीब करीब एक लाख साठ हजार औरतें सिर पर मैला ढोने के काम में अभी भी लगी हुई हैं। इसके अतिरिक्त नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2017 के आंकड़ों के मुताबिक देश की राष्ट्रीय राजधानी केवल दिल्ली में 74 दलित और पूरे देश में 1470 गरीब दलित लोग सीवर में जहरीली गैस से दम घुटने से डूबकर मर गये ! इस देश में हर रोज 4 दलित महिलाओं के साथ कथित सवर्ण दबंग बलात्कार कर देते हैं।

        अत्यंत दुःखद और हतप्रभ करनेवाली स्थिति यह है कि अंतरिक्ष युग में प्रवेश करनेवाले इस कथित विकास की दौड़ में छलांग लगाने वाले इस देश में उक्त घोर असमानता,लड़कियों,औरतों और दलितों के प्रति इतना क्रूर,वहशी व अमानवीय व्यवहार के बावजूद इस देश के शिक्षित और जागरुक समाज तथा मिडिया में कोई खास विरोध की कोई अनुगुंज सुनाई ही नहीं दे रही है ! सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और जूलूस तो बहुत दूर की बात है ! जैसे अमेरिका और यूरोपीय देशों में एक अश्वेत व्यक्ति के खिलाफ किए जुल्म से पूरा उत्तरी अमेरिका और यूरोपियन देश उद्वेलित और आक्रोशित हो गया था। उक्त ज्वलंत समस्याओं पर भी भारत जैसे देश में यहाँ के समाज की निष्क्रियता व उदासीनता हतप्रभ करनेवाली है। इस पर तुर्रा यह कि वर्तमान समय में केन्द्र में सत्तारूढ़ सरकार इस देश में पुनः हजारों साल पुरानी मनु के अनुसार जातिआधारित व्यवस्था पुनः लागू करने की जी-तोड़ कोशिश कर रही है ! इस देश के लिए इससे  दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और क्या हो सकती है ?

-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उ.प्र.

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