अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सोना खरीदने का विशेष महत्व है, क्योंकि मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर खरीदी गई चीजें सुख-समृद्धि का प्रतीक होती हैं। अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना एक परंपरा ही नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का भी प्रतीक है। हालांकि इन दिनों बाजार में हर चीज में मिलावट हो रही है। सोना भी मिलावट के इस खेल से बचा नहीं है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बाजार में नकली सोना खूब बिक रहा है। ऐसे में सोना खरीदते समय पूरी सतर्कता बरतें और सही जानकारी के साथ फैसला लें। अगर आप भी इस खास मौके पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन पांच जरूरी बातों का ध्यान जरूर रखें।
हॉलमार्क ज्वेलरी ही खरीदें
सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसलिए हमेशा BIS हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही लें। छह अंकों का हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोने में दी गई कैरेट के अनुसार शुद्धता है। बिना हॉलमार्क के सोना लेने से भविष्य में नुकसान हो सकता है।
रसीद और बिल जरूर लें
सोना खरीदते वक्त दुकानदार से पूरी जानकारी के साथ पक्का बिल लें। अक्सर व्यापारी डिस्काउंट के नाम पर बिल न देने के बहाने बनाते हैं। लेकिन बिल जरूर लें, जिसमें सोने की शुद्धता और वजन आदि जानकारी दर्ज होना चाहिए। बिल केवल खरीदारी का प्रमाण ही नहीं देता, बल्कि भविष्य में अगर आप ज्वेलरी को बेचने या बदलने का सोचें, तो बिल मददगार साबित होता है।
सोने की वर्तमान रेट जान लें
अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर अक्सर सोने के दाम में हलचल रहती है। खरीदने से पहले बाजार में सोने के चालू रेट की जानकारी जरूर कर लें, ताकि आपको सही कीमत पर सही डील मिले।
मेकिंग चार्जेस की जांच
सोने की ज्वेलरी खरीदते समय सिर्फ सोने के भाव पर ही ध्यान न दें, बल्कि मेकिंग चार्जेस पर भी नजर रखें। अक्षय तृतीया के मौके पर कई ज्वैलर्स लुभावने ऑफर देते हैं, जैसे 20 प्रतिशत की छूट, मेकिंग चार्ज पर 50 फीसदी तक डिस्काउंट ऑफर करते हैं। सोना खरीदते समय ज्वेलर से मेकिंग चार्ज के बारे में जरूर पूछ लें। कई बार दुकानदार मेकिंग चार्जेस के नाम पर अतिरिक्त रकम वसूलते हैं। हमेशा मेकिंग चार्जेस पूछकर और तुलना करके ही खरीदारी करें।
मेकिंग चार्जेस पर मोलभाव
ज्वेलरी की कीमत में करीब 30 फीसदी हिस्सा सिर्फ मेकिंग चार्ज ही होता है, जिससे ज्वेलर्स का फायदा होता है। इसलिए अगर सोना खरीदते समय मोल भाव कर रहे हैं तो मेकिंग चार्ज पर करें और कीमत को कम कराने की कोशिश करें।
इस बार शुभ त्रिवेणी योग में मनेगी अक्षय तृतीया
30 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि योग , शोभन और रवि योग में अक्षय तृतीया का संगम महत्वपूर्ण और फलदायी
इंदौर। पवित्र वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल को विभिन्न योगों में मनाया जाएगा। शहर के मंदिरों में अक्षय तृतीया पर विभिन्न अनुष्ठान होंगे। ब्राह्मण समाज भगवान परशुराम की शोभायात्रा निकालेगा, वहीं सामूहिक विवाह की धूमधाम शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में रहेगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार आखातीज को श्री विष्णु, माता लक्ष्मी और गौरी की पूजा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य करना और सोना खरीदना शुभ माना जाता है। यह दिन सतयुग और त्रेतायुग के आरम्भ का प्रतीक है। वहीं श्रीहरि के अवतार भगवान परशुराम का इस पावन भूमि पर धर्म की स्थापना के लिए अवतार अक्षय तृतीया पर ही हुआ था।
आचार्य पं. रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने बताया कि 29 अप्रैल को शाम 5.32 बजे से 30 अप्रैल की दोपहर 2.25 बजे तक अक्षय तृतीया की तिथि रहेगी। उदयातिथि में 30 अप्रैल को शुभ अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि अक्षय तृतीया को किए गए दान, पुण्य, जप और तप का फल कभी नष्ट नहीं होता है। हिंदू धर्म में धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है अक्षय तृतीया। इस तिथि में किए गए सभी काम सफल और सिद्ध होते हैं। इस तिथि में कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि अक्षय, यानी जिसका क्षय न हो या जो कभी खत्म न हो। वहीं तृतीया, यानी तीसरी तिथि। इस तरह से अक्षय तृतीया का अर्थ हुआ कि वैशाख माह की तीसरी तिथि को जो भी काम किए जाएंगे, उनका कभी क्षय नहीं होगा।.

अनेक ब्राह्मण संगठन निकालेंगे परंपरागत शोभायात्रा
30 अप्रैल को बड़ा गणपति से राजबाड़ा तक सर्वब्राह्मण समाज के बैनर तले शोभायात्रा निकाली जाएगी। वहीं बापट चौराहे से सर्वब्राह्मण युवा संगठन विशाल शोभायात्रा निकालेगा। परशुराम महासभा मप्र द्वारा तीन दिनी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 29 अप्रैल को राजेंद्र नगर स्थित परशुराम चौक पर भगवान परशुराम की आरती और 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर ब्रह्मतीर्थ जानापाव पहुंचकर शहर के विप्र बंधु सुबह 4 बजे भगवान परशुराम की प्रतिमा का दुग्धाभिषेक करेंगे।
बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे, बांकेबिहारी के चरण दर्शन होंगे
अक्षय तृतीया का बड़ा महत्व है। चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियां और धाम में अनुष्ठान होंगे तो वहीं वृंदावन में बांकेबिहारीजी के चरण के दर्शन भी अक्षय तृतीया के दिन ही होंगे। इस दिन अपने पूर्वजों की पूजा और पिंडदान से पितरों को मोक्ष मिलता है। सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी दिन हुई थी। इस दिन भगवान विष्णु ने नर-नारायण और परशुराम का अवतार लिया था।
विभिन्न योगों में इस बार शुभ फलदायी रहेगी अक्षय तृतीया
इस साल अक्षय तृतीया पर त्रिवेणी, सर्वार्थसिद्धि योग, शोभन योग और रवि योग बन रहे हैं। यह सभी ही अद्भुत योग हैं। सर्वार्थसिद्धि योग में जो भी काम किया जाता है, वह सिद्ध हो जाता है। शोभन योग शुभता का संकेत देता है और रवि योग काम में सफलता दिलाता है। ऐसे में इन योगों में पूजा, जप, तप और दान का विशेष महत्व है। इस दिन प्रभु विष्णु की आराधना और जप से अक्षय फल की प्राप्ति कर सकते हैं।