-सुसंस्कृति परिहार
इन दिनों दो घटनाओं ने जातिवाद के ज़ख़्म को और हरा कर दिया जब जज के स्वत: संज्ञान कार्रवाई पर पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर की पहल और समाज के नेताओं पर, भी पिछड़े जाति के युवक ने भरोसा नहीं किया है उसने एक ब्राह्मण के पैर धोकर पीना और दक्षिणा देकर अपनी ग़लती को माफ करना उचित समझा है।उसका कहना साफ़ था मुझे कल इन्हीं लोगों के बीच रहना है।कोई नेता,जज, कलेक्टर पुलिस कब तक हमें बचाएगी।
एक पिछड़े युवक के इस विचार से शायद आप भी सहमत होंगे। लेकिन विचारणीय यह है कि संविधान की दुहाई देने और सबके विकास की बात का कोई असर इन तक क्यों नहीं पहुंच पाया है।इसके पीछे मूल भावना कोर्ट-कचहरी में पिसना और उच्च जाति के जोखिम का सवाल ही प्रमुख हैं।सच है अब तक समाज में ऐसे लोग नहीं तैयार हो पाए हैं जो इस शोषण के लिए मिलकर बुलंद आवाज़ उठाएं और हर कदम पर शोषित के साथ खड़े रहें।
दूसरी घटना रायबरेली के हरिओम
बाल्मीकि के बाबा वाले सामूहिक लिंचन से हुई मौत के बाद देखने को मिली।जब बाल्मीकि परिवार ने रायबरेली सांसद और प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने मिलने इंकार कर दिया।ऐसा क्यों हुआ क्योंकि वहां जो सरकार है उसने ऐसा आतंक फैला रखा है कि वे विपक्ष के नेता को भी अपनी बात कहने से डरते हैं। कहीं इसका खामियाजा उन्हें ना भुगतना पड़े। क्योंकि ऐसे बहुत से मामले वहां हो चुके हैं जिन्होने अदालत जाने की कोशिश की उनके पूरे परिवार को ज़मींदोज़ कर दिया गया। भला ऐसे समय में यह ख़तरा वे कैसे मोल ले सकते थे।
किंतु,यह राहुल गांधी की ताकत और विश्वास था वे देर से ही सही उस परिवार से मिले। उनके परिवार के साथ सहानुभूति से पेश आए और उन्हें उचित मुआवजा और सुरक्षा का वादा कर पाए। विदित हो, राहुल गांधी ने ऐसे कई दुखी परिवारों को आसरा और नौकरी दिलाई है ।भले वहां उनकी सरकार ना हो। हालांकि यह तो वक्त बताएगा कि वह परिवार सुकून की ज़िंदगी जी पाया या नहीं।
ये दो घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि लोग भाजपा शासित दोनों राज्यों में कितने प्रताड़ित और दबिश में हैं।जबकि भाजपा ऐसी घटनाओं को अपने काल की उपलब्धि मान सकती है क्योंकि उनका जो मनुवादी फ़लसफ़ा है ये घटनाएं उनके अनुकूल हैं। सबसे बड़ी बात जो दमोह के पिछड़े वर्ग के युवा ने कही है वह सौ प्रतिशत सच हो गई जब स्वत: संज्ञान लेने वाले जस्टिस अतुल श्रीधरन का स्थानांतरण कर दिया गया। उसके बाद यह तय है कि जिला प्रशासन भी उसके साथ खड़ा नहीं रहेगा।वे सब भाजपा मुखी हो कार्यों को अंजाम देंगे।जैसा चतुर्दिक हो रहा है।
अब संविधान रक्षकों को इस विषय पर गहनता से सोचना होगा क्योंकि जब जज का ये हश्र होने लगा हो तो न्याय की उम्मीद भला किस्से होगी? वे वापस पंडित और मंदिरों में बैठे भगवान के पास ना जाएं तो कहां जाएंगे।

