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इसे व्यवस्था परिवर्तन की लडाई में बदलना होगा

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अंग्रेज सरकार ने
भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को
नियमों के खिलाफ जाकर
सायं को फांसी देकर
और
रात को ही पारिवारिक सदस्यों से छुपकर
चिता में अग्नि देकर
सुलगती विद्रोह की आग को दबाने की कोशिश की।

89 साल बाद
मनीषा की लाश
रात के अंधेरे में जला दी गई
सरकारी आदेश के बाद।

लेकिन, लोग उठ खड़े हो रहे हैं
चिता की जलती आग
बेचैन कर रही है
शांत हो चुके ह्रदयों को
अब यह चिंगारी उठी ही है तो
इसे दावानल में बदलना ही होगा
बिना किसी अगली घटना का इंतजार किये।

आरोपियों को सख्त सजा दिलानी ही होगी
मगर ये भी याद रखना होगा
बलात्कारी कोई यूं ही नहीं बन जाता
ये सड़ी गली इस व्यवस्था की देन है
इसलिए लड़ाई
बलात्कारियों की सजा तक ही नहीं रूकनी चाहिए
इसे व्यवस्था परिवर्तन की लडाई में बदलना होगा।

संदीप कुमार

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