,मुनेश त्यागी
आजकल केरल स्टोरी को लेकर भारत का सबसे शिक्षित राज्य केरल चर्चा में है। केरल भारत का सुपर शासित राज्य है। केरल की अनेकों अनेक खूबियों को जनता को नहीं बताया जा रहा है, मगर एक मनगढ़ंत कहानी पर आधारित काल्पनिक तथ्यों आधारित “दा केरला स्टोरी” बनाकर, केरल को बदनाम किया जा रहा है। फिल्म में कहा गया है कि केरल से 32000 महिलाएं धर्म परिवर्तन करा कर आई एस आईएस के गिरोह में शामिल हो गई हैं।
इस बाबत जब केरल राज्य में वहां की जनता ने जांच जांच पड़ताल की तो इन आंकड़ों को झूठा पाया। तब फिल्म के डायरेक्टर ने कहा की धर्म परिवर्तन करके आईएसआईएस में जाने वाली लड़कियों की संख्या केवल 3 है। मगर तब तक यह फिल्म अपना काम कर चुकी थी।
अगर हम असली तथ्यों के आधार पर भारत के केरल राज्य का ब्यौरा देखें तो हम पाते हैं कि 2020 में नोन रैजिडेंट इंडियन केरलवासियों ने भारत में 2.3 लाख करोड़ रुपए भारत में भेजे थे, जो अखिल भारतीय स्तर पर बाहर से भेजे जाने वाले धन का 34 परसेंट है। केरल में प्रति व्यक्ति आय 60 परसेंट है जो पूरे भारत में सबसे ज्यादा है। केरल में केवल 1% जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे रहती है जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा 22 परसेंट है।
केरल में शिक्षा का स्तर 96 परसेंट है जबकि भारत में यह 77% है। केरल में बाल शिशु मृत्यु दर 6% है जबकि भारत में यह 40% है। केरल में हमारे देश में सबसे ज्यादा नर्स हैं। वहां इस पेशे को सबसे ज्यादा अहमियत मिली हुई है। वहां के ज्यादातर परिवारों का मानना है कि यह एक पवित्र पेशा है। वे सब अपनी बहू बेटियों को इस पेशे में भेजना चाहते हैं।
भूमि सुधार के मामले में केरल भारत का सबसे पहला राज्य है जहां कोमरेड ई एम एस नम्बूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार आने के बाद भूमि सुधारों को लागू किया गया और लैंड सीलिंग के मुताबिक फालतू जमीन को सारे खेतिहर मजदूरों में और किसानों में बांट दिया गया, जिसका प्रतिशत भारत में सबसे ज्यादा है और इस प्रकार किसान और खेत मजदूरों को जमीन का मालिक बनाया गया।
केरल में दूसरे राज्यों के मुकाबले अपराध की घटनाएं सबसे कम हैं। केरल में लगभग सारी फसलों का मिनिमम सपोर्ट प्राइस नियत है। यह पूरे देश में एक कमाल की बात है। रोजगार के क्षेत्र में केरल सबसे ज्यादा सबसे आगे है। 2021 में वहां पर 13,440 लोगों को रोजगार दिया गया जबकि 2022 में 24,380 लोगों को रोजगार दिया गया जो भारत में दूसरे राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। वहां की पंचायतों में औरतों की सबसे ज्यादा भागीदारी है। वहां की पंचायतों में औरतें बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं और पंचायतों के शासन प्रशासन में अहम भूमिका निभाती हैं।
केरल की सरकार ने अपने राज में जनकल्याण और जन सौंदर्य की राजनीति अपनाई हुई है। वहां पर हिंदू मुसलमान के नाम पर दंगे नहीं होते। वहां की सरकार दंगों में शामिल नहीं है। वहां की सरकार हिंदू मुस्लिम के नाम पर दंगे कराकर सत्ता और सरकार पर कब्जा नहीं करती है। वहां की सरकार ने यह साबित करके दिखा दिया है कि सरकार की मिलीभगत के बिना कोई दंगा नहीं हो सकता है।अगर कोई दंगा हो भी गया तो सरकार बहुत तेज गति से कार्य करते हुए, दंगे पर नियंत्रण पा लेती है और दंगाईयों को कठोर कानूनी सजा दिलाई जाती है। केरल हमारे देश का सबसे ज्यादा आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास का केंद्र है। केरल हमारे देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, गरीबी उन्मूलन, भूमि सुधार के मामले में भारत का सिरमौर राज बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सारी हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतें इस फिल्म का पूरे देश में जोर-शोर प्रचार करने में लगी हुई हैं। क्योंकि यह फिल्म एक सांप्रदायिक साजिश के तहत बनाई गई है जिससे कि समाज में हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण की नफरत की मुहिम को ताकत प्रदान की जा सके। उन्होंने इस फिल्म के तथ्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। यहां पर यह जरूरी है की पूरे देश में गुजरात सरकार के तथाकथित मॉडल की काफी चर्चा की जाती है। यहां पर यह जानना जरूरी है कि साक्षरता, लिंग अनुपात, शिशु मृत्यु दर, शिक्षा और शिक्षकों की गुजरात में और केरल में क्या हालत है, इसे देखना बहुत जरूरी है। इन मुद्दों को लेकर गुजरात और केरल के तुलनात्मक आंकड़े इस प्रकार हैं,,,, साक्षरता दर गुजरात में 78% तो केरल में 94% है, महिला साक्षरता गुजरात में 76% है तो केरल में 98% है, महिला पुरुष लिंग अनुपात गुजरात में 916 है तो केरल में 1084 है, शिशु मृत्यु दर जहां केरल में 31.2 परसेंट है वहीं केरल में यह मात्र 4.4 परसेंट है, गर्भवती महिला एनीमिया गुजरात में जहां 62 परसेंट है वहीं केरल में यह मात्र 31 परसेंट है, शिक्षकों के रिक्त पद जहां गुजरात में 14,767 हैं तो केरल में 1815 हैं, बिना लाइब्रेरी वाले स्कूल गुजरात में 21234 हैं तो केरल में यह संख्या मात्र 1728 है।
2002 में हमें केरल घूमने का मौका मिला, तो हमने वहां की ट्रेनों में देखा कि वहां की अधिकांश लड़कियां सोने की मोटी मोटी चेन पहन कर अकेली ही रेल भ्रमण कर रही हैं। यह देखकर हमें बड़ा अचंभा हुआ। हमने उनसे पूछा कि आप लोग इतनी मोटी मोटी सोने की चेन पहन कर अकेले-अकेले कैसे घूम रही हैं! तो उन्होंने बताया कि हमारे यहां अपराध बहुत कम हैं। हमें अकेले निकलने में कोई परेशानी नहीं होती, यहां लूट और छीना झपटी की वारदात सबसे कम है क्योंकि यहां के लोग जनप्रिय हैं, जन हितैषी हैं, सरकार समय से काम करती है और सरकार के कामकाज करने का तरीका जातिवादी और सांप्रदायिक नहीं है और उन्होंने यह भी बताया कि यहां की औरतों को अपने बारे में, समाज के बारे में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है वह समाज के कार्यकलापों में मनुष्यों के बराबर भागीदारी करती हैं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है इसलिए हम एक आजाद प्राणी की तरह अकेले ही सफर कर सकते हैं।
इसके बाद हमने बसों में देखा कि बसों में दो हिस्से हैं एक पुरुषों के लिए, एक महिलाओं के लिए। पुरुषों का हिस्सा भरा हुआ है जबकि महिलाओं का हिस्सा खाली है। वहां पर यह अनुशासन है। लोग उसका स्वेच्छा से और बिना किसी जोर जबरदस्ती के स्वयं ही पालन करते हैं।
हमने वहां पर ऑल इंडिया लायर्स यूनियन के राष्ट्रीय सम्मेलन में देखा कि वहां के मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक गण सम्मेलन में आ जा रहे हैं, साधारण लोगों की तरह व्यवहार कर रहे हैं, उनके साथ चलने वाली भीड़ नदारद है। उन्होंने अपना भाषण दिया और चले गए। हमें पता ही नहीं चला कि वहां के मुख्यमंत्री, मंत्री गण और विधायक गण को कोई विशेष स्थान दिया जाता है। इस प्रकार हमने देखा कि वहां पर मनुष्य मात्र की समानता है, समता है, भाईचारा है, दिखावटीपन और फिजूलखर्ची नहीं है।
अभी अभी आये सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के नतीजों में 99.91% के साथ त्रिवेंद्रम भारत में सर्वोच्च स्थान पर है जबकि प्रयागराज 78% पर है। शिक्षा के क्षेत्र में केरल भारत का सबसे सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च स्थान लिए हुए हैं।
केरल में मंदिर मस्जिद और चर्च एक दूसरे के साथ-साथ बड़े प्यार से स्थित हैं। केरल में मस्जिद की कमेटी अपनी जमीन मंदिर और दलित कॉलोनियों के रास्ते के लिए मुफ्त में दे देती है। केरल की मस्जिदों में हिंदू युवक-युवतियों का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार होता है। केरल में हिंदू व्यक्ति के इलाज के लिए मस्जिद कमेटी द्वारा चंदा देने के उदाहरण मौजूद हैं। हिंदू मुस्लिम एकता की और समान व्यवहार की अनेकों अनेक कहानियां वहां पर मौजूद हैं।
केरल के कासरगोड में अब्दुल्ला व उनकी पत्नी खदीजा ने दस साल की एक लड़की को गोद लिया था, क्योंकि उसके मां-बाप चल बसे थे । वह अभी 22 साल की है। अब्दुल्ला और खदीजा ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उसकी शादी एक हिंदू लड़के से कर दी है। केरल के अंदर हजारों उदाहरण हिंदू-मुस्लिम एकता के, सामान विवाह के मौजूद हैं। मगर द केरल स्टोरी बनाने वाले को यह सब दिखाई नहीं दिया। उसने झूठी और काल्पनिक घटनाओं के आधार पर हिंदू मुस्लिम नफरत की ध्रुवीकरण की मुहिम को जारी रखने के लिए, पूरे देश प्रदेश में इसका प्रचार करने के लिए यह फिल्म बना दी, जो तथ्यों से और हकीकत से कोसों दूर है। इस प्रकार हम देख रहे हैं कि जो फिल्म में दर्शाया गया है वह केरल की कहानी नहीं है, बल्कि जो उपरोक्त उदाहरणों में और तथ्यों में दिखाया गया है वहीं केरल की असली तस्वीर है।

