डॉ. प्रिया
_एचपीवी/HPV (ह्यूमन पेपिलोमावायरस ) एक वायरल इंफेक्शन होता है, जो ज्यादातर अनेक इंसान से या रोगी इंसान यौन संबंध बनाने से दौरान फैलता है।_

यह वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के व्यक्तिगत सामान के माध्यम से भी हो सकता है। इस वायरस वार्ट्स से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं।
_उच्च जोखिम वाले एचपीवी संक्रमण के परिणामस्वरूप गर्भाशय ग्रीवा(सर्वाइकल), योनि(वैजाइनल), योनिमुख (वल्वर), ऑरोफैरिंक्स और पेनाइल कैंसर (Penile Cancer) हो सकते हैं।_
आमतौर पर महिलाओं को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि उन्हें एचपीवी हो सकता है। एचपीवी इंफेक्शन के होने पर कई बार लक्षण नजर नहीं भी आते हैं। एचपीवी के वह प्रकार जो वॉर्ट्स का कारण बनते हैं, जेनिटल एरिया समेत हाथ पैर में भी नजर आ सकते हैं।
ये वॉर्टस उभरे हुए, सपाट, गुलाबी, या त्वचा के रंग के हो सकते हैं। इसके अलावा वे फूलगोभी के आकार के भी होते हैं। ये एक या कई मस्से के समूह में भी नजर आ सकते हैं।
*HPV के लक्षण कितने दिनों में?*
जननांग पर होने वाले वार्ट्स एचपीवी वायरस से संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाने के हफ्ते, महीने या सालभर बाद भी नजर आ सकते हैं। हो सकता है उन्हें इस बात का पता ना हो कि वे संक्रमित हैं।
_विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एचपीवी के कारण गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से 95% से अधिक आबादी ग्रसित है। हालांकि, 90% से अधिक संक्रमित आबादी अंततः संक्रमण को दूर कर देती है।गर्भाशय ग्रीवा कैंसर एचपीवी से संबंधित सबसे आम बीमारी है। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लगभग सभी मामलों में एचपीवी संक्रमण को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।_
*जांच और उपचार के विकल्प*
एचपीवी से अधिकांश लोगों जीवन में कभी न कभी संक्रमित होते हैं। लेकिन, ज्यादातर मामलों में यह अपने आप ही दूर हो जाता है। पुरुषों के लिये कोई एचपीवी की जांच उपलब्ध नहीं है।
लेकिन महिलाएं एचपीवी जांच करा सकती हैं। हालांकि, यह केवल 30 वर्ष से अधिक उम्र में करवाने की सलाह दी जाती है। लेकिन असामान्य कोशिका वृद्धि की जांच के लिये महिलाओं को रेग्यूलर चेकअप और सालाना पैप स्मीयर करवाना चाहिए, जिससे गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर का समय से पता लग सके।
*कितना प्रभावी है पैप टेस्ट*
पैप टेस्ट असामान्य कोशिका वृद्धि की तरफ इशारा करता है। यदि आपका पैप स्मीयर टेस्ट में कुछ गड़बड़ी नजर आती है तो इसके आधार पर डॉक्टर निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोल्पोस्कोपी कर सकते हैं।
इसमें यदि एचपीवी की किसी भी प्रकार की पूर्ति होती है तो डॉक्टर आवश्यकता के अनुरूप उपचार के विकल्प दवा, इलेक्ट्रोकॉटरी या लेजर रिमूवल, लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल का चुनाव कर सकते हैं।
*टीका क्यों जरूरी ?*
कई अध्ययन स्पष्ट रूप से साबित करते हैं कि 80% अशिक्षित आबादी अपने जीवन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एचपीवी वायरस के संपर्क में आती है। इसलिए, एचपीवी के कैंसर वाले स्ट्रेन से बचाव के लिये टीके लगवाना महत्वपूर्ण होता है।
वैसे तो यौन संबंध बनाने से पहले टीका लगवाना एचपीवी संक्रमण को रोकने का आदर्श तरीका है। हालांकि, लोग 45 वर्ष की आयु तक बाद में भी टीका लगवा सकते हैं।
एचपीवी का टीकाकरण करवाने वाले लोगों को संक्रमण के जोखिमों को नियंत्रित रखने के लिए कुछ एहतियात बरतना जरूरी होता है। ऐसे मेंमहिलाओं को टीकाकरण के बाद हर 2-3 साल में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) की जांच करवाते रहना चाहिए।
*HPV से बचाव*
: एचपीवी के संक्रमण से बचाव के लिये पार्टनर कंडोम का उपयोग करें। यदि किसी भी पार्टनर को जननांग (private part) पर चकत्ते हैं, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए और समस्या के हल होने तक यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए।
_इसके अलावा धूम्रपान और शराब छोड़ना या सीमित करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. निःशुल्क इलाज़ हमसे लिया जा सकता है।_